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Tata Steel जमशेदपुर पर कस सकता है शिकंजा! प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को कानूनी नोटिस, सीटीओ रद करने की उठी मांग

Published: Sun, 04 Oct 2026 07:09 PM (IST)

टाटा स्टील जमशेदपुर प्लांट में पर्यावरणीय स्वीकृति की शर्तों के उल्लंघन को लेकर झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को कानूनी नोटिस भेजा गया है।

शहर में धूल नियंत्रण के लिए कंवेयर और मैकेनाइज्ड वैक्यूम क्लीनिंग जैसे उपाय सही ढंग से नहीं अपनाए जा रहे हैं।

शहर में धूल नियंत्रण के लिए कंवेयर और मैकेनाइज्ड वैक्यूम क्लीनिंग जैसे उपाय सही ढंग से नहीं अपनाए जा रहे हैं।

HighLights

  1. जेएसपीसीबी को टाटा स्टील जमशेदपुर के खिलाफ कानूनी नोटिस भेजा गया।

  2. पर्यावरणीय स्वीकृति और कंसेंट टू ऑपरेट शर्तों के उल्लंघन का आरोप।

  3. सीटीओ तत्काल रद्द करने और भविष्य में नवीनीकरण पर रोक की मांग।

जासं, जमशेदपुर। टाटा स्टील के जमशेदपुर प्लांट में पर्यावरणीय स्वीकृति, एनओसी और कंसेंट टू ऑपरेट (सीटीओ) की शर्तों के उल्लंघन को लेकर झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (जेएसपीसीबी) को कानूनी नोटिस भेजा गया है। 
 
जमशेदपुर निवासी रेयाज शरीफ की ओर से अधिवक्ता एके श्रीवास्तव ने तीन अक्टूबर को यह नोटिस जारी किया। इसमें टाटा स्टील के सीटीओ को तत्काल प्रभाव से रद करने और दिसंबर 2026 के बाद इसके नवीनीकरण पर पूर्ण रोक लगाने की मांग की गई है। 
 
नोटिस में चेतावनी दी गई है कि यदि 15 दिनों के भीतर इस पर कार्रवाई शुरू नहीं हुई, तो झारखंड हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका (PIL) दायर की जाएगी।
 
कानूनी नोटिस में आरोप लगाया गया है कि 17 दिसंबर 2021 को जारी किए गए सीटीओ में पूर्व की अनिवार्य शर्तों, विशेषकर पुनर्वास से जुड़ी शर्तों को अनुचित तरीके से हटा दिया गया। 
 
साथ ही, 2012 से 2026 के बीच गैर-अनुपालन के बावजूद सीटीओ का नवीनीकरण किया जाता रहा। नोटिस में एक अप्रैल 2008 की एनओसी और 24 मई 2012 के सीटीओ का हवाला देते हुए कहा गया है कि प्रभावित क्षेत्रों के पुनर्वास की प्रगति रिपोर्ट हर तीन महीने में बोर्ड को सौंपना जरूरी था। 
 
समय पर पुनर्वास न होने या शैक्षणिक संस्थानों व मानव बस्तियों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की स्थिति में सहमति रद करने का स्पष्ट प्रावधान था।
 
प्रदूषण नियंत्रण और यातायात व्यवस्था का मुद्दा उठाते हुए नोटिस में बताया गया कि प्लांट को 24 घंटे एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग, उत्सर्जन नियंत्रण उपकरण चालू रखने, अधिकतम सामग्री की ढुलाई रेलवे वैगनों से करने और ट्रैफिक डी-कंजेशन प्लान लागू करने की शर्तें दी गई थीं।
 
आरोप है कि शहर में धूल नियंत्रण के लिए Conveyor और मैकेनाइज्ड वैक्यूम क्लीनिंग जैसे उपाय सही ढंग से नहीं अपनाए जा रहे हैं।
 
बारी मैदान, आसपास के शैक्षणिक संस्थानों और श्रमिक कॉलोनियों का उल्लेख करते हुए नोटिस में दावा किया गया है कि कार्य सीमा विस्तार में नो एडिशनल लैंड रिक्वायरमेंट (अतिरिक्त भूमि की आवश्यकता नहीं) की शर्त का सीधा उल्लंघन हुआ। 
 
इसके अलावा, जनसुनवाई और प्रभावित नागरिकों से आपत्तियां आमंत्रित किए बिना प्रक्रिया पूरी की गई। करीब 14 वर्षों बाद भी संबंधित क्षेत्रों का पूर्ण पुनर्वास नहीं हो सका है। 
 
नोटिस में कहा गया है कि क्षेत्र में पीएम10 का स्तर 218 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर तक पहुंच गया है, जो निर्धारित मानक (100 माइक्रोग्राम) से दोगुने से भी अधिक है।
 
नोटिस के माध्यम से जेएसपीसीबी से पुनर्वास की शर्तों को सख्ती से लागू कराने, अधिग्रहित 200 एकड़ से अधिक भूमि बहाल करने, वायु व ध्वनि प्रदूषण पर प्रभावी रोक लगाने तथा टाटा स्टील की रिपोर्ट केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय को भेजने का आग्रह किया गया है।