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महिला माओवादी शकुंतला महतो का कोलकाता में आत्मसमर्पण, सांसद सुनील महतो हत्याकांड में थी वांछित

Published: Thu, 18 Jun 2026 11:57 PM (IST)

10 लाख की इनामी महिला माओवादी कमांडर शकुंतला महतो उर्फ पुष्पा ने कोलकाता पुलिस मुख्यालय में आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में वापसी की है। Jharkhand Top News

प्रतीकात्‍मक तस्‍वीर।

प्रतीकात्‍मक तस्‍वीर।

HighLights

  1. 10 लाख की इनामी माओवादी शकुंतला ने किया आत्मसमर्पण।

  2. 10 साल की उम्र में माओवादी संगठन से जुड़ी थी।

जागरण संवाददाता, जमशेदपुर। करीब 25 वर्षों तक झारखंड और पश्चिम बंगाल पुलिस के लिए बड़ी चुनौती बनी रही 10 लाख रुपये की इनामी महिला माओवादी कमांडर शकुंतला महतो उर्फ पुष्पा ने आखिरकार कानून के सामने घुटने टेक दिए हैं। 
 
शकुंतला ने 17 जून को कोलकाता पुलिस मुख्यालय (लालबाजार) में आत्मसमर्पण कर दिया। इस दौरान उसने पुलिस के समक्ष अत्याधुनिक हथियार और 46 राउंड कारतूस भी जमा किए। इसके साथ ही वह हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में लौट आई है।
 

सांसद सुनील महतो हत्याकांड में थी वांछित 

शकुंतला महतो झारखंड के चर्चित और वीभत्स हत्याकांडों में से एक- घाटशिला के बाघुडिया फुटबॉल मैदान में 4 मार्च 2007 को जमशेदपुर के तत्कालीन सांसद सुनील महतो समेत चार लोगों की हत्या के मामले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) की वांछित अभियुक्त रही है। 
 
इस पर झारखंड सरकार ने 10 लाख रुपये का इनाम घोषित कर रखा था। इसके खिलाफ पूर्वी सिंहभूम जिले के गालूडीह, धालभूमगढ़, पटमदा, बोड़ाम सहित विभिन्न थानों में नक्सली हिंसा और कई अन्य गंभीर धाराओं के तहत मामले दर्ज हैं।
 

महज 10 साल की उम्र में चुनी थी बंदूक, किशनजी की रही करीबी 

पश्चिम बंगाल के झाड़ग्राम जिले के बेलपहाड़ी थाना क्षेत्र स्थित मेचुआ गांव की रहने वाली शकुंतला महतो महज 10 वर्ष की उम्र में माओवादी संगठन से जुड़ गई थी। 
 
सिर्फ पांचवीं कक्षा तक पढ़ी शकुंतला संगठन के भीतर परी, वर्षा और पुष्पा जैसे कई छद्म नामों से सक्रिय रही। वर्ष 2003 में झाड़ग्राम स्क्वाड में उसकी मुलाकात एरिया कमांडर अतुल महतो से हुई और साल 2005 में दोनों ने रांची जिले के तमाड़ के जंगलों में शादी कर ली। 
 
वह माओवादियों की ईस्टर्न रीजनल ब्यूरो और जोनल कमेटी की सदस्य रही तथा झारखंड, ओडिशा और पश्चिम बंगाल के सीमावर्ती क्षेत्रों में कई बड़े नक्सली हमलों में उसकी सक्रिय भूमिका रही। 
 
वह शीर्ष माओवादी नेता किशनजी उर्फ कोटेश्वर राव और एक करोड़ के इनामी असीम मंडल की बेहद विश्वसनीय सहयोगी मानी जाती थी।
 

रंजीत पाल और झरना के बाद शकुंतला ने भी छोड़ा साथ 

शकुंतला से पहले उसके दस्ते के प्रमुख रंजीत पाल ने अपनी पत्नी झरना के साथ 25 जनवरी 2017 को पश्चिम बंगाल में आत्मसमर्पण किया था। किशनजी के एनकाउंटर में मारे जाने के बाद रंजीत और झरना ही माओवादी गतिविधियों का संचालन कर रहे थे।

    इनामी नक्सलियों के साथ करती थी काम:  

    शकुंतला के प्रमुख सहयोगियों में रामदास मार्डी उर्फ सचिन (इनाम 15 लाख), मालती मुर्मू (इनाम 5 लाख), मीना (इनाम 2 लाख) के अलावा मीता उर्फ नयनतारा और समीर महतो शामिल हैं। 
 
इनमें से अधिकांश पश्चिम बंगाल के बेलपहाड़ी और पुरुलिया के निवासी हैं और झारखंड पुलिस की मोस्ट वांटेड सूची में शामिल हैं। शकुंतला के आत्मसमर्पण को संगठन के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है।

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