जमशेदपुर [विश्वजीत भट्ट]।  देश में अब मिट्टी की ईटें इतिहास बन जाएंगी। क्योंकि पूरे देश में 43 दिन बाद मिट्टी की ईटें पूर्णत: प्रतिबंधित हो जाएंगी। भारत सरकार के पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने 25 फरवरी, 2019 को प्रारूप अधिसूचना जारी करके देश के सभी चिमनी वाले मिट्टी के ईट भट्ठों को फ्लाई ऐश से बनने वाली ईट भट्ठों में परिवर्तित करने का आदेश जारी किया है।

प्रारूप अधिसूचना जारी होने की तारीख 25 फरवरी 2019 से 60 दिनों के भीतर मंत्रालय ने इस प्रारूप अधिसूचना में आपत्ति और सुझाव मांगा है। कोई आपत्ति करेगा या सुझाव देगा तो मंत्रालय इस पर विचार करेगा। यदि आपत्ति या सुझाव नहीं भी आएगा तो भी 60 दिनों के बाद मंत्रालय अंतिम अधिसूचना जारी कर देगा। इसके बाद सभी चिमनी वाले ईट भट्ठों को अनिवार्य रूप से फ्लाई ऐश वाले ईट भट्ठों में परिवर्तित करना ही होगा।

फ्लाई ऐश से ईटें बनाने को मिलेगा प्रोत्साहन 

प्रारूप अधिसूचना में चिमनी वाले मिट्टी की ईटों वाले भट्ठों की मदद करने, बहुत अधिक नुकसान से बचाने और फ्लाई ऐश से ईटें बनाने को प्रोत्साहित करने के लिए मंत्रालय ने कई प्रावधान भी किए हैं। फ्लाई ऐश वाले ईट भट्ठों को फ्लाई ऐश आसानी से उपलब्ध हो इसकी व्यवस्था कर दी गई है। देश के सभी थर्मल पावर प्लांटों के पास फ्लाई ऐश का पर्याप्त भंडार है। इन पावर प्लांटों को चारों दिशाओं में 300 किमी की परिधि में एक रुपये प्रति टन कीमत पर फ्लाई ऐश उपलब्ध कराना होगा। ईट भट्ठों पर फ्लाई ऐश पहुंचाने का ढुलाई खर्च भी पावर प्लांटों को ही वहन करना होगा।

केवल फ्लाई ऐश से ही ईटें बनेंगी

भारत सरकार के पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की प्रारूप अधिसूचना में यह भी स्पष्ट उल्लिखित है कि अब देश में केवल फ्लाई ऐश से ही ईटें बनेंगी। मिट्टी की ईटों वाले भट्ठे यदि फ्लाई ऐश के ईट भट्ठों में परिवर्तित हो जाते हैं तो ठीक, नहीं तो इनको बंद कर दिया जाएगा। इसके साथ ही ग्रामीण इलाकों में छोटे रूप में संचालित बांग्ला भट्ठों को भी पूर्ण रूप से बंद कर दिया जाएगा।

झारखंड में प्रभावित होंगे 24 सौ चिमनी वाले

झारखंड में प्रभावित होंगे 2400 चिमनी वाले व 15000 बांग्ला भट्ठे झारखंड ईट निर्माता संघ के अध्यक्ष एलआर शर्मा ने बताया कि भारत सरकार के पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की इस अधिसूचना से केवल झारखंड में ही 2400 चिमनी वाले ईट भट्ठों को फ्लाई ऐश वाले भट्ठों में परिवर्तित करना होगा। इसके साथ ही सूबे संचालित 15000 बांग्ला भट्ठों का अस्तित्व समाप्त हो जाएगा।

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