जमशेदपुर, जासं। शारदीया नवरात्र के समापन के साथ ही बंगाली, मिथिला और तेलुगु समाज के लोग मां लक्ष्मी की पूजा की तैयारी में जुट गए हैं। जमशेदपुर शहर में बंगाली समाज के लोग मां कोजागरी लक्खी, मिथिला समाज के लोग कोजागरा लक्ष्मी और तेलुगु समाज के लोग गौरी के रूप में मां लक्ष्मी की पूजा करते हैं। शरद पूर्णिमा के दिन 13 अक्टूबर को पारंपरिक रीति-रिवाज के साथ मां लक्ष्मी की पूजा की जाएगी। मौके पर श्रद्धालु रात जागकर मां लक्ष्मी की आराधना करेंगे। पूजा को लेकर बाजार में चहल-पहल बढ़ गई है। पूजा और प्रसाद सामग्री के साथ माता लक्ष्मी की प्रतिमाएं भी सज गई हैं। इन प्रतिमाओं की कीमत साइज व सजावट के अनुसार 50 से लेकर 5000 रुपये के बीच है।

मां लक्खी के पांव बना कर षोड़शोपचार में होगी पूजा

शरद पूर्णिमा के दिन सभी बंगाली समुदाय के घरों और मंदिरों में मां कोजागरी लक्खी पूजा होगी। दिन में ही साफ-सफाई कर पूरे घर में मां लक्खी के पैर अंकित किए जाएंगे। पूजा स्थल में अल्पना बनाई जाएगी और मां लक्खी की प्रतिमा या पट स्थापित की जाएगी। षोड़शोपचार में मां की पूजा होगी। इस अवसर पर पूजा स्थल पर धान की बाली रखा जाता है। देवी को नारियल का लड्डू, तिल का लड्डू, अन्न, सब्जी, भुजिया, चटनी, खीर, मिठाई, फल आदि का भोग लगाया जाएगा। पंडितों के मंत्रोच्चारण के बाद महिलाएं कथा सुनेंगी। पूजा के बाद प्रसाद वितरण किया जाएगा।

यह है गौरी युवजन सभा का कार्यक्रम

  • 13 अक्टूबर : गणपति पूजा के साथ होगी कार्यक्रम की शुरुआत। प्राणप्रतिष्ठा होगी। शाम को शिव-पार्वती का कल्याणम होगा।
  • 14 अक्टूबर : गणपति होमम से होगी कार्यक्रम की शुरुआत। चंडी पाठ होगा। शाम को शिव गौरी सहस्त्रनामा।
  • 15 अक्टूबर : नवग्रह अर्चना के साथ पूजा की शुरुआत होगी। शाम शिव सहस्त्रनामा का पाठ के साथ कुमकुम पूजा होगी।
  • 16 अक्टूबर : गौरी परमेश्वरलु अर्चना के साथ धार्मिक कार्यक्रम की शुरुआत होगी।

कोजागरा पूजा में कौड़ी खेलने की भी परंपरा

मिथिलांचल के लोग शरद पूर्णिमा के दिन कोजागरा पूजा करेंगे। श्रद्धालु दिन भर उपवास पर रहेंगे। शाम को सुहागिनें नई कपड़ा पहनकर मां लक्ष्मी की पूजा करेंगे। मखाना, मिस्नी, पान का नैवेद्य चढ़ाया जाएगा। व्रती की मायके से नई साड़ी, मखाना, मिस्नी, छाता, जूता, आभूषण आदि पहुंचना शुरू हो गया है। नवविवाहितों के घर तो पहली बार यह त्योहार विशेष धूमधाम से मनाया जाता है। नवदंपती का जीवन सुखमय हो और मां लक्ष्मी की कृपा उनपर बनी रहे। उनका घर धन-धान्य परिपूर्ण रहे, इसी कामना के साथ लोग कोजागरा का त्योहार मनाते हैं। इस अवसर पर कौड़ी खेलने की भी परंपरा है। बिष्टुपुर परमहंस लक्ष्मीनाथ गोस्वामी मंदिर में कोजागरा पूजा के मौके पर कार्यक्रम आयोजित की जाती है।

तेलुगु समाज गौरी पूजा पर करेगा शिव-पार्वती का कल्याणम

शहर में रह रहे तेलुगु समाज के गंवारा जाति के सदस्य लखी पूजा के दिन गौरी पूजा करते हैं। घर एवं सामूहिक रूप से भी इसका आयोजन पूरे विधि-विधान से होता है। नव दंपत्ति अगर है तो इन्हें इसकी जिम्मेदारी भी सौंपी जाती है। इसकी जानकारी देते हुए पंडित उमा महेश्वर शर्मा ने बताया कि शरद पूर्णिमा के दिन गौरी पूजा की जाती है। इसमें शिव-पार्वती (गौरी) का कल्याणम होगा। कीताडीह में गौरी युवजन सभा द्वारा सामूहिक रूप से आयोजन होगा।

 

Posted By: Rakesh Ranjan

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