जमशेदपुर (जागरण संवाददाता)। ट्रेन संख्या 18184 दानापुर-टाटा एक्सप्रेस के एक कोच में पुरुलिया के मोलघुटा निवासी विवेक दास 14 घंटे से बेहोश पड़ा था लेकिन इसकी खबर न ही वाशिंंग लााइन के कर्मचारियों को लगी और न ही आरपीएफ के जवानों को।

शनिवार की सुबह जब ट्रेन प्लेटफार्म नंबर एक पर लगी तो यात्रियों ने बेहोश पड़े विवेक की जानकारी रेल अधिकारी को दी। जिसके बाद उसे आनन फानन में एमजीएम अस्पताल रेफर किया गया, जिससे उसकी जान बच गई। ऐसे में यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि किस तरह वाशिंग लाईन में लापरवाही से ट्रेनों की साफ सफाई की जाती है और आरपीएफ गश्ती करती है।

नशा खुरानी गिरोह के सदस्यों ने विवेक को नशा खिलाकर उसका पेन कार्ड, आधार कार्ड, नगद रुपये, कपड़े व अन्य जरुरी सामान चुरा कर फरार हो गए। वहीं विवेक के शरीर में चोट के भी निशान थे। इससे यह आशंका व्यक्त की जा रही है कि विवेक से जब सामान छीनने का प्रयास नशा खुरानी के सदस्यों ने किया तो बेहोशी की हालत में भी विवेक ने इसका विरोध किया होगा, जिसके कारण उसे घायल कर सामान छीन कर गिरोह के सदस्य फरार हो गए। 

यह है मामला

पुरुलिया निवासी विवेक दास जसीडीही से पुरुलिया दानापुर-टाटा एक्सप्रेस से आ रहा था वह ट्रेन में शुक्रवार को सवार हुआ था और 11.30 बजे तक अपने मित्रों के साथ वीडियो कालिंग के जरिए बात कर रहा था, जिसके बाद से उसका फोन स्वीच आफ हो गया। ट्रेन टाटानगर स्टेशन शुक्रवार की शाम छह बजे पहुंची और वासिंग लाइन धुलने के लिए चली गई।

ट्रेन धुलने के बाद वापस टाटानगर स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर एक पर सुबह सात बजे आकर लगी तो उस ट्रेन में  बेहोशी की हालत में विवेक दास सीट के नीचे गिरा हुआ था। लेकिन किसी को भनक तक नहीं लगी। जब टाटा-दानापुर एक्सप्रेस में यात्री चढऩे लगे तो यात्री ने सीट के नीचे विवेक को गिरा देख इसकी जानकारी रेल अधिकारी को दी। जिसके बाद तुरंत विवेक का ट्रेन से उतारा गया और इलाज के लिए एमजीएम अस्पताल भेजा गया। वहीं इसकी सूचना जीआरपी ने विवेक के परिजनों को दी तब वे टाटानगर स्टेशन पहुंचे। 

Posted By: Vikas Srivastava

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