अवैध बालू परिवहन के खिलाफ बड़ी कार्रवाई: नीमडीह में पकड़े गए 6 हाइवा, अब चालान और स्टॉक यार्ड की होगी जांच
झारखंड के नीमडीह में अवैध बालू खनन और ओवरलोडिंग के खिलाफ प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए छह बालू लदे ...और पढ़ें

रविवार सुबह आदरडीह स्थित एसएम स्टील परिसर से अंचल अधिकारी अभय द्विवेदी के नेतृत्व में छह बालू लदे हाइवा जब्त किए गए।
HighLights
नीमडीह में अवैध बालू खनन पर प्रशासन की कार्रवाई।
छह बालू लदे हाइवा जब्त, ओवरलोडिंग का संदेह।
स्टॉक यार्ड और चालान की होगी गहन जांच।
संवाद सहयोगी, नीमडीह। झारखंड के सरायकेला-खरसावां जिले के नीमडीह क्षेत्र में बालू के अवैध खनन और ओवरलोडिंग के खिलाफ प्रशासन की सख्त कार्रवाई हुई है।
इसके बाद अब स्टॉक यार्ड को लेकर सवाल खड़े होने लगे हैं। रविवार की सुबह आदरडीह स्थित एसएम स्टील परिसर से अंचल अधिकारी अभय द्विवेदी के नेतृत्व में छापेमारी कर छह बालू लदे हाइवा जब्त किए गए।
हालांकि, प्रशासन के मौके पर पहुंचते ही वाहन चालक फरार हो गए, जिससे जब्त वाहनों के चालान की तत्काल पुष्टि नहीं हो सकी।
प्राथमिक तौर पर वाहनों में निर्धारित क्षमता से काफी अधिक बालू लदे होने की आशंका जताई गई है, लेकिन वास्तविक स्थिति चालान और बालू की मात्रा की तकनीकी जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
क्या सिर्फ वाहन चालक और मालिक हैं जिम्मेदार?
इस कार्रवाई के बाद सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि यदि जांच में यह साबित होता है कि हाइवा में वैध चालान के अनुपात से कहीं अधिक बालू लोड किया गया था, तो क्या कार्रवाई केवल वाहन मालिकों और चालकों तक ही सीमित रहेगी? या फिर बालू उपलब्ध कराने वाले स्टॉक यार्ड की भूमिका की भी निष्पक्ष जांच की जाएगी?
आखिर चालान निर्गत करने वाले यार्ड की क्या जिम्मेदारी है? यदि कम मात्रा (जैसे 300 सीएफटी) का चालान जारी कर मौके पर 700 से 800 सीएफटी बालू लोड किया गया है, तो इसके लिए जिम्मेदार लोगों पर शिकंजा कब कसेगा?
चालान और वास्तविक लोडिंग की होगी जांच
अंचल कार्यालय द्वारा जिला खनन पदाधिकारी को भेजी गई रिपोर्ट के अनुसार, सीओ अभय द्विवेदी ने मौके पर ओवरलोडिंग की आशंका जताई थी।
अब खनन विभाग की जांच में वाहनों के चालान, बालू की वास्तविक मात्रा और उसके स्रोत का मिलान किया जाना बेहद जरूरी हो गया है।
इससे यह साफ हो सकेगा कि यह मामला केवल अवैध परिवहन का है, महज ओवरलोडिंग का है या फिर चालान में दर्ज मात्रा और वास्तविक परिवहन के बीच भारी अंतर का है।
स्टॉक यार्ड की भूमिका की जांच है अनिवार्य
यदि जांच में यह सामने आता है कि 300 सीएफटी का चालान होने के बावजूद हाइवा में 700 सीएफटी बालू लदा था, तो यह पता लगाना भी आवश्यक होगा कि अतिरिक्त बालू कहां से और किसके निर्देश पर लोड किया गया।
क्या स्टॉक यार्ड ने तय नियमों को ताक पर रखकर अधिक बालू लोड किया था, या फिर वाहन चालकों ने रास्ते में अवैध रूप से बालू की मात्रा बढ़ाई?
विशेषज्ञों का मानना है कि केवल सड़क पर वाहन पकड़ने से बालू के इस अवैध खेल पर पूरी तरह अंकुश नहीं लगाया जा सकता।
जब तक अतिरिक्त बालू के मुख्य स्रोत यानी स्टॉक यार्ड की जवाबदेही तय नहीं होती, तब तक ऐसी कार्रवाई अधूरी ही मानी जाएगी।
फिलहाल सभी छह जब्त हाइवा को नीमडीह थाना पुलिस को सौंप दिया गया है और पूरा मामला अब खनन विभाग की जांच के अधीन है।
अब देखने यह होगा कि विभाग केवल वाहनों पर कार्रवाई कर इतिश्री करता है या फिर स्टॉक यार्ड की संलिप्तता की गहराई से जांच कर दोषियों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई करता है।
