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मेधावी इंजीनियर बना हिंसा का मास्टरमाइंड: NIT जमशेदपुर के पूर्व छात्र आदित्य आनंद की पूरी कहानी

Published: Mon, 20 Apr 2026 01:13 PM (IST)

एनआईटी जमशेदपुर के मेधावी पूर्व छात्र आदित्य आनंद नोएडा हिंसा के मास्टरमाइंड निकले हैं। हजारीबाग के रहने वाले आदित्य ने ...और पढ़ें

आदित्य आनंद का फाइल फोटो

आदित्य आनंद का फाइल फोटो

HighLights

  1. एनआईटी जमशेदपुर के पूर्व छात्र आदित्य आनंद नोएडा हिंसा के मास्टरमाइंड।

  2. सॉफ्टवेयर इंजीनियर की नौकरी छोड़ कट्टरपंथी मजदूर राजनीति में शामिल।

  3. यूपी एसटीएफ बड़े नेटवर्क की जांच कर रही है।

जागरण संवाददाता, जमशेदपुर। एनआइटी (NIT) जमशेदपुर जैसे प्रतिष्ठित संस्थान से इंजीनियरिंग की डिग्री, नामी कंपनी में शानदार नौकरी और लाखों का सालाना पैकेज-ये किसी भी युवा के लिए एक सफल जीवन का सपना होता है। लेकिन झारखंड के हजारीबाग का रहने वाला आदित्य आनंद आज अपनी उपलब्धियों के लिए नहीं, बल्कि नोएडा हिंसा के मुख्य मास्टरमाइंड के रूप में चर्चा में है। 
 

मेधावी छात्र से करियर की शानदार शुरुआत 

एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर का मजदूर आंदोलनों के जरिए हिंसा की साजिश रचने तक का यह सफर चौंकाने वाला और चिंताजनक है। मूल रूप से हजारीबाग का रहने वाला आदित्य आनंद शुरू से ही मेधावी छात्र रहा था। 
 
NIT जमशेदपुर के पूर्व छात्र आदित्य आनंद ने देश के प्रमुख तकनीकी संस्थानों में से एक, एनआइटी जमशेदपुर से बीटेक (B.Tech) किया। उसकी काबिलियत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कैंपस प्लेसमेंट के दौरान ही नोएडा की एक नामी निजी कंपनी ने उसे ऊंचे पैकेज पर सॉफ्टवेयर इंजीनियर के पद के लिए चुन लिया था। 
 

2022: जब कोडिंग की जगह 'मजदूर राजनीति' ने ली 

करियर की शुरुआत बेहतरीन रही और उसने कुछ समय गुरुग्राम (गुड़गांव) के कॉर्पोरेट जगत में भी काम किया। आदित्य के जीवन में टर्निंग पॉइंट साल 2022 में आया। 
 
सोशल मीडिया के जरिए वह 'मजदूर बिगुल' नामक संगठन के संपर्क में आया। यहीं से उसकी रुचि सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट से हटकर कट्टरपंथी मजदूर राजनीति की ओर मुड़ने लगी। 
 

रणनीतिकार के रूप में उभरा: तकनीक का गलत इस्तेमाल 

धीरे-धीरे उसने नोएडा की फैक्ट्रियों में मजदूरों की स्थिति पर रिपोर्टिंग और डाक्यूमेंटेशन शुरू कर दिया। साल 2023 में 'भगत सिंह जन अधिकार यात्रा' के दौरान उसकी मुलाकात कई कट्टरपंथी विचारकों से हुई। 
 
इसके बाद उसने कॉर्पोरेट की नौकरी और लाखों का पैकेज पूरी तरह छोड़ दिया और आंदोलनों के मैदान में कूद पड़ा। पुलिस जांच में यह बात सामने आई है कि आदित्य महज एक कार्यकर्ता नहीं, बल्कि एक शातिर रणनीतिकार बन चुका था। 
 
वह 'दिशा छात्र संगठन' और 'रिवोल्यूशनरी वर्कर्स पार्टी ऑफ इंडिया' जैसे समूहों का मुख्य चेहरा बन गया।
  •     साजिश का केंद्र: नोएडा के सेक्टर-37 में किराए पर रहकर उसने मजदूरों के शांतिपूर्ण प्रदर्शनों को हिंसक भीड़ में बदलने की ट्रेनिंग दी।
  •     तकनीकी दक्षता: एक इंजीनियर होने के नाते, उसने अपने स्किल्स का उपयोग नेटवर्क बनाने, सूचनाओं को गुप्त रूप से साझा करने और उकसाने वाली गतिविधियों को व्यवस्थित करने में किया।


स्तब्ध हैं साथी और संस्थान  

एनआइटी जमशेदपुर के एक पूर्व छात्र ने नाम न छापने की शर्त पर बताया क‍ि आदित्य कॉलेज के दिनों में बेहद शांत स्वभाव का था और अपनी पढ़ाई में व्यस्त रहता था। यकीन करना मुश्किल है कि एक पढ़ा-लिखा इंजीनियर इस तरह की हिंसक साजिश का हिस्सा बन सकता है।
 

जांच के घेरे में बड़ा नेटवर्क 

वर्तमान में, उत्तर प्रदेश एसटीएफ (UP STF) आदित्य आनंद से गहन पूछताछ कर रही है। पुलिस को अंदेशा है कि आदित्य के पीछे कोई बड़ा विदेशी या आंतरिक नेटवर्क हो सकता है जो मेधावी युवाओं के ब्रेनवाश कर उन्हें देश विरोधी गतिविधियों में धकेल रहा है। 
 
एनआइटी जैसे प्रतिष्ठित संस्थान से निकले एक छात्र का इस तरह भटकना अब समाज और सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक बड़ा सवाल बन गया है। 

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