जमशेदपुर : देश में सोलर प्लांट लगाने को लेकर जिस तरह से कंपनियों में जागरूकता बढ़ी है। वह दिन दूर नहीं जब भारत बिजली उत्पादन के मामले में पूरी तरह से आत्मनिर्भर होगा।

आपको बता दें कि केंद्र सरकार ने सभी कंपनियों को प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेटिव (पीएलआई) योजना के तहत 4500 करोड़ रुपये देने की घोषणा की है। जिसकी मदद से कंपनियां अपनी मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में उत्पादन क्षमता बढ़ाने में उपयोग कर सकती है।

18 कंपनियों ने दिया है आवेदन

अक्षय ऊर्जा मंत्रालय (एमएनआरई) की वित्तीय संस्था भारतीय अक्षय ऊर्जा विकास निगम (आईआरईडीए) की ओर से एक बिड जारी की गई है। इसमें देश की टाटा समूह की कंपनी, टाटा पावर, रिलायंस एनर्जी, जिंदल पावर, अडानी पावर, कोल इंडिया लिमिटेड सहित देश की 18 कंपनियों ने इसके लिए आवेदन किया है।

54.8 गीगावॉट का होगा उत्पादन

केंद्र सरकार के पास कंपनियों ने अपनी उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए जो आवेदन दिया है उसके तहत 18 कंपनियों ने 54.8 गीगावॉट उत्पादन करने की योजना बनाई है जबकि सरकार के पास वर्तमान में 10 गीगावॉट को समर्थन देने की ही क्षमता है।

कंपनियों ने चार चरणों में बढ़ाएंगी उत्पादन

केंद्र सरकार के पास जिन कंपनियों ने अपनी उत्पादन क्षमता को बढ़ाने के लिए आवेदन दिया है। वे अपने निर्माण प्रक्रिया के चार चरणों में बोलियों को विभाजित किया है। इसमें पॉलीसिलिकॉन, वेफर्स, सेल और मॉड्यूल शामिल है। वर्तमान में, भारत की मौजूदा 15 गीगावॉट उत्पादन क्षमता में कोई पॉलीसिलिकॉन या वेफर उत्पादन क्षमता नहीं है।

इन कंपनियों ने लगाई है एकीकरण बोली

केंद्र सरकार के पास जिन कंपनियों ने आवेदन दिया है उनमें अदानी, रिलायंस, जिंदल, फर्स्ट सोलर, और आंध्र प्रदेश स्थित शिरडी साई इलेक्ट्रिकल्स ने अपनी निविदाओं के हिस्से के रूप में संपूर्ण मूल्य श्रृंखला के एकीकरण के लिए बोली लगाई है। साथ ही सीआईएल, क्यूबिक पीवी, एलएंडटी, और रीन्यू ने वेफर और उसके बाद के लिए आवेदन किया है, जबकि सूची में शेष नौ नाम जिनमें टाटा, विक्रम, वारी, एक्मे और अवाडा जैसी भारतीय कंपनियां शामिल हैं जो केवल सेल और मॉड्यूल को देखेंगे।

चीन होता है वेफर्स का आयात

विनिर्माण कंपनियां विदेशों से, मुख्य रूप से चीन से वेफर्स या सेल आयात करती हैं, और फिर उन्हें क्रमशः सेल और मॉड्यूल में इकट्ठा करती हैं। भारत में परियोजनाओं में इस्तेमाल होने वाले लगभग 95 प्रतिशत सौर उपकरण चीन या चीनी मूल की कंपनियों से आयात किए जाते हैं। चीन पर उद्योग की निर्भरता को रोकने के लिए, सरकार ने सौर आयात पर एक बुनियादी सीमा शुल्क (बीसीडी) कर भी गठित किया है। यह सेल के लिए 25 प्रतिशत और मॉड्यूल के लिए 40 प्रतिशत चार्ज किया जाएगा, और यह अप्रैल, 2022 से लागू होगा।

17,200 करोड़ रुपये पीवी निर्माण पर

अप्रैल माह में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 4,500 करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ उच्च दक्षता वाले सौर फोटोवोल्टिक मॉड्यूल के निर्माण के लिए पीएलआई योजना को मंजूरी दी थी। इन प्रोत्साहनों से सौर पीवी निर्माण में लगभग 17,200 करोड़ रुपये का प्रत्यक्ष निवेश आने की उम्मीद है।

अक्षय ऊर्जा के लिए इन कंपनियों ने दिया आवेदन

  • पहले से चौथे चरण में
  • रिलायंस न्यू एनर्जी : 4000 मेगावॉट
  • अदानी इंफ्रास्ट्रक्चर : 4000 मेगावॉट
  • जिंदल इंडिया सोलर : 4000 मेगावॉट
  • शिरडी साई इलेक्ट्रिकल : 4000 मेगावॉट
  • फर्स्ट सोलर इंडिया : 3000 मेगावॉट

दूसरे से चौथे चरण में

  • कोल इंडिया : 4000 मेगावॉट
  • लार्सन एंड ट्रूबो : 4000 मेगावॉट
  • क्यूबिक पीवी : 1000 मेगावॉट

तीसरे से चौथे चरण में

  • टाटा पावर सोलर : 4000 मेगावॉट
  • वारे एनर्जिस : 4000 मेगावॉट
  • विक्रम सोलर : 3600 मेगावॉट
  • अवाड़ा एनर्जी : 3000 मेगावॉट
  • एक्मा सोलर : 2000 मेगावॉट
  • प्रीमियर एनर्जिस : 2000 मेगावॉट
  • जूपिटर सोलर : 1200 मेगावॉट
  • एमेवी पीवी : 1000 मेगावॉट

Edited By: Jitendra Singh