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IIT में एक भी महिला निदेशक नहीं और सुप्रीम कोर्ट में महिला CJI का न होना चिंताजनक: प्रो. पंकज मित्तल ने उठाए तीखे सवाल

By Ch Rao Edited By: Sanjeev Kumar
Published: Wed, 09 Sep 2026 11:25 PM (IST)

प्रो. पंकज मित्तल ने आईआईटी और विश्वविद्यालयों में महिला नेतृत्व की कमी पर चिंता व्यक्त की, इसे दूर करने के लिए महिलाओं को अपनी सोच बदलने की आवश्यकता बताई।

एनआईटी जमशेदपुर में आयोजित राष्ट्रीय महिला नेतृत्व सम्मेलन में शिक्षाविदों ने महिलाओं को उच्च पदों तक पहुंचाने और सशक्त बनाने पर जोर दिया।

एनआईटी जमशेदपुर में आयोजित राष्ट्रीय महिला नेतृत्व सम्मेलन में शिक्षाविदों ने महिलाओं को उच्च पदों तक पहुंचाने और सशक्त बनाने पर जोर दिया।

HighLights

  1. आईआईटी और विश्वविद्यालयों में महिला नेतृत्व की कमी पर चिंता व्यक्त की गई।

  2. प्रो. पंकज मित्तल ने महिलाओं को स्वयं पहल करने पर जोर दिया।

  3. एनआईटी जमशेदपुर में दो दिवसीय राष्ट्रीय महिला नेतृत्व सम्मेलन आयोजित हुआ।

जासं, जमशेदपुर। देश के शीर्ष संस्थानों में महिला नेतृत्व की कमी एक गंभीर चिंता का विषय है। भारत के किसी भी आईआईटी (IIT) में आज तक महिला निदेशक नहीं बन पाना और विश्वविद्यालयों में महिला कुलपतियों (VC) की संख्या महज 10 से 11 प्रतिशत होना यह दर्शाता है कि महिलाओं को उच्च पदों तक पहुंचने के लिए अभी भी लंबा सफर तय करना है। 
 
इसके लिए महिलाओं को स्वयं अपनी सोच, दृष्टिकोण और एटीट्यूड में बदलाव लाना होगा। यह बातें शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास की राष्ट्रीय अध्यक्ष सह भारतीय विश्वविद्यालय संघ की राष्ट्रीय महासचिव प्रो. पंकज मित्तल ने बुधवार को एनआईटी जमशेदपुर में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय महिला नेतृत्व सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में कहीं।
 

एनआईटी जमशेदपुर में दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का आगाज

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एनआईटी जमशेदपुर में महिला शिक्षा और संस्कार: परंपरा, परिवर्तन और भविष्य-दृष्टि विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय महिला नेतृत्व सम्मेलन का भव्य शुभारंभ हुआ। 
 
इस सम्मेलन में देश के 13 राज्यों से आई लगभग 150 महिला शिक्षाविदों, विशेषज्ञों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने हिस्सा लिया। अध्यक्षीय संबोधन में प्रो. पंकज मित्तल ने कहा कि सहायक प्राध्यापक (Assistant Professor) के पद पर महिलाओं की नियुक्ति तो हो रही है।
 
लेकिन आगे नेतृत्वकारी भूमिकाओं तक पहुंचने के लिए उन्हें स्वयं पहल करनी होगी। उन्होंने भारत की तारीफ करते हुए कहा कि यहां पुरुषों और महिलाओं को समान वेतन मिलता है।
 
जबकि अमेरिका जैसे विकसित देश के शैक्षणिक संस्थानों में आज भी महिलाओं को पुरुषों की तुलना में कम वेतन दिया जाता है।
 

शिक्षा और तकनीकी ज्ञान से ही सशक्त होंगी महिलाएं: प्रो. सूत्रधार

एनआईटी जमशेदपुर के निदेशक प्रो. (डॉ.) गौतम सूत्रधार ने कहा कि विकसित और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में नारियों का योगदान सर्वोपरि है। उन्होंने कहा:

  •     महिलाओं को समान अवसर के साथ-साथ तकनीकी ज्ञान और नेतृत्व के मंच उपलब्ध कराना अनिवार्य है।
  •     भारतीय परंपरा में महिलाओं को सदैव उच्च स्थान मिला है, जिसे अब आधुनिक विज्ञान, तकनीक और कौशल विकास से जोड़ने की आवश्यकता है।
  •     नेतृत्व केवल पद पाना नहीं, बल्कि जिम्मेदारी संभालना, सही निर्णय लेना और सकारात्मक सामाजिक बदलाव लाना है।


संस्कार का अर्थ महिलाओं पर पाबंदी लगाना नहीं

सम्मेलन को संबोधित करते हुए जेमीपाल (Jemipal) की एमडी स्वास्तिका बसु ने कहा कि संस्कार का अर्थ महिलाओं की स्वतंत्रता पर अंकुश लगाना नहीं, बल्कि उनके व्यक्तित्व को निखारना है। 
 
भारत में प्राचीन काल से ही नारी को ज्ञान, शक्ति और समृद्धि का प्रतीक माना गया है। जब एक महिला शिक्षित होती है, तो पूरा परिवार और समाज शिक्षित होता है।
 

पहले दिन दो तकनीकी सत्रों में हुआ मंथन

सम्मेलन के प्रथम दिन दो महत्वपूर्ण तकनीकी सत्र आयोजित किए गए। प्रथम सत्र 21वीं सदी की महिला शिक्षा: संस्कार, मूल्य और सामाजिक परिवर्तन विषय पर केंद्रित रहा, जिसमें मूल्य आधारित शिक्षा पर जोर दिया गया।

द्वितीय सत्र में महिला शिक्षा: परंपरा, आधुनिकता और पाठ्यक्रम की भारतीय दृष्टि" विषय पर आयोजित हुआ, जिसमें भारतीय ज्ञान-परंपरा और आधुनिक पाठ्यक्रम के समन्वय पर चर्चा हुई।

कार्यक्रम में सम्मेलन की संयोजक एवं कोल्हान विश्वविद्यालय की पूर्व कुलपति डॉ. शुक्ला मोहंती, शोभा पाठक, डॉ. मौसमी पाल, डॉ. कविता परमार, प्रो. सरोज कुमार सारंगी, डॉ. रणजीत प्रसाद, डॉ. अमर कुमारसमेत कई गणमान्य अतिथि उपस्थित थे।