पुरुलिया में 20 सितंबर को करम महोत्सव: असम और ओडिशा के साथ बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी करेंगे शिरकत
पुरुलिया में 20 सितंबर को होने वाला आदिवासी कुड़मी समाज का करम महोत्सव ऐतिहासिक होगा, जिसमें पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री ...और पढ़ें

पुरुलिया में सैकड़ों नृत्य मंडलियों ने पारंपरिक ढोल-धमाकों के साथ करम नृत्य प्रस्तुत कर पूर्वाभ्यास किया।
HighLights
पश्चिम बंगाल के सीएम सुवेंदु अधिकारी होंगे मुख्य अतिथि।
कुड़मी समाज अपनी मांगों को सरकार तक पहुंचाएगा।
जागरण संवाददाता, पुरुलिया। आदिवासी कुड़मी समाज की ओर से 20 सितंबर को पुरुलिया में आयोजित होने वाला करम महोत्सव ऐतिहासिक बनने जा रहा है।
महोत्सव की तैयारियों को लेकर शनिवार को आयोजित रिहर्सल कार्यक्रम में ही करीब 10 हजार लोगों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। इस दौरान सैकड़ों नृत्य मंडलियों ने पारंपरिक ढोल-धमाकों के साथ करम नृत्य प्रस्तुत कर पूर्वाभ्यास किया।
कार्यक्रम में समाज के मूलखूंटी मूल मानता अजीत प्रसाद महतो, जयपुर के विधायक विश्वजीत महतो समेत समाज के कई प्रमुख पदाधिकारी मौजूद रहे।
कई राज्यों के मुख्यमंत्री होंगे शामिल
दैनिक जागरण से बातचीत में समाज के मूल मानता अजीत प्रसाद महतो ने बताया कि महोत्सव में बतौर मुख्य अतिथि पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी शामिल होंगे।
उनके माध्यम से ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी और असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा को भी आमंत्रित किया गया है, हालांकि उनकी उपस्थिति की आधिकारिक पुष्टि होना अभी बाकी है।
इनके अलावा विभिन्न राज्यों के प्रमुख सामाजिक प्रतिनिधि और नेता भी शिरकत करेंगे। रिहर्सल के साथ आयोजित बैठक में 20 सितंबर के मुख्य कार्यक्रम की व्यवस्थाओं पर विस्तार से चर्चा की गई:
- यातायात व पार्किंग: विभिन्न राज्यों से आने वाले श्रद्धालुओं के वाहनों के लिए पार्किंग और आवागमन की विशेष रूपरेखा बनाई गई है।
- बुनियादी सुविधाएं: पेयजल, अस्थायी शौचालय और भोजन की समुचित व्यवस्था तय की गई है।
- दिशा-सूचक बोर्ड: आगंतुकों की आसानी के लिए जगह-जगह दिशा-सूचक बोर्ड (साइनबोर्ड) लगाए जाएंगे।
- प्रशासनिक सहयोग: सुरक्षा और व्यवस्था बनाए रखने के लिए स्थानीय प्रशासन के स्तर पर भी तैयारियां शुरू कर दी गई हैं।
अपनी मांगें सरकार तक पहुंचाएगा कुड़मी समाज
अजीत प्रसाद महतो ने स्पष्ट किया कि करम महोत्सव केवल एक सांस्कृतिक आयोजन नहीं है, बल्कि यह कुड़मी समाज की एकजुटता और सामाजिक ताकत का प्रदर्शन होगा।
इसके मंच से समाज की पारंपरिक संस्कृति की रक्षा के साथ-साथ उनके सामाजिक अधिकारों और प्रमुख मांगों को सीधे सरकार के समक्ष मजबूती से उठाया जाएगा।
