पंकज मिश्रा, चाकुलिया : राज्य के सरकारी विद्यालयों के मेधावी छात्रों को केंद्रीय विद्यालय की तर्ज पर अंग्रेजी माध्यम में शिक्षा देने के लिए स्थापित मॉडल विद्यालय अपनी दुर्दशा पर आंसू बहा रहे हैं। चाकुलिया स्थित मॉडल विद्यालय में न भवन है और ना ही शिक्षक। बदहाली का आलम यह है कि शिलान्यास के 6 वर्षों बाद भी विद्यालय का भवन अधूरा है। पांच कक्षाओं को पढ़ाने के लिए मात्र एक शिक्षक पदस्थापित हैं। अनुमान लगा लीजिए कैसी पढ़ाई होती होगी। बता दें कि अंग्रेजी भाषा के शब्द मॉडल का हिदी में शाब्दिक अर्थ होता है आदर्श। अगर सरकार द्वारा स्थापित आदर्श विद्यालय का हाल ऐसा है तो फिर इस राज्य में शिक्षा व्यवस्था का भगवान ही मालिक है।

विदित हो कि वर्ष 2011-12 में झारखंड सरकार के शिक्षा विभाग द्वारा राज्य के विभिन्न प्रखंडों में 89 मॉडल विद्यालयों की स्थापना की गई थी। उद्देश्य था कि सरकारी विद्यालयों में पढ़ने वाले प्रतिभाशाली छात्रों को अंग्रेजी माध्यम में बेहतर ढंग से शिक्षा दी जाए ताकि वे निजी विद्यालयों के छात्रों से आगे निकल सके। इसी क्रम में चाकुलिया में भी मॉडल स्कूल खोला गया। अपना भवन नहीं होने के कारण तात्कालिक व्यवस्था के तौर पर स्थानीय केएनजे उच्च विद्यालय में खाली पड़े एक भवन का उपयोग किया गया। वर्ष 2015 में सांसद विद्युत वरण महतो एवं तत्कालीन विधायक कुणाल षाड़ंगी द्वारा शहर से सटे पूर्णापानी मौजा में तामझाम के साथ मॉडल स्कूल के निर्माण कार्य का शिलान्यास किया गया। लेकिन 6 साल बाद भी करीब तीन करोड़ रुपए की लागत से बन रहा यह भवन अधूरा है। अर्ध निर्मित भवन में ही जगह-जगह दरारें पड़ गई हैं। चारों तरफ से झाड़ी झुरमुटों से भी घिर गया है। भवन का निर्माण कब पूरा होगा, यह बताने वाला भी कोई नहीं है।

मॉडल विद्यालय में नामांकन के लिए बकायदा प्रवेश परीक्षा ली जाती है जिसमें चयनित छात्रों को कक्षा 6 में नामांकित किया जाता है। फिलहाल विद्यालय में छठवीं से दसवीं तक 5 कक्षाओं में कुल 67 विद्यार्थी पढ़ रहे हैं जबकि सत्र 2021- 22 में नामांकन के लिए 27 विद्यार्थी चयनित हुए हैं। विद्यालय में पठन-पाठन की हालत क्या होगी इसका अनुमान इसी से लगाया जा सकता है कि इन पांच कक्षाओं को पढ़ाने के लिए मात्र एक ही शिक्षक कनक कुमार पदस्थापित है। यहां गणित व विज्ञान जैसे महत्वपूर्ण विषय के लिए कोई शिक्षक नहीं है। सबसे दिलचस्प बात यह है कि बच्चों को जिस अंग्रेजी भाषा में पारंगत बनाने के लिए मॉडल स्कूल खोला गया था, उस विषय का भी कोई शिक्षक यहां वर्षों से नहीं है। शिक्षकों की कमी के कारण अभिभावकों का भी अब मॉडल विद्यालय से मोहभंग होता जा रहा है।

शिक्षकों की कमी से पठन-पाठन प्रभावित : मॉडल विद्यालय के प्रभारी प्रधानाध्यापक कनक कुमार ने बताया कि फिलहाल वे अकेले ही विद्यालय चला रहे हैं। एक अन्य महिला शिक्षक जो यहां प्रतिनियुक्त थी वह मातृत्व अवकाश पर चली गई है। शिक्षकों की कमी से विद्यालय में पठन-पाठन प्रभावित हो रहा है। एकमात्र शिक्षक होने के कारण उन्हें बच्चों को पढ़ाने के अलावा तमाम तरह के ऑफिशियल काम भी करने पड़ते हैं।

Edited By: Jagran