झारखंड-बंगाल मार्ग पर 50 घंटे से महाजाम: 10KM लंबी कतार में फंसे मरीज और छात्र, नर्क बनी एनएच-18 की स्थिति
एनएच-18 पर नीमडीह के पास पितकी ओवरब्रिज के अधूरे निर्माण और जर्जर सर्विस रोड के कारण 50 घंटे से 10 ...और पढ़ें

झारखंड के एनएच-18 पर 50 घंटे का महाजाम, पितकी ओवरब्रिज बना मुसीबत।
HighLights
एनएच-18 पर 50 घंटे से 10 किमी लंबा जाम।
पितकी ओवरब्रिज निर्माण में देरी मुख्य कारण।
एंबुलेंस में फंसे गंभीर मरीज और आम यात्री बेहाल।
संवाद सूत्र, नीमडीह (जमशेदपुर)। झारखंड से बंगाल और ओडिशा को जोड़ने वाले प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्ग-18 पर नीमडीह स्थित पितकी रेलवे फाटक के पास पिछले 50 घंटे से 10 किलोमीटर लंबा महाजाम लगा है। शुक्रवार दोपहर से शुरू हुआ यह जाम रविवार शाम तक विकराल रूप ले चुका है।
जाम में स्कूल-काॅलेज के विद्यार्थी, एंबुलेंस में फंसे गंभीर मरीज और आम यात्री बुरी तरह बेहाल हैं। जाम का दायरा नीमडीह के लुपुंगडीह टोल प्लाजा से लेकर चांडिल के घोड़ालिंग तक फैल गया है। हालात इतने बदतर हैं कि दोपहिया वाहनों का रेंगना भी मुश्किल हो गया है।
इस विकराल समस्या की मुख्य वजह बहुप्रतीक्षित पितकी रेलवे ओवरब्रिज के निर्माण में हो रही भारी देरी है। करीब 708 करोड़ रुपये की लागत वाली यह महत्वपूर्ण परियोजना कई सालों से अधूरी पड़ी है।
स्थानीय सांसद व केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने संवेदक को 30 जून तक ओवरब्रिज के एक हिस्से से आवागमन शुरू करने का सख्त निर्देश दिया था। जब यह निर्देश बेअसर रहा तो 15 जुलाई की नई तारीख दी गई, वह भी फेल हो गई। अब काम पूरा करने की अगली डेडलाइन 31 जुलाई तय की गई है।
चालकों की जल्दबाजी और जर्जर सर्विस रोड
जाम को भयावह बनाने में वाहन चालकों की जल्दबाजी भी कम जिम्मेदार नहीं है। रेलवे फाटक बंद होने पर आगे निकलने की होड़ में चालक दो-तीन लेन बना देते हैं, जिससे पूरा रास्ता अवरुद्ध हो जाता है। इसके अलावा, पितकी रेलवे फाटक पर तीन लाइनों से ट्रेनों का लगातार आवागमन होता है, इसलिए गेट जल्दी-जल्दी बंद करना पड़ता है।
वाहनों की गति धीमी होने का एक और बड़ा कारण पितकी से रावताड़ा मोड़ तक ओवरब्रिज के उत्तरी हिस्से की सर्विस रोड का पूरी तरह जर्जर होना है। स्थानीय लोगों का कहना है कि भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) यदि इस सड़क का जीर्णोद्धार करा दे, तो वाहनों की रफ्तार बढ़ सकती है और जाम से कुछ हद तक राहत मिल सकती है।
भूख-प्यास से लंबी दूरी के चालकों का बुरा हाल
जाम में फंसे लंबी दूरी के चालकों की स्थिति दयनीय हो गई है। कोलकाता से माल लेकर आ रहे ट्रक चालक राजेश कुमार ने अपना दर्द साझा करते हुए बताया, मैं शुक्रवार रात से यहां फंसा हूं।
पीने का पानी और खाना तक खत्म हो गया है, कोई सुध लेने वाला नहीं है। वहीं, बस चालक सुरेश महतो ने कहा, घंटों से गाड़ी एक ही जगह खड़ी है। परेशान सवारियां अब बस छोड़कर पैदल ही आगे बढ़ रही हैं।
सरकारी उदासीनता पर जनता में भारी आक्रोश
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह जाम पिछले पांच वर्षों से उनकी दिनचर्या का हिस्सा बन चुका है रोजाना 50 हजार से अधिक लोग इस मार्ग का उपयोग करते हैं। इस सड़क से विधायक, सांसद और राज्य के बड़े अधिकारियों का काफिला भी गुजरता है, लेकिन किसी की नजर इस जनसमस्या पर नहीं पड़ती।
आजसू के प्रखंड अध्यक्ष दिगंबर सिंह सरदार ने इसे सरकारी लापरवाही का स्पष्ट नजारा बताया। उन्होंने कहा कि रेलवे और एनएचएआइ की घोर अनदेखी के कारण आम जनता बेहाल है। परेशान जनता अब बस यही कह रही है कि राम जाने पितकी ओवरब्रिज कब चालू होगा और हमें इस नर्क से मुक्ति मिलेगी।
