चाईबासा कोषागार में फंसे Kolhan University के ₹75 करोड़, बंदगांव, जुगसलाई व चाकुलिया डिग्री कॉलेज का निर्माण अटका
कोल्हान विश्वविद्यालय के ₹75 करोड़ छह माह से चाईबासा कोषागार में फंसे हैं, जिससे नए डिग्री कॉलेजों और को-ऑपरेटिव लॉ कॉलेज का निर्माण रुका हुआ है।

राशि हस्तांतरण की प्रक्रिया पूरी करने के लिए अब तक करीब पांच बार विपत्र (बिल) चाईबासा कोषागार भेजे जा चुके हैं।
HighLights
कोल्हान विश्वविद्यालय के 75 करोड़ चाईबासा कोषागार में फंसे।
बंदगांव, जुगसलाई, चाकुलिया डिग्री कॉलेजों का निर्माण कार्य रुका।
तकनीकी आपत्तियों के चलते राशि हस्तांतरण में लगातार देरी।
जागरण संवाददाता, जमशेदपुर। कोल्हान विश्वविद्यालय (केयू) के अंतर्गत नए डिग्री कॉलेजों और को-ऑपरेटिव लॉ कॉलेज के भवन निर्माण के लिए स्वीकृत करीब 75 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि पिछले छह महीनों से चाईबासा कोषागार (ट्रेजरी) में अटकी पड़ी है।
कोषागार से यह राशि भवन निर्माण विभाग को हस्तांतरित नहीं हो पा रही है, जिससे संबंधित कॉलेजों के आधारभूत ढांचे और भवन निर्माण कार्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। विश्वविद्यालय प्रशासन राशि निकासी की बाधाएं दूर करने के लिए लगातार कोषागार के चक्कर काट रहा है।
विश्वविद्यालय से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, राज्य सरकार द्वारा बंदगांव डिग्री कॉलेज के लिए ₹25 करोड़, को-ऑपरेटिव लॉ कॉलेज के नए भवन के लिए ₹20 करोड़, चाकुलिया डिग्री कॉलेज के लिए ₹20 करोड़ और जुगसलाई डिग्री कॉलेज के निर्माण के लिए ₹10 करोड़ की राशि आवंटित की गई है।
इस कुल 75 करोड़ रुपये का हस्तांतरण भवन निर्माण विभाग को किया जाना है ताकि निर्माण कार्य समयबद्ध तरीके से आगे बढ़ सके।
विश्वविद्यालय के कॉलेज विकास परिषद के निदेशक (सीसीडीसी) डॉ. अरविंद कुमार सिंह ने बताया कि वर्ष 2026 में इन कॉलेजों के लिए बजट स्वीकृत हुआ था।
राशि हस्तांतरण की प्रक्रिया पूरी करने के लिए अब तक करीब पांच बार विपत्र (बिल) चाईबासा कोषागार भेजे जा चुके हैं, लेकिन हर बार किसी न किसी बिंदु पर तकनीकी आपत्ति लगाकर विपत्र लौटा दिए जाते हैं।
विश्वविद्यालय द्वारा कोषागार के सभी सवालों के संतोषजनक जवाब दिए जाने के बावजूद राशि का ट्रांसफर अधर में लटका है।
सीसीडीसी ने बताया कि कुलपति के योगदान के बाद अन्य कई कॉलेजों की निर्माण राशि हस्तांतरित की जा चुकी है, लेकिन इन चार प्रमुख संस्थानों की फाइल अटकी हुई है।
राशि जारी न होने से संवेदक और निर्माण एजेंसियां कार्य प्रभावित होने की बात कहकर विश्वविद्यालय प्रशासन पर लगातार दबाव बना रही हैं।
एक तरफ जहां चार कॉलेजों का निर्माण अटका है, वहीं दूसरी ओर मंझगांव और जगन्नाथपुर डिग्री कॉलेज के नवनिर्मित भवन पूरी तरह बनकर तैयार हो चुके हैं और उन्हें विश्वविद्यालय को हैंडओवर कर दिया गया है।
इन भवनों के मिलने से सुदूरवर्ती ग्रामीण क्षेत्रों के छात्र-छात्राओं को अपने ही इलाके में गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिलेगा।
