जमशेदपुर (वीरेंद्र ओझा)।  लॉकडाउन में भी सियासी हलचल जारी है। भविष्‍य की राजनीति को ध्‍यान में रखते हुए गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। एक ओर कुणाल षाडंगी जहां विधानसभा क्षेत्र को छोड़कर पूरे लोकसभा क्षेत्र में गतिविधियां संचालित कर एक संकेत दे रहे हैं । पश्चिमी सिंहभूम व सरायकेला में भी सियासी गतिविधियां संचालित हो रही हैं।

विधानसभा से लोकसभा पहुंच गए कुणाल

झारखंड विधानसभा चुनाव के संक्रमण काल में झामुमो छोड़कर भाजपा में शामिल हुए बहरागोड़ा के पूर्व विधायक कुणाल षाड़ंगी को राजनीति विरासत में मिली है, लेकिन वह अपनी काबिलियत से यह ठप्पा मिटाने में सफल भी साबित हुए हैं। कुणाल षाड़ंगी ने विरासत का चोला पूरी तरह तो नहीं उतारा है, लेकिन नई जमीन तैयार करने बहरागोड़ा विधानसभा से निकलकर जमशेदपुर लोकसभा क्षेत्र में जरूर पहुंच गए हैं। चुनाव के करीब चार माह तक अज्ञातवास में रहने के बाद जर्सी पहनकर मैदान में जो उतरे तो पूरे लोकसभा में मैराथन दौड़ लगा रहे हैं। कोरोना में राशन, मास्क, गमछा, सैनिटाइजर व डिस्पेंसर से पीपीई किट तक का ढेर लगा दिया। फ्लाइट से मजदूरों को लाने में तो सत्ता को भी पीछे छोड़ दिया। कुणाल की सक्रियता देखकर अब लोगों को भ्रम होने लगा है कि कहीं ये जमशेदपुर के सांसद तो नहीं बन गए। हालांकि ऐसा बिल्कुल भी नहीं है। 

कश्मीर हमारा है, नारा क्यों लगा

 भाजपाइयों का बहुत पुराना नारा था, जहां हुए बलिदान मुखर्जी, वह कश्मीर हमारा है...। दुख की बात है कि यह नारा इस बार भी जमशेदपुर के भाजपाइयों ने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की जयंती पर लगाया। इस पर किसी ने पूछ दिया कि अब जब पाकिस्तान को शक नहीं रह गया, तो तुम्हें क्यों है कि कश्मीर हमारा नहीं है। बेचारा वह कार्यकर्ता झेंप गया। मन ही मन कान पकड़ा कि अब दोबारा यह नारा नहीं लगाएगा। कुछ ही देर बाद उसने पता नहीं क्या सोचा और अपनी बेइज्जती का बदला लेने के लिए पूछ दिया कि अब इनकी जयंती पर कौन सा नारा लगाएं, तुम्ही बता दो। वह भी हाजिरजवाब था, बोलो पीओके भी हमारा है। तीसरे ने कहा, लेकिन वहां कौन बलिदान हुआ था, यह भी बता दो। दूसरा बोला, चलो कोई नारा मत लगाना, लेकिन दोबारा यह नारा मत लगाना ...वह कश्मीर हमारा है। समझे कि नहीं। 

 भाजपाई नक्शे में रह गया खरसावां

पश्चिमी सिंहभूम जिले से काटकर सरायकेला-खरसावां जिला बनाया गया था, ताकि इस क्षेत्र का विकास किया जा सके। सरकार ने तो अपना काम कर दिया, लेकिन भाजपा इससे अलग विचार रखती है। उसके नक्शे में सरायकेला नहीं है। वह सिर्फ खरसावां को जानती है। यदि ऐसा नहीं होता तो भाजपा पिछले 13-14 साल से जिलाध्यक्ष खरसावां से ही क्यों बनाती। आदित्यपुर, गम्हरिया, कांड्रा के बाद सरायकेला भी पड़ता है। ये सभी ऐतिहासिक महत्व के स्थल हैं। यहां कम से कम खरसावां से तो ज्यादा आबादी है, फिर सरायकेला की उपेक्षा क्यों। यह सवाल भाजपाई ही कर रहे हैं। आखिर क्या वजह है कि रामनाथ महतो, गोमिया सोय, उदय सिंहदेव के बाद विजय महतो का नाम ही क्यों आया। इससे पहले आदित्यपुर के शैलेंद्र सिंह अध्यक्ष थे। इन्हें इस बार सिमडेगा का रास्ता दिखा दिया गया है, लेकिन जाने से पहले इन्होंने विजय से अपने घर के पास पौधा लगवा लिया। 

गीता का मंत्रिमंडल कर देगा बेहोश

 पश्चिमी  सिंहभूम  की सांसद गीता कोड़ा भले ही मंत्री नहीं हैं, लेकिन उन्होंने अपना खुद का मंत्रिमंडल बना लिया है। वह भी ऐसा कि देखकर आप अपना होश भी खो सकते हैं। एक सांसद प्रतिनिधि बनाने की जगह उन्होंने अलग-अलग विभाग के प्रभारी मंत्री बना दिए। प्रस्तुत है स्थानाभाव में कुछ मंत्री के विभाग। छोटेराय किस्कू (पथ निर्माण व आबकारी), मुन्ना शर्मा (शहरी विकास व विधि), राज बागची (गृह,कारा, आपदा प्रबंधन व सूचना-जनसंपर्क), जगदीश नारायण चौबे (परिवहन), देबु चटर्जी (कार्मिक, प्रशासनिक सुधार, राजभाषा, स्कूली शिक्षा व साक्षरता), लालबाबू सरदार (श्रम, रोजगार व प्रशिक्षण), बेबी ङ्क्षसह (योजना, वित्त, वाणिज्य कर), बुधराम बेसरा (ग्रामीण विकास, पर्यटन, कला-संस्कृति, खेलकूद, युवा मामले), अनामिका सरकार (महिला, बाल विकास व समाज कल्याण), लालटू महतो (उद्योग व भवन निर्माण), बिशु हेम्ब्रम (पंचायतीराज व जल संसाधन), मो. शहजाद (ऊर्जा), रुईदास चाकी (खाद्य, सार्वजनिक वितरण व उपभोक्ता मामले) और हिमांशु झा मोनू पेयजल व स्वच्छता विभाग का काम देखेंगे। 

Posted By: Vikas Srivastava

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