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स्वावलंबन की मिसाल: सरकारी नौकरी न मिली तो सुई-धागे को बनाया ढाल, नीमडीह की वीणा ने बदली 25 परिवारों की किस्मत

Published: Tue, 13 Oct 2026 08:04 PM (IST)

सरकारी नौकरी न मिलने पर वीणा कुमारी भूईंया ने सिलाई-कढ़ाई को अपनाकर आत्मनिर्भरता की मिसाल कायम की। उन्होंने 25 विस्थापित महिलाओं को प्रशिक्षित कर आर्थिक रूप से सशक्त बनाया।

चांडिल डैम विस्थापन का दंश झेलने वाली मानिकुई पुनर्वास कालोनी की वीणा आज समाज में 25 महिलाओं के चूल्हे आत्मसम्मान से जला रही हैं।

चांडिल डैम विस्थापन का दंश झेलने वाली मानिकुई पुनर्वास कालोनी की वीणा आज समाज में 25 महिलाओं के चूल्हे आत्मसम्मान से जला रही हैं।

सुधीर गोराई, नीमडीह। जिस तरह माटी की मूरत में साधना से प्राण प्रतिष्ठा होती है, उसी तरह अभावों की पथरीली जमीन पर संकल्प का पसीना बहाकर वीणा कुमारी भूईंया ने अपनी तकदीर का ताना-बाना खुद बुना है। 
 
चांडिल डैम विस्थापन का दंश झेलने वाली मानिकुई पुनर्वास कालोनी की वीणा आज समाज में साक्षात शक्तिरूपा बनकर 25 महिलाओं के चूल्हे आत्मसम्मान से जला रही हैं।
 

विस्थापन का दर्द और असफलता को बनाया ढाल 

वीणा भावुक होकर कहती हैं कि विस्थापन ने हमारी जड़ें हिला दी थीं। वाणिज्य में स्नातक करने के बाद सरकारी नौकरी के लिए वर्षों तक प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी की, लेकिन हर बार असफलता ही हाथ लगी। 
 
विस्थापन ने आशियाना छीना और असफलता ने हौसला तोड़ना चाहा, लेकिन मैंने हार मानने के बजाय सुई-धागे को अपनी ढाल बना लिया।"
 
निराशा के भंवर से निकलकर उन्होंने लैम्पस के माध्यम से गम्हरिया में सिलाई-कढ़ाई का कड़ा प्रशिक्षण लिया। इसके बाद मानिकुई में 'शिवम जेनरल स्टोर एंड वीणा लेडीज कॉर्नर सह सिलाई केंद्र' की नींव रखी। 
 
करीब 10 वर्षों के अनवरत परिश्रम और ईमानदारी के दम पर उन्होंने न सिर्फ अपने व्यवसाय को मजबूती दी, बल्कि मानिकुई और आसपास की बस्तियों में अपनी खास पहचान बनाई।
 

सखी मंडल से जुड़कर 25 महिलाओं को दी आर्थिक आजादी 

मानिकुई पुनर्वास कालोनी की गीता गोराई बताती हैं कि खुद पैरों पर खड़े होने के बाद वीणा ने दूसरी महिलाओं को स्वावलंबी बनाने का बीड़ा उठाया। 
 
उन्होंने 'जय मां दुर्गा आजीविका सखी मंडल' (छोटा लाखा) से जुड़कर वर्ष 2022 में ऋण लिया और चार सिलाई मशीनें खरीदकर एक व्यवस्थित प्रशिक्षण केंद्र की शुरुआत की।
 
वीणा अब तक 35 ग्रामीण महिलाओं को सिलाई-कढ़ाई में पूरी तरह दक्ष बना चुकी हैं, जिनमें से 25 महिलाएं आज सिलाई के जरिए नियमित कमाई कर अपने परिवार का सहारा बन रही हैं। 
 
विस्थापन की त्रासद पृष्ठभूमि से निकलकर महिलाओं को आत्मनिर्भरता की राह दिखाने वाली वीणा की यह मौन क्रांति बताती है कि अगर इरादे फौलादी हों, तो सुई-धागे से भी समाज की नई तकदीर लिखी जा सकती है।