जमशेदपुर, जासं। भारतीय रेडक्रॉस सोसाइटी, पूर्वी सिंहभूम द्वारा कोरोना के दूसरी लहर के दौरान लागू पाबंदियों के दौरान समाज के ऐसे गरीबों को 10-10 दिन का राशन देने की तैयारी की जा रही है, जो रोज कमाने खाने वाले हैं। ऐसे लोग जिन्हें अंत्योदय कार्ड भी नहीं होता।

ऐसे लोगों को सरकार द्वारा जारी सुविधा नहीं मिलने के कारण उनकी स्थिति और भी गंभीर हो जाती है। सबसे दयनीय स्थिति फुटपाथ और झोपड़पट्टियों में जिंदगी बसर करने वालों की होती है, जिनके पास अपने अस्तित्व का कोई प्रमाण नहीं होता। गत वर्ष कोरोना लॉकडाउन के दौरान रेडक्रास, टाटा स्टील विभिन्न समाजसेवी संस्थाओं, गुरुद्वाराें द्वारा ऐसे लोगों को राशन तथा तैयार भोजन उपलब्ध कराया गया था। इस बार संपूर्ण लॉकडाउन नहीं होने के बावजूद भूख की स्थिति पिछली बार से भी विकराल नजर आ रही है। रेडक्रास सोसाइटी ने एक बार फिर सभी संगठनों से आगे आने की अपील की है। रेडक्रास के सदस्यों तथा मददगारों से भी आगे आकर सहयोग करने का आह्वान किया है। रेडक्रॉस द्वारा पूर्व की तरह 10-10 दिन का फूड पैकेट बनाने की तैयारी चल रही है। एक फूड पैकेट की कीमत 350 रुपये होगी, लिहाजा सहयोग राशि इसी हिसाब से निर्धारित की गई है।

नव वर्ष भी रेडक्रॉस ने खूब बांटा था राशन

रेडक्रास सोसाइटी उर्वी सिंहभूम ने गत वर्ष कोरोना के दौरान लॉकडाउन में खूब राशन बांटा था। गरीबों-वंचितों के बीच उनके घर तक जाकर एक-एक सप्ताह का राशन दिया था। पूर्वी सिंहभूम जिला प्रशासन ने रेड क्रॉस को राहत केंद्र के रूप में तब्दील कर दिया था। इसमें जिले भर के दानवीरों व भामाशाहों ने जी भर कर मदद की थी। लॉकडाउन समाप्त होने के बाद तक रेडक्रास ने जरूरतमंदों को राशन दिया था।

Edited By: Rakesh Ranjan