जागरण संवाददाता, जमशेदपुर :

अब तक गांधीजी का नाम लेने पर दिल्ली के राजघाट व बिड़ला मंदिर, वर्धा आश्रम का ख्याल सबसे पहले आता है। बिहार का नाम एकबारगी नहीं आता, जबकि गांधीजी ने अंग्रेजों के खिलाफ देश भर में जो आंदोलन खड़ा किया उसकी शुरुआत बिहार से ही हुई थी। इतिहास के पन्नों में दर्ज इसी गाथा को गायिका कल्पना पटवारी ने संगीत के माध्यम से सजाया है, ताकि नई पीढ़ी के साथ-साथ देश-दुनिया के लोग गांधी को बिहार के साथ जोड़कर देख सकें।

दैनिक जागरण के कार्यक्रम 'सुरमयी शाम' में शामिल होने के दूसरे दिन सोमवार को कल्पना ने पत्रकारों से चंपारण सत्याग्रह पर अपनी रचना साझा की। साकची स्थित होटल जेके रेसीडेंसी में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में कल्पना ने बताया कि उन्होंने पहली बार इसी डाक्यूमेंट्री से म्यूजिक कंपोजिंग में कदम रखा है। उनकी जानकारी के मुताबिक महात्मा गांधी वर्ष 1915 में अफ्रीका से भारत लौटे थे। पहले उन्होंने एक साल तक रेल से पूरे भारत का भ्रमण किया, फिर लखनऊ में हुए कांग्रेस अधिवेशन के दौरान उन्हें चंपारण में नील की खेती करने वाले किसानों की जानकारी मिली। अंग्रेज एक बीघा जमीन में कम से कम तीन कट्ठा में जबरन नील की खेती कराते थे।

1917 में गांधीजी चंपारण आए, जिसमें उन्होंने सबसे पहले किसानों के मन से अंग्रेजों का भय दूर करना शुरू किया। लोग कहते हैं कि उन्होंने भितिहरवा आश्रम भी खुद बनाया था, जहां आज भी उनकी वस्तुएं सुरक्षित हैं। नील सत्याग्रह या चंपारण सत्याग्रह में जीत के बाद गांधीजी की ख्याति पूरे देश में फैली। उन्होंने आश्रम के पास कस्तूरबा स्कूल भी खोला था, जो आज जर्जर अवस्था में है। कल्पना बताती हैं कि वैसे तो पूरे वर्ष चंपारण सत्याग्रह की शताब्दी स्मृति मनाई जाएगी, लेकिन 14 अप्रैल 2017 को बिहार सरकार व केंद्र सरकार की ओर से भितिहरवा में वृहद कार्यक्रम होगा, जिसमें अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा व तिब्बती धर्मगुरु दलाई लामा समेत कई हस्तियां आएंगी। वह खुद वहां रहें या नहीं, उनकी यह कृति अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बिहार के प्रति नजरिया बदलेगी। दरअसल यह संगीत के माध्यम से सत्याग्रह आंदोलन है।

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राजनीति में आने की इच्छा

भोजपुरी गायक-अभिनेता मनोज तिवारी की तरह कल्पना पटवारी भी राजनीति में आना चाहती हैं, लेकिन अभी कुछ तय नहीं है। कल्पना कहती हैं कि वह राजनीति में आएंगी, तो इसी मकसद से कि भोजपुरी की कुछ सेवा कर सकें। वह कहती हैं कि मनोज तिवारी राजनीति में अच्छा मुकाम हासिल कर चुके हैं, अब वे इसके माध्यम से बिहार या भोजपुरी को क्या दे पाते हैं, यह महत्वपूर्ण होगा। उनका मानना है कि राजनीति में आने के बाद वह भिखारी ठाकुर, बिहार और भोजपुरी पर काफी काम करना चाहती हैं।

Posted By: Jagran