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मेदिनीपुर में धान के खेत में करंट का कहर, मादा हाथी और दो शावकों की मौत; वन्यजीव सुरक्षा पर सवाल

By Durgesh ShuklaEdited By: Mansi Kumari
Published: Sun, 27 Sep 2026 10:01 AM (IST)

मेदिनीपुर में धान के खेत में करंट लगने से एक मादा हाथी और उसके दो शावकों की मौत हो गई, ...और पढ़ें

मादा हाथी और दो शावकों की मौत। जागरण

मादा हाथी और दो शावकों की मौत। जागरण

HighLights

  1. मेदिनीपुर में धान के खेत में हादसा।

  2. मादा हाथी और दो शावकों की मौत।

  3. वन्यजीव सुरक्षा पर गंभीर प्रश्नचिह्न।

संवाद सूत्र, खड़गपुर। भोजन की तलाश में धान का खेत पार करते समय एक बड़ी हाथी और उसके दो बच्चों की करंट लगने से मौत हो गई। रविवार सुबह पश्चिम मेदिनीपुर जिले के मेदिनीपुर फॉरेस्ट डिवीजन अंतर्गत पीड़ाकाटा रेंज में रांजा बिट के तहत हाटोडा गांव के एक खेत से तीन हाथियों की लाशें मिलीं। स्थानीय लोगों ने सबसे पहले हाथियों को मरा हुआ देखा।

शुरू में यह माना गया कि तीनों हाथियों की मौत जमीन पर पड़े एक पंप के बिजली के तारों के संपर्क में आने से हुई। सूचना मिलने के बाद हरकत में आए वन विभाग के कर्मियों ने घटनास्थल का मौका-मुआयना करने के साथ हाथियों के शवों को अपने कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

इस घटना से जंगल में हाथियों की सुरक्षा एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। हाथियों का रिहायशी इलाकों में घुसना, करंट लगने से मरना या रेलवे ट्रैक पर एक्सीडेंट - ऐसी घटनाओं में हाथी बार-बार अपनी जान गंवा रहे हैं। लेकिन इंसान-हाथी टकराव और हाथियों की मौत को रोकने के लिए कितने असरदार कदम उठाए जा रहे हैं, इस पर सवाल उठ रहे हैं।

जंगलमहल में पहले भी ऐसी दुखद घटनाएं हो चुकी हैं। करीब एक साल पहले, झाड़ग्राम के बांशतोला रेलवे स्टेशन के पास एक बड़ा हाथी, अपने दो बच्चों के साथ, जनशताब्दी एक्सप्रेस की चपेट में आ गया था। रेलवे लाइन पर हुए हादसे में तीन हाथियों की मौत से जंगल और वाइल्डलाइफ प्रेमियों में चिंता फैल गई है।

पर्यावरणविदों और वाइल्डलाइफ प्रेमियों के अनुसार हाथियों के प्राकृतिक आवास के धीरे-धीरे सिकुड़ने और उनके जाने-पहचाने रहने की जगह में बदलाव के कारण हाथियों के समूह भोजन की तलाश में बस्तियों और खेती की ज़मीनों की ओर बढ़ रहे हैं। ज़िंदा रहने के लिए उन्हें जंगलमहल के अलग-अलग इलाकों में घूमना पड़ता है।

उस रास्ते में कभी बिजली की लाइनों, कभी रेलवे लाइनों, और कभी लोगों के साथ टकराव के कारण उनकी जान खतरे में पड़ जाती है। हाथियों की समस्या से निपटने के लिए लंबे समय के प्लान के बजाय, हाथियों के समूहों को एक जंगल डिवीजन से दूसरे जंगल डिवीजन में खदेड़ने का चलन है।

नतीजतन, न केवल हाथियों की समस्या का कोई स्थायी समाधान नहीं है, बल्कि एक इलाके से दूसरे इलाके में जाते समय हादसों का खतरा भी बढ़ रहा है। हाथियों के प्राकृतिक आवास को बचाने, सुरक्षित कॉरिडोर पक्का करने और खेती की ज़मीनों में खतरनाक बिजली कनेक्शनों की निगरानी बढ़ाने की मांग की जा रही है।

इसके अलावा वाइल्डलाइफ लवर्स हाथी-इंसान टकराव को कम करने के लिए फॉरेस्ट डिपार्टमेंट, बिजली विभाग और स्थानीय प्रशासन के बीच बेहतर तालमेल पर भी ज़ोर दे रहे हैं।

इस घटना ने एक बार फिर याद दिलाया कि वाइल्डलाइफ की सुरक्षा पक्की करना कितना ज़रूरी है। तीन हाथियों की मौत के बाद स्थानीय लोग अब जांच के साथ-साथ बिजली कनेक्शन की सुरक्षा और हाथियों की सुरक्षा में फॉरेस्ट डिपार्टमेंट की भूमिका को लेकर उठाए गए कदमों पर भी ध्यान दे रहे हैं। 

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