20 साल बाद आंचल में लौटेगी मेरी बिटिया... माओवादी बनीं जवा की आत्मसमर्पण वाली तस्वीर देख बिलख पड़ीं मां लुलकी
माओवादी बनी जवा महतो ने 20 साल बाद आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में वापसी की है, जिससे उनकी मां लुलकी महतो की आंखों में खुशी के आंसू आ गए हैं।

झारखंड और बंगाल की सीमा से लगे जंगलों में बीते वर्षों की अनिश्चितता के बीच मां को यह तक मालूम नहीं था कि उनकी बेटी जीवित भी है या नहीं। (AI Generated Image)
HighLights
मां लुलकी महतो को बेटी के लौटने की मिली खबर।
जवा 2006 से लापता थीं, अब परिवार में खुशी।
संसू, बंदवान। दो दशक से भी अधिक समय तक जिस बेटी की कोई खबर नहीं मिली, उसके जिंदा होने और सही-सलामत लौटने की सूचना ने मां लुलकी महतो की आंखों में खुशी के आंसू ला दिए।
झारखंड और बंगाल की सीमा से लगे जंगलों में बीते वर्षों की अनिश्चितता के बीच मां को यह तक मालूम नहीं था कि उनकी बेटी जीवित भी है या नहीं।
अब जवा महतो के आत्मसमर्पण की खबर और तस्वीर सामने आने के बाद उनके परिवार में राहत और उम्मीद की नई किरण जगी है। हथियार का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में लौटने के फैसले ने मां के मन में वर्षों से दबे दर्द को राहत दी है।
पुलिस अधिकारियों के समक्ष किया आत्मसमर्पण
उल्लेखनीय है कि बांकुड़ा पुलिस लाइन के सभागार में राज्य पुलिस के एडीजी (पश्चिमांचल) आनंद कुमार और पुलिस अधीक्षक वैभव तिवारी के समक्ष वरिष्ठ माओवादी नेता शचीन ने आत्मसमर्पण किया।
सचिन के साथ झाड़ग्राम जिले के बेलपहाड़ी की रहने वाली जवा महतो उर्फ बुलू उर्फ गौरी और पूर्व मेदिनीपुर (नंदीग्राम) की नयनतारा साहू उर्फ मिता उर्फ झुमा ने भी अपने हथियार डालकर कानून के समक्ष समर्पण कर दिया।
2006 से लापता थी जवा महतो
झाड़ग्राम जिले के बेलपहाड़ी थाना अंतर्गत जामिरडीहा गांव की निवासी जवा महतो वर्ष 2006 में अचानक लापता हो गई थीं। गायब होने से पहले वे बांकूड़ा जिले के रानीबांध स्थित अपनी मौसी के घर रहकर पढ़ाई कर रही थीं।
जहां से उन्होंने माध्यमिक परीक्षा दी थी। बाद में परिजनों को जानकारी मिली कि मदन महतो नामक व्यक्ति के संपर्क में आने के बाद जवा माओवादी संगठन में शामिल हो गई थीं।
बेटी के लापता होने के बाद से पुलिस अक्सर पूछताछ के लिए जवा के घर आती रही, लेकिन मां लुलकी के पास देने के लिए कोई जानकारी नहीं थी।
वर्षों पहले जवा के पिता अनिल महतो का भी देहांत हो गया था, जिसके बाद से मां अकेले ही बेटी के लौटने की राह देखती रहीं।
मां ने कहा- अब शांति से रहे दुनिया, घर लौट आए मेरी बेटी
बेटी के आत्मसमर्पण की सूचना मिलते ही लुलकी महतो ने अपने छोटे बेटे विश्वनाथ को बांकूड़ा भेजा है ताकि वह अपनी बहन से मुलाकात कर सके। लुलकी खुद भी अपनी बेटी से मिलने की तैयारी कर रही हैं।
इस पूरी खुशी के बीच मां की सबसे बड़ी इच्छा यही है कि उनकी बेटी जल्द से जल्द घर लौट आए। भावुक होकर लुलकी कहती हैं कि इस हिंसा के रास्ते पर चलने से क्या फायदा?
माओवाद की अब कोई जरूरत नहीं है। सभी लोग शांति से रहें और खुश रहें। जिस आंगन में मां ने दो दशकों तक बेटी का इंतजार किया है, अब वहां जवा के वापस लौटने की नई उम्मीद जग उठी है।
