जमशेदपुर, राजेश पांडेय। Jharkhand Assembly Election 2019  शहर में चर्चाओं का बाजार पूरे दिन गरम रहा। प्रमुख चौक-चौराहे भाजपा नेता सरयू राय के टिकट को लेकर बहस का बाजार बने रहे। बेलाग-लपेट बोलने वाले यह कहते नजर आए कि खाद्य आपूर्ति मंत्री का नाम भाजपा की सूची में नहीं है। उनके जैसे वरिष्ठ नेता का टिकट होल्ड पर रख दिया गया है। उनकी बातों से सरयू राय के समर्थक आहत नजर आए। उनके दिलो-दिमाग में कयास का दौर चलता रहा। मानगो बस स्टैंड का गोलचक्कर। हनुमान मंदिर से सटे रंजन की चाय दुकान और बगल में मुकेश की पान दुकान। सोमवार को शाम पांच बजने को थे। दर्जनों लोग चाय-पान का आनंद ले रहे थे। इनमें से कुछ लोग सरयू राय के टिकट को लेकर चिंतित दिख रहे थे।

दाढ़ी वाले सज्जन, ‘काका के जीत में कवनो शंका नईखे। उनका त निर्दलीय डंका बजा देबे के चाही। जमशेदपुर पश्चिमी से उनकर जीत होईये जाई। केहू हरा ना पाई। ‘काका’ जईसन नेता कहां। आपन सरकार के भी गलत काम के दमदारी से बतावे ले। अउरी ई हे कारण बा कि उनकर पहली सूची में नाम नईखे। सांच बोलला पर ई हे कुल होला।’ ऐसे तर्क देकर गोलचक्कर की बहस को लोग आगे बढ़ाए जा रहे हैं।

उधर, मानगो जवाहर नगर वाले बैरम खान कहते हैं - सरयू राय जैसा विद्वान नेता बिहार-झारखंड में कोई नहीं है। उनकी बदौलत लालू आज जेल में हैं। उनको भाजपा से टिकट मिलना चाहिए। अगर नहीं मिला तो रायजी को अपने दम पर मैदान में कूद जाना चाहिए। जीत सुनिश्चित है।

राष्ट्रीय नाई क्रांति सेना के प्रमुख अरूण शर्मा कहते हैं, भाई साहब आजकल सच्चाई का जमाना नहीं है। भला बताइए? वह कौन कारण हो सकता है, जिससे सरयू राय का टिकट अब तक रोका गया है। हमें तो ऐसा कुछ नहीं लगता है। हां, एक बात है.. बड़े वाले नेताजी के सामने झुकते नहीं हैं। और जो विद्वान होता है, वो भला हर किसी के यहां कहां अपना सिर झुकाता है क्या? जमशेदपुर पश्चिम विधानसभा क्षेत्र से भाजपा को रायजी की टक्कर का दूसरा कोई नेता नहीं मिलेगा। कहां से मिलेगा? है ही नहीं।

ऑटो चालक मो. यूसूफ, चेकिंग-वेकिंग बंद होना चाहिए। हमलोगों को चेकिंग के नाम पर तंग किया जाता है। टिकट किसी को मिले, हमसे उससे लेना-देना नहीं है। हमें नहीं लगता कि सरयू राय ऐसा कोई काम किए हैं, जिससे उनको भाजपा टिकट दे। ऑटो चालक फिरोज को टिकट मिलने न मिलने से कोई मतलब नहीं है। मो. सरोज खान चुपचाप बहस को सुन रहे हैं। उनके मुंह से एक लफ्ज भी नहीं निकला। बगल में पान दुकान चला रहे मुकेश हर किसी की बातों को सुनकर मुस्करा दे रहे हैं। सटे ही सैलून चलाने वाले आरा के लाल मोहर कुछ परेशान नजर आ रहे हैं। उनको इस बहस से कोई मतलब नहीं है।

टिकट के लिए पार्टी लाइन पर चलना जरूरी

मानगो बाजार में हीरा होटल के पास। समय, सोमवार, शाम करीब सात बजे। यहां पर सियासी झंउझार मची हुई है। किसी एक दल-पार्टी का समर्थक कोई नहीं हैं। अलबत्ता सरयू राय के टिकट की चर्चा ही हर जुबान पर रची रही। पोस्ट आफिस रोड के नागेंद्र ठाकुर, इस बार सरयू राय को टिकट मिलता तो जीत जाते। राम जन्मभूमि और अनुच्छेद-370 का फायदा उन्हें मिलता। खुद भी अपने क्षेत्र में सक्रिय रहते हैं। हर किसी का फोन उठाते हैं। चार्चा के बीच में ही गुरुद्वारा रोड के अनिल यादव अपनी लकीर खींचने लगे। कहते हैं, टिकट के लिए सालभर पार्टी के साथ रहना पड़ता है। काम अच्छा करने से ही काम नहीं बनता है। टिकट के लिए सरकार की हां में हां मिलाना पड़ता है। बहस का मोर्चा संभालते हुए डिमना के राजेश सिंह कहते हैं-रायजी बुद्धिजीवी की श्रेणी में आते हैं किंतु उनका टिकट गड़बड़ा गया है।

 

Posted By: Rakesh Ranjan

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