जासं, जमशेदपुर। टाटा स्टील देश की ऐसी पहली कंपनी बन गई है जिसके पास ब्लास्ट फर्नेस (बीएफ) गैस से निकलने वाले कार्बन डाइऑक्साइड (सीओ-2) को कैप्चर करने के लिए प्लांट विकसित किया है। कंपनी के सीईओ सह एमडी टीवी नरेंद्रन ने इस प्लांट का उद्घाटन किया। टाटा स्टील सर्कुलर कार्बन इकोनॉमी को बढ़ावा देने के लिए अपने प्लांट से निकलने वाले कार्बन डाइऑक्साइड का पुन: इस्तेमाल करेगी।

यह प्लांट कार्बन कैप्चर एंड यूटिलाइजेशन (सीसीयू) सुविधा, अमाइन आधारित टेक्नोलॉजी का उपयोग करता है और कैप्चर किए गए कार्बन डाइऑक्साइड को उष्मीय मान (कैलोरीफिक वैल्यू) के साथ गैस नेटवर्क में वापस प्लांट को भेज देता है। प्लांट की प्रतिदिन की क्षमता पांच टन की है। इस प्लांट को कार्बन क्लीन नामक संस्था के तकनीकी सहयोग से तैयार किया है। इसके लिए कंपनी ने सितंबर 2020 में ही कार्बन कैप्चर, यूटिलाइजेशन एंड स्टोरेज (सीसीयूएस) के साथ हाथ मिलाया था ताकि देश में पेरिस समझौता के तहत डी-कार्बोनाइजेशन की प्रतिबद्धताओं को पूरा करने के लिए एक मजबूत परिस्थितिकी तंत्र का निर्माण किया जा सके।

डी-कार्बोनाइजेशन की दिशा में बढ़ाया कदम : एमडी

उद्घाटन के मौके पर एमडी टीवी नरेंद्रन ने कहा कि हमने डी-कार्बोनाइजेशन की दिशा में रणनीतिक रूप से हमने अपना कदम बढ़ा दिया है। हम बेहतर भविष्य के लिए नए मानक स्थापित कर रहे हैं। इंडस्ट्री लीडर बनने की ओर सतत आगे बढ़ रहे हैं। विकासशील देशों, खासकर भारत जैसे देश में स्टील इंडस्ट्री में स्थिरता के लिए यह आवश्यक है कि हम बड़े पैमाने पर कार्बन डाइऑक्साइड को कैप्चर कर उसका पुन: उपयोग कर किफायती समाधान खोजे। इससे सीओ 2 गैस का उत्सर्जन कम होगा, लागत में कमी आएगी, प्लांट को स्वच्छ ऊर्जा भी मिलेगी। इस तरह के प्लांट से प्राप्त अनुभव हमें भविष्य बड़े कार्बन प्लांट स्थापित करने के लिए आवश्यक डेटा सहित आत्मविश्वास भी देगा। हमारा अगला लक्ष्य इस तरह के प्लांट को समेकित रूप से सभी इकाइयों में स्थापित करना है।

बढ़ाई जाएगी कार्बन कैप्चर प्लांट की संख्या

कार्बन क्लीन के सीईओ अनिरुद्व शर्मा का कहना है कि वर्तमान में हम प्रतिदिन पांच टन कार्बन डाइऑक्साइड कैप्चर कर रहे हैं। प्रदर्शन सफल होने पर हम कार्बन कैप्चर परियोजनाओं की संख्या में तेजी से वृद्धि करने की योजना बना रहे हैं। ब्लास्ट फर्नेस से कार्बन डाइऑक्साइड को कैप्चर करने से न केवल स्टील प्लांट कार्बन रहित होंगे बल्कि हाइड्रोजन इकोनॉमी के रास्ते भी खुलेंगे।

ताजा पानी की खपत भी होगी कम

कंपनी प्रबंधन का कहना है कि इस नए प्लांट के शुरू होने से टाटा स्टील अपनी कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन की तीव्रता और ताजे पानी की खपत को कम करेगी। इससे सतत सप्लाई चेन विकसित कर भविष्य में इंडस्ट्री लीडर बनने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

 

Edited By: Rakesh Ranjan