रघुवर दास के पैर छूने वाली तस्वीर पर सियासी घमासान, इरफान अंसारी और पूर्णिमा साहू आमने-सामने
दशहरा पर हनुमान की भूमिका निभा रहे कलाकार द्वारा पूर्व सीएम रघुवर दास के पैर छूने की घटना पर राजनीतिक ...और पढ़ें

जमशेदपुर में हनुमान की भूमिका निभा रहे कलाकार द्वारा पूर्व सीएम रघुवर दास के पैर छूने की घटना को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है।
HighLights
दशहरा पर कलाकार द्वारा रघुवर दास के पैर छूने पर विवाद।
इरफान अंसारी ने रघुवर दास से सार्वजनिक माफी की मांग की।
पूर्णिमा साहू ने इसे राजनीतिक विरोध और एआइ तस्वीर बताया।
जासं, जमशेदपुर। दशहरा के अवसर पर हनुमान की भूमिका निभा रहे कलाकार द्वारा पूर्व सीएम रघुवर दास के पैर छूने की घटना को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है।
राज्य के स्वास्थ्य मंत्री डा. इरफान अंसारी ने इंटरनेट मीडिया पर पोस्ट कर इस घटना पर आपत्ति जताई और रघुवर दास से सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की।
वहीं, जमशेदपुर पूर्वी की भाजपा विधायक और रघुवर दास की बहू पूर्णिमा साहू ने अंसारी के बयान पर पलटवार करते हुए इसे राजनीतिक विरोध का हिस्सा बताया।
डा. अंसारी ने अपनी पोस्ट में लिखा है कि झारखंड को तो निगल गए, कम से कम भक्तों को तो बख्श दीजिए।’ उन्होंने रघुवर दास पर सत्ता के अहंकार का आरोप लगाते हुए कहा कि भगवान राम और हनुमान करोड़ों लोगों की आस्था के प्रतीक हैं।
ऐसे में धार्मिक पात्र की भूमिका निभा रहे कलाकार के साथ हुए व्यवहार को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है। उन्होंने इस मामले में सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की। साथ ही चेतावनी दी कि माफी नहीं मांगने पर चरणबद्ध आंदोलन किया जाएगा।
इधर, विधायक पूर्णिमा साहू ने मंत्री के बयान पर आपत्ति जताते हुए कहा कि दूसरों को अहंकार और मर्यादा का पाठ पढ़ाने से पहले उन्हें अपने बयानों और राजनीति पर आत्ममंथन करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि किसी को रावण कहना राजनीतिक कुंठा को दर्शाता है। पूर्णिमा साहू ने आरोप लगाया कि घटना की तस्वीर को संदर्भ से काटकर पेश किया गया है।
उन्होंने मंत्री की पोस्ट में इस्तेमाल तस्वीर को एआइ जनरेटेड बताते हुए कहा कि राजनीतिक विरोध अपनी जगह है, लेकिन किसी का चरित्रहनन नहीं होना चाहिए।
उनके अनुसार, पूरी परिस्थिति को समझे बिना किसी संवेदनशील धार्मिक प्रसंग को राजनीतिक मुद्दा बनाना उचित नहीं है। फिलहाल इस घटना को लेकर दोनों पक्षों के बयानों से राजनीतिक विवाद गहरा गया है।
एक ओर मंत्री ने धार्मिक आस्था और मर्यादा का सवाल उठाते हुए माफी की मांग की है तो दूसरी ओर विधायक ने घटना के संदर्भ और तस्वीर की प्रामाणिकता पर सवाल उठाए हैं।
