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₹1करोड़ के इनामी माओवादी आकाश ने छोड़ी जंगल की राह: खराब स्वास्थ्य और दबाव में दस्ता किया भंग

Published: Mon, 14 Sep 2026 09:42 PM (IST)

एक करोड़ के इनामी माओवादी आकाश ने खराब स्वास्थ्य और सुरक्षा बलों के बढ़ते दबाव के कारण जंगल छोड़ दिया ...और पढ़ें

खराब स्वास्थ्य और सुरक्षा बलों के बढ़ते लगातार दबाव के बीच आकाश ने सीपीआई (माओवादी) की पश्चिम बंगाल राज्य कमेटी के अपने सशस्त्र दस्ते को भंग कर दिया है।

खराब स्वास्थ्य और सुरक्षा बलों के बढ़ते लगातार दबाव के बीच आकाश ने सीपीआई (माओवादी) की पश्चिम बंगाल राज्य कमेटी के अपने सशस्त्र दस्ते को भंग कर दिया है।

HighLights

  1. एक करोड़ के इनामी माओवादी आकाश ने जंगल छोड़ा।

  2. खराब स्वास्थ्य और सुरक्षा बलों के दबाव में दस्ता भंग।

  3. सुरक्षा एजेंसियां आकाश की हर गतिविधि पर नजर रख रही हैं।

जासं, जमशेदपुर। जिस जंगल में ढाई दशक तक एक करोड़ रुपये का इनामी माओवादी असीम मंडल उर्फ 'आकाश' सुरक्षा बलों के लिए सबसे बड़ी चुनौती बना रहा, अब उसी जंगल से उसने दूरी बना ली है। 
 
खराब स्वास्थ्य और सुरक्षा बलों के बढ़ते लगातार दबाव के बीच आकाश ने सीपीआई (माओवादी) की पश्चिम बंगाल राज्य कमेटी के अपने सशस्त्र दस्ते को भंग कर दिया है और उसकी कमान छोड़ दी है।
 
खुफिया एजेंसियों के अनुसार, अगस्त के मध्य में वह दलमा रेंज के जंगलों से सामान्य कपड़ों में बाहर निकला और फिलहाल किसी शहर में शरण लिए हुए है। झारखंड और पश्चिम बंगाल की सुरक्षा एजेंसियां उसकी हर गतिविधि पर बारीक नजर बनाए हुए हैं।
 

साथियों के आत्मसमर्पण और मौतों से बढ़ा दबाव

पुलिस सूत्रों के मुताबिक, बीते कुछ समय में दस्ते के प्रमुख सदस्यों की गिरफ्तारी, मुठभेड़ों में हुई मौतों और लगातार हुए आत्मसमर्पण के कारण आकाश पर संगठनात्मक व सुरक्षात्मक दबाव काफी बढ़ गया था। 
 
आकाश के बेहद करीबी माने जाने वाले रामदास मार्डी उर्फ सचिन, उसकी पत्नी मीता उर्फ नयनतारा और मदन महतो की पत्नी गौरी उर्फ बुलू के आत्मसमर्पण से सुरक्षा एजेंसियों को माओवादी नेटवर्क की सटीक जानकारियां मिलीं।
 
इससे संगठन के नेटवर्क पर शिकंजा कस गया। आखिरकार जंगल छोड़ने से पहले आकाश ने अपने बचे हुए साथियों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी और दस्ते को औपचारिक रूप से भंग कर दिया।
 

किशनजी के बाद संभाली थी कमान

आकाश का माओवादी आंदोलन से जुड़ाव 1980 के दशक में उसके कॉलेज के दिनों से माना जाता है। वर्ष 2011 में शीर्ष माओवादी नेता किशनजी की मुठभेड़ में मौत के बाद आकाश को पश्चिम बंगाल का चौथा राज्य सचिव बनाया गया था।

वर्ष 2018 तक उसने पूर्वी सिंहभूम और बाद में पश्चिम सिंहभूम के सारंडा तथा बंगाल-झारखंड सीमा क्षेत्र में संगठन को सक्रिय रखने में मुख्य भूमिका निभाई। 
 
जमशेदपुर के तत्कालीन सांसद सुनील महतो की हत्या समेत कई प्रमुख माओवादी वारदातों में उसके दस्ते की संलिप्तता की जांच होती रही है।
 

दलमा में दो हथियाबंद सदस्यों के छिपे होने की सूचना

हालांकि, आकाश के जंगल छोड़ने के बावजूद झारखंड-बंगाल सीमा से सटे दलमा के जंगलों में दो माओवादी सदस्यों के हथियारों के साथ छिपे होने की खबर है। इनमें मंगल सिंह सरदार और उसकी पत्नी मिताली मुर्मू के नाम सामने आए हैं।

सुरक्षा एजेंसियां अब आकाश के अगले कदम पर पैनी नजर रख रही हैं। कयास लगाए जा रहे हैं कि वह जल्द ही आत्मसमर्पण कर सकता है या फिर संगठन के लिए किसी नई रणनीति पर काम कर रहा है।