चिकित्सा शोध को बढ़ावा: जमशेदपुर एमजीएम मेडिकल कॉलेज में स्तन कैंसर और मधुमेह से जुड़े शोध प्रस्तावों को मिली मंजूरी
जमशेदपुर के एमजीएम मेडिकल कॉलेज में चिकित्सा शोध को बढ़ावा देने के लिए एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें ...और पढ़ें

एमजीएम मेडिकल कॉलेज में लोकल रिसर्च एडवाइजरी कमेटी की इस बैठक में कुल 12 शोध प्रस्तावों पर विस्तार से चर्चा की गई।
HighLights
एमजीएम कॉलेज में 12 शोध प्रस्तावों पर हुई चर्चा।
स्तन कैंसर, मधुमेह शोध प्रस्तावों को मिली मंजूरी।
फंगल नेत्र संक्रमण अध्ययन भी सीधे अनुशंसित।
जागरण संवाददाता, जमशेदपुर। महात्मा गांधी मेमोरियल (एमजीएम) मेडिकल कॉलेज में चिकित्सा शोध और अनुसंधान को बढ़ावा देने की दिशा में बुधवार को एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई।
कॉलेज की लोकल रिसर्च एडवाइजरी कमेटी की इस बैठक में कुल 12 शोध प्रस्तावों पर विस्तार से चर्चा की गई। इनमें से तीन प्रस्तावों को सीधे तौर पर अनुशंसित कर दिया गया।
जबकि चार प्रस्तावों को कुछ आवश्यक सुधारों और सुझावों के साथ आगे बढ़ाने की हरी झंडी दी गई। हालांकि, कमेटी ने विभिन्न पैमानों पर खरा न उतरने के कारण पांच प्रस्तावों को खारिज कर दिया।
इन शोध प्रस्तावों के दायरे में स्तन कैंसर, मधुमेह, मोटापा, कुष्ठ रोग, त्वचा और आंखों की बीमारियां जैसे गंभीर स्वास्थ्य विषय शामिल हैं।
बैठक में भाग लेने के लिए कमेटी के चेयरमैन डॉ. शांतनु सेन, को-चेयरमैन डॉ. देवाशीष दास (कोलकाता) और आईसीएमआर की डॉ. अपर्णा मुखर्जी विशेष रूप से उपस्थित थीं।
कार्यक्रम का उद्घाटन एमजीएम मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. संजय कुमार, अधीक्षक डॉ. बलराम झा और डॉ. आशीष विश्वास ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया।
बैठक का मुख्य उद्देश्य मेडिकल कॉलेज में होने वाले शोध कार्यों की गुणवत्ता, प्रासंगिकता और उपयोगिता का सटीक आकलन करना था।
इस दौरान डॉ. के.के. चौधरी, डॉ. शिखा रानी, डॉ. गौरी भादुड़ी, डॉ. लुगुराम टुडू, डॉ. कुमार विमल, कुबेर चंद्रा सेतु और मनीष कुमार सहित कई चिकित्सक व शोधकर्ता उपस्थित रहे।
बैठक में प्रस्तुत प्रमुख प्रस्तावों में आदिवासी बहुल झारखंड की महिलाओं में स्तन कैंसर से जुड़े जैविक संकेतकों का अध्ययन भी शामिल है।
इस शोध के जरिए कैंसर मरीजों में तीन विशेष माइक्रोआरएनए संकेतकों की अभिव्यक्ति और बीमारी की चिकित्सकीय विशेषताओं के बीच के आपसी संबंधों को समझने का प्रयास किया जाएगा।
इस महत्वपूर्ण प्रस्ताव को कुछ सुधार सुझावों के साथ आगे बढ़ाने की अनुशंसा की गई है। वहीं, टाइप-2 मधुमेह के मरीजों में मेटफॉर्मिन के साथ कम मात्रा में नई फार्मूला दवा देने के प्रभाव का अध्ययन करने के प्रस्ताव को भी हरी झंडी मिल गई।
इसमें रक्त में शर्करा (ब्लड शुगर) के स्तर पर पड़ने वाले प्रभाव और अग्न्याशय (पैनक्रियाज) की बीटा कोशिकाओं के कामकाज का बारीकी से आकलन किया जाएगा।
कमेटी के समक्ष मोटापे से जुड़ा एक अनूठा शोध प्रस्ताव भी रखा गया, जिसमें 50 से 70 वर्ष की आयु के मोटापे से ग्रस्त पुरुषों पर विशेष कमर पेटी (बेल्ट) के प्रभाव का अध्ययन किया जाएगा।
शोध के दौरान कमर की माप के साथ-साथ शरीर में सूजन से जुड़े संकेतकों (इन्फ्लेमेटरी मार्कर्स) की भी जांच की जाएगी। इस प्रस्ताव को भी विशेषज्ञों के सुझावों के साथ आगे बढ़ाने की अनुशंसा की गई।
इसके अतिरिक्त, कुष्ठ रोग के मरीजों में नसों को होने वाले नुकसान का पहले से सटीक अनुमान लगाने, सोरायसिस से जुड़े जोड़ों के गठिया रोग के जोखिम का आकलन करने तथा गंभीर फंगल संक्रमण से प्रभावित आंखों के उपचार से जुड़े शोध प्रस्ताव भी रखे गए।
इनमें से आंखों के फंगल संक्रमण से संबंधित प्रस्ताव को कमेटी ने सीधे तौर पर अनुशंसित कर दिया।
