जमशेदपुर में बड़ा वैज्ञानिक शोध: नागदोन पौधे से बने नैनोपार्टिकल्स बैक्टीरिया से लड़ेंगे, Liver-Kidney के इलाज में भी कारगर
कोल्हान विश्वविद्यालय की शोधार्थी अपर्णा महतो ने नागदोन पौधे के पत्तों से सिल्वर नैनोपार्टिकल्स विकसित किए हैं। यह नैनोपार्टिकल्स बैक्टीरिया ...और पढ़ें

कोल्हान विवि के पीएचडी शोधार्थी अपर्णा महतो ने नागदोन पौधे के पत्तों के औषधीय गुणों का अध्ययन किया है।
HighLights
नागदोन पौधे के पत्तों से सिल्वर नैनोपार्टिकल्स का सफल विकास।
नैनोपार्टिकल्स में बेहतर एंटीबैक्टीरियल और सूजन-रोधी गुण पाए गए।
चूहों पर प्रयोग में लिवर-किडनी रोगों में प्रभावी असर दिखा।
वेंकटेश्वर राव, जमशेदपुर। पारंपरिक औषधीय पौधों की मदद से आधुनिक नैनो-बायोटेक्नोलॉजी का उपयोग कर नई दवाएं बनाने की दिशा में सफलता मिली है।
कोल्हान विश्वविद्यालय (केयू) के जूलॉजी विभाग की पीएचडी शोधार्थी अपर्णा महतो ने नागदोन (पेडिलांथस टिथाइमलाडोस) नाम के औषधीय पौधे के पत्तों से 'Silver nanoparticles' तैयार कर उनके औषधीय गुणों का गहराई से अध्ययन किया है।
सरायकेला-खरसावां जिले के नीमडीह की रहने वाली अपर्णा को इस महत्वपूर्ण वैज्ञानिक उपलब्धि के लिए कोल्हान विश्वविद्यालय द्वारा पीएचडी की उपाधि प्रदान की गई है।
उन्होंने यह शोध विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार डॉ. अमर कुमार के मार्गदर्शन में पूरा किया। अपर्णा का यह शोध 'जर्नल ऑफ एप्लाइड एंड नेचुरल साइंसेज' और 'इंटरनेशनल जर्नल ऑफ इनवायरमेंटल साइंसेज' जैसी कई प्रसिद्ध अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुका है।
पौधों के अर्क से नैनोपार्टिकल्स का अनूठा प्रयोग
शोध के दौरान नागदोन के पत्तों में मौजूद रासायनिक यौगिकों (बायोकेमिकल कंपाउंड्स) की पहचान के लिए अत्याधुनिक एलसी-एमएस (LC-MS) तकनीक का इस्तेमाल किया गया।
इसके बाद पत्तों के अर्क की मदद से मेटल नैनोपार्टिकल्स तैयार किए गए। कोल्हान विश्वविद्यालय में पीएचडी स्तर पर औषधीय पौधों के अर्क से मेटल नैनोपार्टिकल्स बनाने का यह अपनी तरह का पहला और बेहद महत्वपूर्ण प्रयास माना जा रहा है।
सामान्य अर्क से ज्यादा असरदार दिखे नैनोपार्टिकल्स
प्रयोगशाला में परीक्षण के दौरान नागदोन के सीधे अर्क और उससे बने नैनोपार्टिकल्स के असर की तुलना की गई। नतीजों से स्पष्ट हुआ कि साधारण अर्क के मुकाबले सिल्वर नैनोपार्टिकल्स में कई जैविक गतिविधियां अधिक प्रभावशाली थीं:
- एंटीऑक्सीडेंट और एंटी-इन्फ्लेमेटरी गुण: यह शरीर में सूजन कम करने और कोशिकाओं को नुकसान से बचाने में अधिक सक्षम पाए गए।
- एंटीबैक्टीरियल और अमाइलेज इनहिबिटरी प्रभाव: नैनोपार्टिकल्स में हानिकारक जीवाणुओं से लड़ने और शर्करा (शुगर) के पाचन से जुड़े एंजाइम को नियंत्रित करने की बेहतर क्षमता देखी गई।
चूहों पर सफल प्रयोग और भविष्य की संभावनाएं
इस शोध के तहत मैमलीन एनिमल मॉडल यानी चूहों पर भी प्रयोग किए गए। अध्ययनों में पाया गया कि यह नैनोपार्टिकल्स लिवर (यकृत) और किडनी (गुर्दे) से जुड़ी कुछ बीमारियों में राहत पहुंचाने में काफी प्रभावी हैं।
हालांकि, वैज्ञानिकों का कहना है कि इन नतीजों को इंसानों के इलाज में इस्तेमाल करने से पहले व्यापक स्तर पर प्री-क्लिनिकल और क्लिनिकल ट्रायल की आवश्यकता होगी।
फिर भी, यह शोध प्राकृतिक उत्पादों पर आधारित नैनो-मेडिसिन और भविष्य में नैनो-ड्रग डिजाइनिंग के क्षेत्र में नए शोध के रास्ते खोलता है।
शोध की मुख्य बातें:
- पौधा: नागदोन (पेडिलांथस टिथाइमलाडोस) के पत्तों पर विशेष अध्ययन।
- तकनीक: एलसी-एमएस तकनीक से पौधों के रसायनों की सूक्ष्म जांच।
- नवाचार: पत्तों के अर्क से सिल्वर नैनोपार्टिकल्स का सफल निर्माण।
- परिणाम: सामान्य अर्क की तुलना में नैनोपार्टिकल्स में एंटीबैक्टीरियल और सूजन-रोधी गुण अधिक प्रभावी।
- परीक्षण: चूहों पर सफल प्रयोग के बाद लिवर और किडनी की समस्याओं में दिखा सकारात्मक असर।
- महत्व: भविष्य में नैनो-बायोटेक्नोलॉजी आधारित दवाओं के विकास के लिए नया आधार तैयार।
