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NEET-UG में फर्जीवाड़ा रोकने की कवायद: रिम्स कांड के बाद MGM के 150 छात्रों के सर्टिफिकेट जांच के दायरे में

Published: Thu, 09 Jul 2026 12:46 AM (GMT+05:30)

रिम्स में फर्जी दाखिले के मामले के बाद झारखंड स्वास्थ्य विभाग सतर्क हो गया है, जिसके तहत राज्य के सभी ...और पढ़ें

महात्‍मा गांधी मेमोरियल मेडिकल कॉलेज जमशेदपुर।

महात्‍मा गांधी मेमोरियल मेडिकल कॉलेज जमशेदपुर।

HighLights

  1. रिम्स फर्जीवाड़े के बाद स्वास्थ्य विभाग ने सत्यापन शुरू किया।

  2. कॉलेज में पहले भी फर्जी प्रमाण पत्रों के मामले सामने आए।

जागरण संवाददाता, जमशेदपुर । रांची स्थित रिम्स (RIMS) में फर्जी प्रमाण पत्र के आधार पर एमबीबीएस (MBBS) में दाखिला लेने का सनसनीखेज मामला सामने आने के बाद राज्य का स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह सतर्क हो गया है। 
 
भविष्य में ऐसी किसी भी चूक को रोकने के लिए विभाग ने राज्य के सभी सरकारी मेडिकल कॉलेजों में वर्ष 2025 बैच के छात्रों के दस्तावेजों का वेरिफिकेशन शुरू कर दिया है।
 
इसी कड़ी में जमशेदपुर के महात्मा गांधी मेमोरियल (MGM) मेडिकल कॉलेज में दाखिला लेने वाले सभी 150 एमबीबीएस छात्रों के प्रमाण पत्र जांच के लिए रांची मंगाए गए हैं। 
 
कॉलेज प्रशासन ने आनन-फानन में सभी जरूरी दस्तावेज स्वास्थ्य विभाग को सौंप दिए हैं, जिनकी विभागीय स्तर पर स्क्रूटनी की जाएगी ताकि फर्जी प्रवेश को रोका जा सके।
 

अगस्त 2025 में पकड़ा गया था 'डबल कास्ट' सर्टिफिकेट का खेल

एमजीएम मेडिकल कॉलेज में फर्जी या संदिग्ध प्रमाण पत्रों के सहारे एंट्री की कोशिश का यह कोई पहला मामला नहीं है। बीते वर्ष अगस्त 2025 में भी गिरिडीह जिले की रहने वाली एक छात्रा दो अलग-अलग जाति प्रमाण पत्र लेकर एमबीबीएस में एडमिशन लेने पहुंच गई थी।

कॉलेज स्तर पर दस्तावेजों की प्रारंभिक जांच के दौरान ही तत्कालीन प्राचार्य डॉ. दिवाकर हांसदा ने इस गड़बड़ी को पकड़ लिया था। उन्होंने तुरंत गिरिडीह के उपायुक्त और संबंधित अंचल अधिकारी (CO) को पत्र लिखकर जांच का अनुरोध किया था। 
 
जांच में पता चला कि नीट-यूजी (NEET-UG) के दस्तावेजों में छात्रा की श्रेणी अनुसूचित जाति (एससी) दर्ज थी, जबकि कॉलेज में दाखिले के समय उसने अनुसूचित जनजाति (एसटी) श्रेणी का फर्जी प्रमाण पत्र प्रस्तुत किया था। नियमों के उल्लंघन के कारण उसका दाखिला रद्द कर दिया गया था।
 

7 साल पहले फर्जी अलॉटमेंट लेटर लेकर पहुंचा था छात्र

कॉलेज के इतिहास में करीब सात वर्ष पूर्व भी एक बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया था, जब एक छात्र जालसाजी कर तैयार किए गए फर्जी अलॉटमेंट लेटर के आधार पर एमबीबीएस में सीट हथियाने पहुंच गया था। 
 
हालांकि, कॉलेज प्रशासन की मुस्तैदी से समय रहते मामला पकड़ में आ गया और आरोपी छात्र के खिलाफ स्थानीय थाने में प्राथमिकी (FIR) दर्ज कराई गई थी।
 

2023 बैच का एक छात्र भी संदेह के घेरे में

कॉलेज सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, वर्तमान में वर्ष 2023 बैच के भी एक छात्र के प्रमाण पत्र को लेकर गंभीर संदेह जताया गया है। प्रारंभिक स्क्रूटनी में उसके दस्तावेजों में गड़बड़ी की आशंका उजागर हुई है। 
 
वर्तमान में यह मामला कॉलेज प्रबंधन के स्तर पर आंतरिक जांच के अधीन है, जिसके पूरे होते ही कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
 

एमजीएम कॉलेज: फर्जीवाड़े का पुराना ट्रैक रिकॉर्ड

  • केस 1 : वर्ष 2025 बैच के सभी 150 नए मेडिकल छात्रों के दस्तावेज स्वास्थ्य विभाग द्वारा जब्त, जांच जारी। 
  • केस 2 : अगस्त 2025 में गिरिडीह की छात्रा ने नीट में एससी (SC) और एडमिशन में एसटी (ST) सर्टिफिकेट लगाकर दाखिले की कोशिश की, पकड़ी गई।
  • केस 3 : वर्ष 2023 बैच का एक छात्र संदिग्ध डॉक्यूमेंट्स के कारण आंतरिक जांच की रडार पर।
  • केस 4 : 7 वर्ष पूर्व फर्जी काउंसलिंग/अलॉटमेंट लेटर के सहारे एडमिशन लेने पहुंचे छात्र पर दर्ज हुई थी एफआईआर (FIR)।

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रांची में फर्जी प्रमाण पत्र के आधार पर दाखिले का मामला सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने एमजीएम से भी वर्ष 2025 बैच के सभी छात्रों के प्रमाण पत्र जांच के लिए मांगे थे। सभी दस्तावेज विभाग को भेज दिए हैं। विभागीय स्तर पर सत्यापन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद यदि किसी भी प्रकार की अनियमितता सामने आती है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

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डाॅ. संजय कुमार, प्राचार्य, एमजीएम कालेज।