जमशेदपुर [दिलीप कुमार]। कोल्हान का यह इलाका प्रवासी पक्षियों का पसंदीदा जगह है। यहां ठंड का मौसम शुरू होते ही प्रवासी पक्षियों का कलरव शुरू हो जाता है। यह स्थानीय लोगों के साथ सैलानियों के लिए भी सुखद अनुभव होता है। स्वर्णरेखा और करकरी नदी के संगम पर चांडिल डैम समेत डिमना लेक और सीतारामपुर डैम में मेहमान प्रवासी पक्षियों का आगमन शुरू हो गया है। 

मौसम बदलते ही डैम में प्रवासी पक्षियों की चहचहाट शुरू होने के बाद इन्हें देखने के लिए पर्यटकों का पहुंचना भी शुरु हो गया है। पक्षियों का झुंड पानी में कलोल करते हुए अलग ही आकर्षण एवं दिलचस्प नजारा पेश कर रहे हैं। मेहमान प्रवासी पक्षी विदेशों से लाखों किलोमीटर का सफर तय कर हर साल यहां पहुंचते हैं।

नवंबर में आगमन, मार्च महीने में होती वापसी

नवंबर महीने में इनका आगमन शुरू हो जाता है, जो ठंड की समाप्ति के बाद मार्च महीने में पुन: वापस उड़ जाते हैं। इस समय जमशेदपुर शहर के आसपास चांडिल डैम, डिमना लेक और सीतारामपुर डैम समेत अन्य जलाशयों में अलग अलग क्षेत्रों से हजारों प्रवासी पक्षी पहुंच चुके हैं। जिनमें साइबेरियन गाल्ज, रूडी शैलडक, शॉवलर, कोमन पोचड आदि की कई प्रजातियों के पक्षी डैम की सुंदरता को चार चांद लगा रहे हैं।

सर्दी बढ़ने के साथ बढ़ती संख्या

सर्दी बढ़ने के साथ-साथ इनकी गिनती में भी इजाफा होता जाएगा। चांडिल डैम की मछलियां और मछलियों को खिलाए जाने वाला दाना इनका मन पसंदीदा आहार है। चांडिल बांध विस्थापित मत्स्यजीवी स्वावलंबी सहकारी समिति के सचिव श्यामल मार्डी ने बताया कि बाहर से आने वाले इन पक्षियों का लोग पहले शिकार करते थे, परंतु समिति के सदस्यों की तत्परता ने इस पर रोक लगा दी गई है। इस बार चांडिल डैम में प्रवासी पक्षी पर्यटकों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहेगा।

प्रवासी पक्षियों का दूसरा घर है झारखंड

झारखंड के छोटे-बड़े जलाशयों में 70 हजार से अधिक प्रवासी जलीय पक्षी तीन से चार महीने बिताते हैं। इनमें मंगोलिया, तिब्बत, लद्दाख और चीन से आने वाले पक्षी विंटर विजिटर शामिल हैं। झारखंड में नवंबर से इनका आना शुरू होता है। मार्च के बाद ये पक्षी यहां से वापस लौट जाते हैं। यहां एक-एक जलाशय में प्रवासी और स्थानीय पक्षी हजारों की संख्या में हैं। यहां के जलीय पादप की विविधता पक्षियों को आकर्षित करती है।

मिले थे लुप्तप्राय पक्षी

बर्ड सेंसस के दौरान विभाग को राज्य के जलाशयों में व्हाइट नेकेड स्ट्रोक, ब्लैक नेकेड स्ट्रोक, लेजर एजेंट स्ट्रोक, ओरिएंटल व्हाइट, इबिस फुलवेस, विहिस्लिंग डक, योरोजिनिस पोचार्ड, वेस्टर्न मार्स, हैरियर रिवर, टेर्न रिविर लॉपिंग आदि लुप्तप्राय पक्षी भी मिले।

23 प्रजाति के प्रवासी पक्षी

वन विभाग ने पूरे झारखंड में 21 जनवरी से लेकर नौ फरवरी 2018 तक बर्ड सेंसस कराया था। इस दौरान चांडिल, डिमना, सीतारामपुर डेम समेत राज्य के 25 जलाशयों में करीब 47 हजार पक्षी देखे गए। सर्वे के दौरान कुल 69 प्रजातियों के पक्षी मिले, जिनमें 23 प्रजातियों के पक्षी प्रवासी थे।

यहां हुआ बर्ड सेंसस

विदेशी प्रवासी पक्षियों के लिए वन विभाग ने चांडिल डैम, डिमना लेक, सीतारामपुर डैम, लोटवा डैम, तिलैया डैम, उधवा झील, हटिया डैम, गेतलसुद डैम, पतरातू डैम, कांके डैम, कांडोली डैम, तोपचांची डैम, पंचेत डैम, मैथन डैम, मसानजोर डैम, गरगा डैम, तेनुघाट डैम, कोनार डैम, बुद्धा डैम, छड़वा डैम, गोंदा डैम, कांसजोर डैम, मलय डैम, कमलदाह डैम आदि में बर्ड सेंसस कराया था।

यह भी जाने

-जलाशयों में करीब 47 हजार पक्षी देखे गए झारखंड के

-प्रजातियों के पक्षी मिले सर्वे में 23 प्रजातियों के पक्षी थे प्रवासी

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Posted By: Rakesh Ranjan

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