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वोट की चोट या पहचान का संकट? पुरुलिया में 5 हजार से अधिक लोग मतदाता सूची से बाहर

Published: Tue, 07 Apr 2026 11:39 PM (IST)

पश्चिम बंगाल के पुरुलिया में चुनावी सरगर्मी के बीच 5258 लोगों के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए हैं। ...और पढ़ें

प्रतीकात्‍मक तस्‍वीर।

प्रतीकात्‍मक तस्‍वीर।

HighLights

  1. तकनीकी विसंगति और सुप्रीम कोर्ट के आदेश का असर।

  2. नागरिकता व मताधिकार बचाने को लोग परेशान, ट्रिब्यूनल की उम्मीद।

जागरण संवाददाता, पुरुलिया। पश्चिम बंगाल में चुनावी सरगर्मी के बीच पुरुलिया जिले में मतदाता सूची को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। चुनाव आयोग की तकनीकी विसंगतियों और सुप्रीम कोर्ट के कड़े निर्देशों के बाद जिले के 5258 नागरिकों के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए हैं। 
 

तकनीकी गड़बड़ी और सुप्रीम कोर्ट का आदेश

अब अपनी नागरिकता और मताधिकार बचाने के लिए ये लोग दर-दर भटकने को मजबूर हैं। जानकारी के अनुसार, लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी (तकनीकी विसंगति) के कारण जिले में कुल 33,577 नामों को अंडर एडजुडिकेशन (विचाराधीन) सूची में रखा गया था। 
 
सघन जांच और आठवें सप्लीमेंट्री वोटर लिस्ट के प्रकाशन के बाद 26,439 लोगों को तो वापस सूची में शामिल कर लिया गया। लेकिन 5258 लोग इस प्रक्रिया से बाहर हो गए। सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार, अब इन लोगों के पास ट्रिब्यूनल में अपील करने के लिए मात्र 15 दिनों का समय शेष है।
 

डिटेंशन कैंप और संदिग्ध मतदाता होने का खौफ

सूची से बाहर किए गए परिवारों में भारी मायूसी और दहशत का माहौल है। पुरुलिया नगर पालिका के हसेम अंसारी ने बताया कि पुख्ता दस्तावेज देने के बाद भी उनके पूरे परिवार का नाम काट दिया गया है।  

इधर, नितुड़िया ब्लॉक के नामोदीघा गांव के 24 लोगों ने रघुनाथपुर एसडीओ कार्यालय में ट्रिब्यूनल के लिए गुहार लगाई है। आवेदकों में सबसे बड़ा डर डाउटफुल वोटर (संदिग्ध मतदाता) घोषित होने का है। 
 
शेख सैफुल जैसे नागरिकों को डर है कि कहीं उन्हें भविष्य में डिटेंशन कैंप जैसी कठोर सरकारी कार्रवाई का सामना न करना पड़े। अपनी नागरिक पहचान को लेकर उपजी यह अनिश्चितता अब एक मानवीय संकट का रूप ले रही है।
 

युद्ध स्तर पर चल रही आवेदन की प्रक्रिया 

जिला प्रशासन का कहना है कि आवेदन जमा करने की प्रक्रिया युद्ध स्तर पर चल रही है। प्राप्त सभी आवेदनों को अंतिम निर्णय के लिए ट्रिब्यूनल को भेजा जा रहा है। अधिकारियों ने भरोसा दिलाया है कि कानूनी प्रक्रिया के तहत सभी के दावों की निष्पक्ष जांच होगी।

फिलहाल, इन हजारों लोगों के लिए ट्रिब्यूनल का दरवाजा ही उम्मीद की आखिरी किरण बचा है।