जासं, जमशेदपुर : इस पूरे मामले में तख्त श्री हर मंदिर जी पटना साहेब के जत्थेदार ज्ञानी रणजीत सिंह ने दैनिक जागरण से गुरुवार रात विशेष बातचीत की। कहा कि गुरमुख सिंह मुखे झूठ बोल रहे हैं और मुझे भी बदनाम कर रहे हैं। मैंने उन्हें नहीं कहा कि वे जाकर अपना पद संभाले। मैं नहीं चाहता कि सिख समाज में आपस में झगड़े हो, केस-मुकदमा होकर समाज की छवि धूमिल हो। मैंने उनसे कहा था कि आप वापस जाएं और दूसरे पक्ष से माफी मांगकर केस खत्म करें। गुरुद्वारा आने पर सरोपा प्रसाद के रूप में दिया जाता है न कि आदेश के रूप में। जब तक मुखे मुकदमे से बरी नहीं हो जाते हैं वे सिख समाज के किसी भी धार्मिक मंच पर न तो सम्मानित हो सकते हैं और न ही किसी पद पर रह सकते हैं।

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दबाव में आकर दे रहे हैं ज्ञानी जी ऐसा बयान : मुखे

जत्थेदार ज्ञानी रणजीत सिंह के बयान पर मुखे का कहना है कि 10 सितंबर 2015 में श्री अकाल तख्त साहेब अमृतसर बैठक हुई थी। इसमें ज्ञानी गुरुबचन सिंह, पटना साहेब से सिंह साहब ज्ञानी इकबाल सिंह, तख्त श्री केसगढ़ साहब के जत्थेदार सिंह साहब ज्ञानी मल सिंह, दमदमा साहब जत्थेदार ज्ञानी गुरुमुख सिंह और हुजूर साहब नांदेड से हेड ग्रंथी ज्ञानी राम सिंह उपस्थित थे। बैठक में तय हुआ था कि जो भी अदालती मामला है उसे तख्त साहब में न लाया जाए। चूंकि हमारा मामला अदालती है। इस बैठक का हवाला देते हुए हमने ज्ञानी रणजीत सिंह से संपर्क किया और उनसे सारी बात बताई। उन्होंने ही संगत को जोड़कर सेवा संभालने का आदेश दिया। पटना तख्त में चुनाव होने वाला है और इंद्रजीत सिंह जो वहां के मीत प्रधान हैं। उनके दबाव में आकर ज्ञानी जी ऐसा बयान दे रहे हैं। सिख कौम में जब किसी पर रोक लगाई जाती है तो जत्थेदार उस व्यक्ति के साथ खड़े होकर तस्वीर नहीं खिचाते।

Edited By: Jagran