कुड़मी समाज को साधने की कवायद: बंगाल में भाषा का ऐलान, झारखंड में सत्तारूढ़ दलों की बढ़ी चुनौती
पश्चिम बंगाल के पुरुलिया में आयोजित करम महोत्सव में शुभेंदु अधिकारी ने कुड़मी समाज के लिए भाषा को संवैधानिक दर्जा और यूसीसी से बाहर रखने जैसी बड़ी घोषणाएं कीं।

करम महोत्सव के मंच पर शुभेंदु अधिकारी के साथ जमशेदपुर के भाजपा सांसद विद्युत वरण महतो और आजसू पार्टी के अध्यक्ष व पूर्व उप मुख्यमंत्री सुदेश महतो।
HighLights
शुभेंदु अधिकारी ने कुड़माली, राजबंशी भाषा को संवैधानिक दर्जा दिलाने का वादा किया।
कुड़मी समाज को समान नागरिक संहिता (UCC) से बाहर रखने का आश्वासन दिया।
आंदोलन के दौरान दर्ज मुकदमों की समीक्षा के लिए 30 सितंबर को बैठक बुलाई गई।
दिलीप कुमार, पुरुलिया। पश्चिम बंगाल के पुरुलिया जिले के कोड़ाडीह में रविवार को आयोजित करम महोत्सव केवल एक सामाजिक-सांस्कृतिक आयोजन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह एक बड़े राजनीतिक संदेश का मंच बन गया।
आदिवासी कुड़मी समाज के इस विशाल आयोजन में पश्चिम बंगाल के नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी की मौजूदगी और उनके संबोधन में की गई बड़ी घोषणाओं ने बंगाल के साथ-साथ झारखंड की राजनीति में भी सुगबुगाहट तेज कर दी है।
करम महोत्सव के मंच से शुभेंदु अधिकारी ने कुड़मी समाज को ‘करम जोहार’ कहकर अभिवादन किया और पारंपरिक विधि-विधान से करम वृक्ष स्थापित कर पूजा-अर्चना की।
शुभेंदु अधिकारी की प्रमुख घोषणाएं
भाषा को संवैधानिक दर्जा: शुभेंदु अधिकारी ने जानकारी दी कि कुड़माली और राजबंशी भाषा को भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल कराने की दिशा में ठोस पहल की जा रही है।
यूसीसी (UCC) से बाहर रखने का आश्वासन: उन्होंने कुड़मी समाज को समान नागरिक संहिता (UCC) के दायरे से बाहर रखने का बड़ा आश्वासन दिया।
मुकदमों की समीक्षा के लिए बैठक: आंदोलन के दौरान समाज के लोगों पर दर्ज मुकदमों पर आगे की कार्रवाई को लेकर 30 सितंबर को समाज के प्रतिनिधियों के साथ एक विशेष बैठक बुलाई गई है।
कुड़मी समाज का सामाजिक और राजनीतिक विस्तार केवल बंगाल तक सीमित न होकर झारखंड, ओडिशा और अन्य पड़ोसी राज्यों तक फैला हुआ है। ऐसे में पुरुलिया के मंच से उठे इन मुद्दों का सीधा राजनीतिक असर झारखंड की राजनीति में भी महसूस किया जा रहा है।
झारखंड के नेताओं की मौजूदगी ने दिए बड़े संकेत
करम महोत्सव के मंच पर शुभेंदु अधिकारी के साथ जमशेदपुर के भाजपा सांसद विद्युत वरण महतो और आजसू पार्टी के अध्यक्ष व पूर्व उप मुख्यमंत्री सुदेश महतो की सक्रिय मौजूदगी ने इस आयोजन के राजनीतिक निहितार्थ को और स्पष्ट कर दिया।
दोनों ही दिग्गजों का कुड़मी समाज में मजबूत जनाधार और सामाजिक आधार रहा है। झारखंड में कुड़मी समाज की एक बड़ी आबादी है, जहाँ भाषा, संस्कृति, पहचानडिजिटल समाचार: वेबसाइट प्रकाशन के लिए तैयार आलेख
