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    मरीज भगवान भरोसे! 12 करोड़ की कैथ Lab तैयार, पर नहीं हो रहा इलाज, MGM के हार्ट मरीज बेबस

    Updated: Sat, 29 Nov 2025 05:51 PM (IST)

    जमशेदपुर के एमजीएम अस्पताल में 12 करोड़ की कैथ लैब बेकार पड़ी है, जिससे हृदय रोगियों का इलाज नहीं हो पा रहा। एंजियोग्राफी और एंजियोप्लास्टी जैसी सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं, जिससे मरीजों को निजी अस्पतालों में महंगा इलाज कराने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। डॉक्टरों और तकनीशियनों की कमी के कारण कैथ लैब का उपयोग नहीं हो पा रहा है, जिससे गरीब मरीजों को भारी परेशानी हो रही है।

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    फाइल फोटो

    जागरण संवाददाता, जमशेदपुर। डिमना चौक स्थित महात्मा गांधी मेमोरियल (एमजीएम) मेडिकल कॉलेज अस्पताल में 12 करोड़ रुपये की लागत से तैयार की गई अत्याधुनिक कैथ लैब भवन पिछले कई महीनों से बनकर तैयार है। मार्च 2025 तक इसे शुरू करने का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन नवंबर बीत जाने के बाद भी यहां एक भी मरीज का उपचार नहीं हो पाया है। 
     
    सरकारी फाइलों, निरीक्षणों और मीटिंगों के दौर के बीच इलाज की उम्मीद लेकर आने वाले हार्ट मरीजों की सांसें थमती जा रही हैं। ठंड के मौसम हृदय रोगियों के लिए हमेशा से जोखिम भरा माना जाता है। 
     
    डॉक्टरों के अनुसार ठंड में हार्ट अटैक के मामले तेजी से बढ़ते हैं। एमजीएम अस्पताल की इमरजेंसी में रोजाना दो से चार मरीज हार्ट अटैक की स्थिति में पहुंचते हैं, लेकिन कैथ लैब का संचालन शुरू न होने के कारण डॉक्टर मजबूरन उन्हें रांची रिम्स, कोलकाता या निजी अस्पतालों में रेफर कर देते हैं।


    पैसे वाले मरीज निजी अस्पतालों में लाखों खर्च कर उपचार कराते हैं, जबकि आर्थिक रूप से कमजोर लोग अक्सर इलाज के अभाव में दम तोड़ देते हैं। कई मरीज अपनी पीडा सुनाते हुए कहते हैं क‍ि अगर एमजीएम में एंजियोग्राफी या एंजियोप्लास्टी की सुविधा होती, तो हमारा अपना बच सकता था।

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    हर साल 200 से अधिक मरीज रेफर, खर्च पहुंचता दो लाख तक 

    अस्पताल के आंकड़े चौंकाने वाले हैं। एमजीएम से हर वर्ष कम से कम 200 गंभीर कार्डियक मरीजों को इसलिए बाहर भेजना पड़ता है, क्योंकि अस्पताल में तत्काल एंजियोग्राफी या एंजियोप्लास्टी की सुविधा उपलब्ध नहीं है। एंजियोग्राफी का सामान्य खर्च: 10–15 हजार रुपये और  एंजियोप्लास्टी / बैलूनिंग में 1.5-2 लाख रुपये खर्च होते हैं।

    सरकारी अस्पताल में यह उपचार उपलब्ध होना चाहिए। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए यह सुविधा जरूरी है। ऐसे में सवाल यह है क‍ि जब कैथ लैब की इमारत और संरचना तैयार है, तो जनता को अब तक इसका लाभ क्यों नहीं मिल रहा?

    कई दौर के निरीक्षण और बैठकों के बावजूद कैथ लैब शुरू होने की दिशा में ठोस कदम अब तक नहीं उठाए गए हैं। भवन पूरी तरह बन चुका है, लेकिन मशीनों की इंस्टॉलेशन प्रक्रिया अधूरी है, ऑपरेशनलाइजेशन की फाइल आगे नहीं बढ़ी है, कार्डियोलॉजिस्ट एवं अन्य विशेषज्ञों की नियुक्ति लंबित है।

    स्वास्थ्य विभाग की टीम ने पिछले वर्ष निरीक्षण के बाद रिपोर्ट में कैथ लैब को जल्द चालू करने की सलाह दी थी, लेकिन कार्रवाई की रफ्तार ‘कछुआ चाल’ से भी धीमी बताई जा रही है। 

     

    कैथ लैब क्यों है जरूरी? जानें इसकी भूमिका 

    कैथेटराइजेशन लैब वह यूनिट होती है जहां हृदय एवं रक्त वाहिकाओं की उन्नत जांच और तत्काल उपचार किया जाता है। यहां मुख्यतः दो अहम प्रक्रियाएं की जाती हैं-

    एंजियोग्राफी: धमनियों में अवरोध की जांच, जिससे हृदय की वास्तविक स्थिति का पता चलता है।
    एंजियोप्लास्टी: अवरुद्ध धमनियों को खोलकर मरीज की जान बचाने की प्रक्रिया, जिसमें स्टेंट लगाया जाता है।

    हार्ट अटैक के मामले में मिनटों का फर्क मरीज की जान बचाने में निर्णायक हो सकता है। इसीलिए एमजीएम जैसे बड़े सरकारी अस्पताल में कैथ लैब का चालू होना हजारों मरीजों को राहत दे सकता है।

    आधुनिक कैथ लैब का भवन एमजीएम कैंपस में भले ही आकर्षक दिखता हो, लेकिन जब तक यहां मशीनें चालू नहीं होतीं और विशेषज्ञ तैनात नहीं किए जाते, तब तक यह केवल एक खाली संरचना बनी रहेगी। लोग अब यह जानना चाहते हैं कि 12 करोड़ की इस परियोजना से वास्तविक लाभ कब मिलेगा?

    कैथ लैब शुरू करने को लेकर विभाग गंभीर है। इसका प्रस्ताव मेडिसिन विभागाध्यक्ष से मांगा गया है ताकि विभाग को भेजा जा सके। उम्मीद है कि जल्द ही इसका लाभ मरीजों को मिलने लगेगा।

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    डॉ. दिवाकर हांसदा, प्रिंसिपल, एमजीएम