जमशेदपर, जासं। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना का लाभ सभी ऐसे किसान को देना है, जिनके पास आय का बड़ा स्रोत नहीं है। इसी बात का फायदा उठाते हुए कुछ परिवार में पति-पत्नी दोनों लाभुक बन गए हैं। शायद उन्हें पता नहीं है कि इस मामले में पति-पत्नी दोनों धोखाधड़ी के आरोप में जेल जा सकते हैं। देश भर में ऐसे मामले सामने आ रहे हैं, जिसमें पति-पत्नी ही नहीं, परिवार के बालिग सदस्य भी पीएम किसान योजना के लाभुक बन गए हैं।

यदि उनका भी खाता-प्लॉट वही है, जिस पर परिवार के दूसरे सदस्य लाभुक बने हुए हैं तो परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। कई राज्यों में ऐसे लाभुकों से पूर्व में ली गई राशि वापस करने की कार्रवाई की जा रही। पूर्वी सिंहभूम जिले में ऐसा मामला सामने नहीं आया है, क्योंकि यहां इसके लिए फुल प्रूफ व्यवस्था की गई है।

जानिए कैसे पकड़े जाते हैं धोखाधड़ी के मामले

पीएम किसान योजना में अमूमन लोग किसी के बहकावे या गलत जानकारी के आधार पर पति-पत्नी दोनों लाभुक बन जाते हैं, लेकिन उन्हें यह पता नहीं होता कि इसमें वे आसानी से पकड़ लिए जाएंगे। जैसे ही किसान का आधार कार्ड सर्च किया जाता है, पति-पत्नी का नाम सामने आ जाता है। आपको शायद पता नहीं कि संपत्ति सहित कई अन्य वित्तीय मामलों में पति-पत्नी को एक यूनिट माना जाता है, इसलिए किसी एक योजना का लाभ दोनों नहीं ले सकते हैं। यदि ऐसा होता है तो धोखाधड़ी माना जाता है। यदि लाभुक लिखित माफीनामा मांग लेते हैं, तो उन्हें जेल की सजा से मुक्ति मिल जाएगी, लेकिन पूर्व में ली गई राशि लौटाना अनिवार्य है।

इन्हें नहीं मिल सकता पीएम किसान योजना का लाभ

  • यदि लाभुक आयकर दाता है।
  • खेती की जमीन का व्यवसायिक इस्तेमाल करता हो।
  • खेतिहर मजदूर या बटाईदार हो।
  • यदि खेत का मालिकाना उसके नाम पर हो।
  • यदि खेत का मालिक सरकारी कर्मचारी हो या रहा हो।
  • यदि लाभुक सांसद-विधायक रहा हो।
  • यदि लाभुक डाक्टर, इंजीनियर, वकील, चार्टर्ड एकाउंटेंट हो

कई लाभुक स्वर्गवासी हो चुके, लेकिन हो रहा भुगतान

देश भर में कई लाभुक ऐसे मिले हैं, जो स्वर्गवासी हो चुके हैं, लेकिन उनके बैंक खाते में योजना की राशि जा रही है। ऐसे मामले सामने आने के बाद उनके परिवार या बैंक खाते में दर्ज आश्रित को नोटिस भेजी जा रही है। इसमें कुछ ऐसे लाभुक भी मिले हैं, जो आयकर दाता हैं। इनसे भी राशि वसूली जा रही है। देश भर में करीब 43 लाख अयोग्य लोग योजना की राशि उठा रहे हैं। इससे सरकार को लगभग 3000 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है। ज्ञात हो कि इस योजना में एक किसान को वर्ष में छह हजार रुपये तीन किस्त में दिए जाते हैं।

Edited By: Jitendra Singh