जागरण संवाददाता, जमशेदपुर : मेरा जमीर मेरा एतबार बोलता है, मेरी जुबान से परवरदिगार बोलता है, कुछ और काम जैसे उसे आता ही नहीं, मगर वह झूठ बहुत शानदार बोलता है..। शेर के अशआर मशहूर शायर राहत इंदौरी के थे, जिसे उन्होंने धतकीडीह कम्यूनिटी सेंटर मैदान में सुनाए।

टाटा स्टील के अर्बन सर्विसेज द्वारा सजाई गई मुशायरे की शाम में एक से बढ़कर एक शायर मौजूद थे, जिन्होंने ना केवल अपने शेर व नज्म से श्रोताओं की वाहवाही लूटी, बल्कि तरन्नुम में गजल सुनाकर शाम को यादों में बस गए।

शाम सात बजे से सजी महफिल का आगाज शहर के मुश्ताक अहजन ने किया, तो उनके बाद असर भागलपुरी, ताबा वास्ती, शादाब आजमी, सुफील शाही, नईम अख्तर खादमी, नश्तर अमरोही, मुमताज नसीम, कुंवर जावेद, सुंदर मालेगामी और राहत इंदौरी के पुत्र अल्ताफ जिया ने भी प्यार-मोहब्बत के साथ वतन के पैगाम में एक से बढ़कर एक नज्मों की बारिश कर दी।

राहत इंदौरी को सुनने के लिए सब्र ऐसा था कि उन्हें सुने बिना कोई टस से मस नहीं हो रहा था। पूरा शामियाना खचाखच भरा था और जैसे ही राहत शेर पढ़ने के लिए खड़े हुए लोगों ने खड़े होकर तालियां बजाते हुए उनका इस्तकबाल किया। आते ही उन्होंने सुनाया 'सफर में आखिरी पत्थर के बाद आएगा, मजा तो यार दिसंबर के बाद आएगा, जला रहे हो, मगर ये खयाल रखिएगा तुम्हारा घर मेरे घर के बाद आएगा.'। इसी कड़ी में उन्होंने सुनाया 'जिधर से गुजरो धुआं बिछा दो, जहां भी जाओ धमाल कर दो तुम्हें सियासत ने हक दिया है, हरी जमीनों को लाल कर दो..'

मुशायरे में नईम अख्तर खादमी ने 'अच्छा ये खेल तुमने खेल किया खेल-खेल में, माचिस की तीली फेंक दी मिट्टी के तेल में..' से सियासत का बदनुमा चेहरा पेश किया, तो तरन्नुम में 'वो मेरे पास आना चाहता है, मगर कोई बहाना चाहता है। यूं ही उलझा नहीं है पांव मेरा, कोई मुझे गिराना चाहता है..' तरन्नुम में समाज के दांवपेंच की तस्वीर भी पेश कर दी। इनके बाद नश्तर अमरोही ने आते हीं सुनाईं 'आइने के सामने घंटों तैयारी के बाद, तुम हसीं लगती हो बेगम कितनी दुश्वारी के बाद..' इसके बाद की लाइनें कुछ ऐसी थीं कि राहत इंदौरी ने उन्हें ऐसी लाइनें पढ़ने से मना कर दिया।

मुमताज नसीम ने मतला और शेर से समां बांध दिया, जिसमें उनके इस गजल पर खूब तालियां बजीं 'तुझे कैसे इल्म ना हो सका, बड़ी दूर तक ये खबर गई.कि तेरे ही शहर की शायरा तेरे इंतजार में मर गई..'। नसीम ने देशभक्ति के तरानों से भी सबकी आंखें नम कर दीं, जिसके बोल थे 'क्या बताऊं तुम्हें, क्या खूब वतन है मेरा, जान से भी मुझे महबूब है वतन मेरा..'।

कुंवर जावेद जब मंच पर आए तो आते ही उन्होंने सुनाया 'देशप्रेम सूरज हूं मुझे डर किसी साये का नहीं है, ये देश मेरा घर है, किराये का नहीं है, मुश्किल घड़ी है आओ, उठो देश बचाएं, ये वक्त अपने-पराए का नहीं है..'। जावेद को इस गजल के लिए भी खूब तालियां मिलीं 'मजाक देखिए इससे जियादा क्या होगा, दुरंगे लोग तिरंगे की बात करते हैं..'।

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इंदौरी के डुप्लीकेट लगे

मुशायरे के अंतिम दौर में महेंद्र सिंह अश्क आए, तो उन्होंने सुनाया 'तेरी यादों के जुगनू बोलते हैं, मेरी पलकों से आंसू बोलते हैं। अभी बाकी है थोड़ी सी शराफत, अभी कुछ लोग उर्दू बोलते हैं..'। उनके बोलने का अंदाज और हाव-भाव ऐसा था कि वे राहत इंदौरी के डुप्लीकेट लग रहे थे। लोगों ने इनके इस अंदाज का भी खूब लुत्फ उठाया।

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सुंदर ने लोटपोट कर दिया

मुशायरा के अंतिम दौर में सुंदर मालेगामी आए, तो आते ही दर्शकों को श्रोताओं को हंसा-हंसाकर लोटपोट कर दिया। उन्होंने कहा कि मुझे कम नजर आता है और मैं भी लोगों को कम (काला होने की वजह से) नजर आता हूं। मुझे आप सिर्फ सुन सकते हैं, देखने वाली चीजें चली गई। अलग अंदाज में गजल और शेर सुनाकर खूब मनोरंजन किया। उनके बोल भी कम मजेदार नहीं थे 'शादी से पहले मैं भी तो काला गुलाब था, उसकी निगाहें शौक गूलर बना दिया..'। उनकी इस लाइन पर भी खूब तालियां बजीं 'जो जमीन का दलाल होता है,उसका एक दिन बवाल होता है, पान हो या कोई सैंडल, मुंह तो दोनों से लाल होता है'।

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कम नहीं थे अलताफ जिया

मंच पर शहरवासियों ने शायद पहली बार राहत इंदौरी के बेटे अलताफ जिया को सुना और खूब सराहा। उन्होंने अपनी गजलों से जबरदस्त समां बांधा। 'जल रहा है मेरा दीया कैसे, मेहरबान हो गई हवा कैसे, मैं इसी रास्ते से गुजरूंगा, राहजनों को पता चला कैसे..' पर खूब तालियां बटोरीं।

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शंखध्वनि से हुआ शुभारंभ

मुशायरा का शुभारंभ शंखध्वनि और दीप प्रज्जवलन से हुआ, जिसे कुछ शायरों ने सराहा भी। शायरों का स्वागत जुस्को के प्रबंध निदेशक तरुण डागा व टाटा स्टील के वाइस प्रेसिडेंट (शेयर्ड सर्विसेज) अवनीश गुप्ता ने किया, जबकि इस मौके पर फिल्म निर्देशक इम्तियाज अली के पिता मंसूर अली और करीम सिटी कालेज के मो. जकारिया, डॉ. नसर फिरदौसी, हिदायतुल्लाह खान समेत शहर की कई हस्तियां मुशायरे के अंत तक मौजूद रहीं।

Posted By: Jagran

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