हाईस्कूल के मेधावी छात्र से 15 लाख का इनामी नक्सली बनने तक की दास्तान: राम प्रसाद उर्फ सचिन की कहानी
पूर्वी सिंहभूम के पटमदा क्षेत्र का मेधावी छात्र राम प्रसाद उर्फ सचिन अब झारखंड और पश्चिम बंगाल पुलिस के लिए ...और पढ़ें

पुलिस जांच में का सचिन का नाम जमशेदपुर के पूर्व सांसद सुनील महतो की हत्या के मामले में भी सामने आया है।
HighLights
मेधावी छात्र राम प्रसाद उर्फ सचिन बना माओवादी एरिया कमांडर।
झारखंड सरकार ने उस पर 15 लाख रुपये का इनाम घोषित किया।
परिवार चाहता है कि वह हिंसा छोड़ मुख्यधारा में वापस आए।
जासं, जमशेदपुर। पूर्वी सिंहभूम जिले के पटमदा क्षेत्र में कभी एक मेधावी छात्र के रूप में पहचाना जाने वाला राम प्रसाद आज झारखंड और पश्चिम बंगाल पुलिस के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है।
परिवार में जिसे सब प्यार से 'सचिन' पुकारते थे, वही आज रामदास मार्डी उर्फ महादेव उर्फ सुनील मार्डी उर्फ रामनाथ मार्डी के नाम से माओवादी संगठन में सक्रिय है।
पुलिस के अनुसार, वह एके-47 जैसे आधुनिक हथियार से लैस होकर घूमता है और संगठन में एरिया कमांडर के पद तक पहुंच चुका है।
पटमदा, बोड़ाम और एमजीएम थाना क्षेत्रों में माओवादी हिंसा से जुड़े उस पर एक दर्जन से अधिक मामले दर्ज हैं। गंभीर अपराधों में संलिप्तता के कारण पुलिस उसके घर की कुर्की भी कर चुकी है।
उसकी बढ़ती नक्सली गतिविधियों को देखते हुए झारखंड सरकार ने उस पर 15 लाख रुपये का इनाम घोषित कर रखा है।
पुलिस जांच में उसका नाम जमशेदपुर के पूर्व सांसद सुनील महतो की हत्या के मामले में भी सामने आया है। वहीं, उसकी पत्नी मीता के भी नक्सली गतिविधियों में शामिल रहने की बात कही जाती है।
मेधावी छात्र से नक्सली कमांडर बनने का सफर
पश्चिम बंगाल की सीमा से सटा और जंगल-पहाड़ियों से घिरा झुंझका गांव लंबे समय से नक्सली गतिविधियों के लिहाज से संवेदनशील रहा है।
करीब एक दशक पहले जब माओवादियों ने इस इलाके में अपनी पकड़ मजबूत करनी शुरू की, तब वे ग्रामीण युवाओं को डरा-धमकाकर और बहला-फुसलाकर अपने दस्ते में शामिल करने लगे।
उसी दौर में पटमदा हाईस्कूल में आठवीं तक पढ़ने वाला मेधावी छात्र राम प्रसाद अचानक घर से लापता हो गया। बाद में पता चला कि उसने हथियार उठाकर जंगल की राह चुन ली है।
एक बार बेटे को देखना चाहती हूं: बुजुर्ग मां
उम्र के इस पड़ाव पर सचिन के पिता सनातन मार्डी और मां पानोसोरी की आंखें आज भी बेटे का इंतजार कर रही हैं। पिता बताते हैं कि उन्होंने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि उनका पढ़ाई में तेज बेटा एक दिन हथियार उठा लेगा।
मां की सिर्फ एक ही अंतिम इच्छा है कि वे जीवन के इस मोड़ पर अपने बेटे को एक बार सामने से देख सकें। वे लगातार उससे हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में लौटने और आत्मसमर्पण करने की भावुक अपील कर रहे हैं।
परिवार से मिलने पर भी संगठन की पाबंदी
सचिन के छोटे भाई के अनुसार, 1 करोड़ रुपये का इनामी माओवादी असीम मंडल उर्फ आकाश एक बार अपने दस्ते के साथ झुंझका गांव आया था।
परिवार का आरोप है कि माओवादी संगठन ने सचिन को परिजनों से पूरी तरह अलग रखा है। उसे अपने परिवार से मिलने तक की आजादी नहीं दी जाती, ताकि वह वापस सामान्य जीवन में न लौट सके।
