पहली सैलरी का था इंतजार और छिन गई नौकरी!JSSC CGL रद होने से घाटशिला अनुमंडल के दो दर्जन कर्मियों की सेवा पर खतरा
झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) द्वारा आयोजित सीजीएल परीक्षा रद्द होने से राज्य में 2000 से अधिक सरकारी सेवकों की नौकरी पर संकट आ गया है।

घाटशिला अनुमंडल के दो दर्जन अधिकारी, जिन्हें पहली सैलरी भी नहीं मिली थी, अब आगे की रणनीति के लिए रांची रवाना हो गए हैं।
HighLights
JSSC CGL परीक्षा सरकारी घोषणा के बाद रद्द।
2000 से अधिक चयनित सरकारी सेवकों की नौकरी खतरे में।
घाटशिला अनुमंडल के अधिकारी रणनीति बनाने रांची रवाना।
संसू, चाकुलिया । झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) द्वारा आयोजित सीजीएल (CGL) परीक्षा को रद किए जाने की सरकारी घोषणा के बाद राज्य में स्थिति तनावपूर्ण हो गई है।
रांची के जयपाल सिंह स्टेडियम में बीते 25 जुलाई से चल रहे छात्रों के उग्र आंदोलन के बाद सोमवार रात सरकार ने परीक्षा रद्द करने का निर्णय लिया।
इस घोषणा से जहां आंदोलनरत छात्रों ने जश्न मनाना शुरू कर दिया है, वहीं दूसरी ओर CGL परीक्षा के जरिए चयनित होकर विभिन्न सरकारी विभागों में योगदान दे चुके 2000 से अधिक सरकारी सेवकों के चेहरों पर मायूसी छा गई है।
घाटशिला अनुमंडल के दो दर्जन अधिकारी प्रभावित
उल्लेखनीय है कि सीजीएल परीक्षा के माध्यम से चाकुलिया प्रखंड समेत पूरे घाटशिला अनुमंडल में लगभग दो दर्जन अधिकारियों की नियुक्ति कुछ महीने पहले ही हुई थी।
इनमें घाटशिला में तीन, चाकुलिया में तीन, बहरागोड़ा में चार, मुसाबनी में चार, डुमरिया में चार तथा गुड़ाबांदा में दो पदस्थापित कर्मी शामिल हैं।
प्रखंड स्तर पर इस परीक्षा के माध्यम से मुख्य रूप से प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी (एमओ), प्रखंड कल्याण पदाधिकारी, श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी तथा अंचल निरीक्षक (सीआई) के पदों पर नियुक्तियां हुई थीं।
चाकुलिया में एमओ के पद पर विनोद कुमार तुबिद, कल्याण पदाधिकारी के रूप में विनय कुमार मेहता तथा श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी के रूप में अजीत तिर्की कार्यरत हैं।
वहीं बहरागोड़ा में एमओ अमृत टोप्पो, प्रखंड कल्याण पदाधिकारी अंकित मिश्रा, श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी अजीत बोदरा तथा अंचल निरीक्षक के तौर पर बाबूराम सामद नियुक्त हुए थे।
सोमवार रात मुख्यमंत्री द्वारा परीक्षा रद करने की घोषणा होते ही इन सभी अधिकारियों पर नौकरी जाने का खतरा मंडराने लगा है।
स्थिति को देखते हुए अनुमंडल के अधिकांश चयनित अभ्यर्थी मंगलवार सुबह ही आगे की रणनीति बनाने रांची के लिए रवाना हो गए।
पहली सैलरी भी नहीं मिली और नौकरी जाने का खतरा
चाकुलिया में एमओ के पद पर पदस्थापित विनोद कुमार तुबिद को अभी पहली सैलरी का इंतजार ही था कि नौकरी जाने का संकट आ गया।
उन्होंने बताया कि सबसे अधिक दुखी वे लोग हैं, जो पहले किसी अन्य सरकारी विभाग में कार्यरत थे और पुरानी नौकरी छोड़कर सीजीएल में योगदान किए थे।
उन्होंने कहा कि सरकार को निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई करनी चाहिए, पूरी परीक्षा रद कर चयनितों को हटाना सही निर्णय नहीं है।
बहरागोड़ा में अंचल निरीक्षक बाबूराम सामद पहले वन विभाग में वनरक्षी थे, जबकि एमओ अमृत टोप्पो कार्य कर रहे हैं। ये सभी अभ्यर्थी अपने अधिकारों की रक्षा के लिए अब राज्यभर के सहयोगियों के साथ रांची में एकजुट हो रहे हैं।
