वीरेंद्र ओझा, जमशेदपुर । आमतौर पर कोई व्यक्ति जरा सी शारीरिक या मानसिक वेदना में विचलित हो जाता है, लेकिन कोई कैंसर होने पर भी सकारात्मक सोच के साथ सृजन में रत हो तो उसे क्या कहेंगे। ऐसी ही मिसाल पेश की है कुमारी छाया ने। गोलमुरी स्थित रामदेव बगान निवासी रमेश कुमार एवं वीणा देवी की पुत्री छाया ने कैंसर की गहरी छाया में साहित्य सृजन कर उन हजारों-लाखों महिला-परुषों को प्रेरित कर रही हैं, जो इस बीमारी की आहट को ही मौत मान लेते हैं। इन्होंने बीमारी से जूझते हुए ना केवल एक से बढ़कर एक कविताएं लिखीं, बल्कि इसी अवस्था में 203 कविताओं का काव्य संग्रह 'एक प्याली चाय' भी प्रकाशित कराया।

छाया बताती हैं कि लिखने का शौक मुझे बचपन से ही था, लेकिन कभी वक्त नहीं मिला। कदमा के शास्त्रीनगर में ब्लॉक चार स्थित आदर्श बाल मध्य उच्च विद्यालय में विज्ञान शिक्षिका हूं। ऐसे में स्कूल व परिवार की देखभाल करते हुए यह शौक पूरा नहीं हो रहा था। इसके बावजूद बेटा कुछ बड़ा हुआ तो 2017 में लिखना शुरू किया। मार्च 2020 में लॉकडाउन की वजह से स्कूल बंद हुआ तो थोड़ी फुर्सत मिली, तो साहित्य सृजन को गति मिली। एक माह बाद मुझे सीने में दर्द हुआ। मर्सी अस्पताल में जांच कराई तो पता चला कि फेफड़े में पानी भर गया है। अस्पताल में भर्ती करके पानी निकाला गया, लेकिन कुछ दिन बाद फिर यही समस्या हुई। तीसरी बार जब पानी भरा तो डाक्टर ने सर्जरी करके एक पाइप लगा दी, जिससे प्लास्टिक के थैले में पानी जमा होता था। दिन में करीब 300 मिलीलीटर पानी निकल जाता था। डाक्टरों ने इसे गंभीर स्थिति बताते हुए जांच शुरू कराई तो दो-तीन अलग-अलग लैब में जांच के बाद लंग्स कैंसर की बात सामने आई। अगस्त 2020 से हर 20 दिन पर कीमोथेरेपी भी चल रही है। इस बीच मर्सी अस्पताल में जब लगातार 30 दिन भर्ती रही, तो बेड पर पड़े-पड़े मोबाइल फोन पर करीब 30 कविताएं लिख दी। इसके बाद तो इलाज के साथ-साथ कविता लिखने का क्रम जारी रहा। एक साल बाद करीब 300 कविताओं से चुनकर 203 कविताओं को काव्य संग्रह में समाहित किया। इसमें मेरे पत्रकार पति व बेटे ऋतुराज रंजन का काफी सहयोग रहा। सबसे बड़ी बात कि इस दौरान मेरी सेहत में भी सुधार हो रहा है। डाक्टरों ने भी इसकी पुष्टि की है, लेकिन कीमो जारी रखने की सलाह दी है। मेरा मानना है कि 'मुश्किल है इसलिए जिंदगी है..खूबसूरत तो ख्वाब हुआ करते हैं।

13 अक्टूबर : अष्टम, मां महागौरी : धवल स्वरूप में मां का यह अवतार विषमतम परिस्थितियों में न डगमगाने और सही दिशा में चलायमान रहने की प्रेरणा देता है। जब सब तरफ आपाधापी हो, अशांति हो, वातावरण प्रतिकूल हो, तब भी शांतचित्त रहकर अपने कर्तव्यों का पालन करने वाली स्त्री मां के इसी स्वरूप के दर्शन कराती है।