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झारखंड की नदियों को मिलेगा नया जीवन, संवरेगा उद्गम स्थल; वन विभाग ने शुरू किया बड़ा अभियान

Published: Fri, 12 Jun 2026 01:33 PM (GMT+05:30)

झारखंड वन विभाग ने स्वर्णरेखा और दामोदर जैसी नदियों को प्रदूषण व अतिक्रमण मुक्त करने का अभियान शुरू किया है।

स्वर्णरेखा नदी का विहंगम दृश्य

स्वर्णरेखा नदी का विहंगम दृश्य

HighLights

  1. वन विभाग ने नदियों के उद्गम स्थलों का सर्वे शुरू किया।

  2. अतिक्रमण हटाकर नदियों को प्रदूषण मुक्त किया जाएगा।

  3. भूजल स्तर बढ़ेगा, रिवर फ्रंट इको-जोन बनेगा।

मनोज सिंह, जमशेदपुर। औद्योगिक कचरे और अतिक्रमण के कारण अस्तित्व के संकट से जूझ रही स्वर्णरेखा और दामोदर जैसी झारखंड की प्रमुख नदियों को उनके उद्गम स्थल से ही प्रदूषण मुक्त और अविरल बनाने के लिए वन विभाग ने एक बड़ी पहल की है।

राज्य के प्रधान मुख्य वन संरक्षक (पीसीसीएफ) संजीव कुमार ने सभी वन प्रमंडलों को नदियों के उद्गम और संगम स्थलों का विस्तृत सर्वे कर वहां से अतिक्रमण और गंदगी हटाने का कड़ा निर्देश दिया है। इस व्यापक अभियान का मुख्य उद्देश्य जल संरक्षण को एक जनआंदोलन का रूप देकर नदियों के प्राकृतिक स्वरूप को पुनर्जीवित करना है।

Swarn Rekha NAdi

(जमशेदपुर के दोमुहानी में स्वर्णरेखा व खरकई नदी का मिलन स्थल)

अतिक्रमण हटेगा, स्वच्छ होंगी जलधाराएं

पीसीसीएफ संजीव कुमार ने स्पष्ट किया है कि राज्य के सभी जिला वन प्रमंडल पदाधिकारियों (डीएफओ) को उद्गम स्थलों की वर्तमान स्थिति, प्रदूषण के मुख्य स्रोतों और अतिक्रमण पर जल्द रिपोर्ट सौंपनी होगी। सर्वे पूरा होते ही उद्गम और संगम स्थलों के आसपास से अवैध कब्जे हटाए जाएंगे।

सघन सफाई के जरिये जमा कचरा निकालकर जलधाराओं को स्वच्छ बनाया जाएगा। विभाग इस मुहिम में स्थानीय ग्रामीणों, सामाजिक संगठनों और पर्यावरण प्रेमियों की सीधी भागीदारी सुनिश्चित करेगा, ताकि प्राकृतिक जल स्रोतों की सुरक्षा स्थायी हो सके।

बढ़ेगा भूजल स्तर, बनेगा रिवर फ्रंट इको-जोन

क्षेत्रीय मुख्य वन संरक्षक (आरसीसीएफ) स्मिता पंकज ने इस योजना को जलवायु परिवर्तन और ग्लोबल वार्मिंग का प्रभावी समाधान बताया है। उनके अनुसार, नदियों के स्रोत संवरने से राज्य का भूजल स्तर तेजी से सुधरेगा और पर्यावरणीय संतुलन मजबूत होगा।

उन्होंने सुझाव दिया कि जमशेदपुर में स्वर्णरेखा और खरकई नदी के संगम (दोमुहानी) को अतिक्रमण मुक्त कर एक हरित क्षेत्र के रूप में विकसित किया जा सकता है। यह शहर के लिए एक शानदार रिवर फ्रंट इको-जोन बनेगा, जो तापमान को नियंत्रित करने और प्रदूषण कम करने में मील का पत्थर साबित होगा।

Swarnrekha Nadi

(स्वर्णरेखा नदी का उद्गम स्थल नगड़ी के पास रानी चुआ)

प्राकृतिक प्रवाह से दूर होगा बाढ़ का खतरा

नदियों के किनारे हो रहे अतिक्रमण पर जमशेदपुर के डीएफओ सबा आलम अंसारी ने कहा कि इसके कारण पानी का प्राकृतिक प्रवाह बाधित होता है। बरसात में नदी को फैलने की जगह नहीं मिलने से बाढ़ और कटाव का गंभीर खतरा पैदा होता है।

किनारे बसी अवैध बस्तियों और व्यावसायिक गतिविधियों का सीधा कचरा नदी में गिरता है। अतिक्रमण हटने से न सिर्फ प्रदूषण घटेगा, बल्कि खाली क्षेत्रों से वर्षा जल जमीन में आसानी से रिसेगा। इससे आसपास के इलाकों में जल संकट दूर होगा।

इसके अलावा, जलीय जीवों, वनस्पतियों और पक्षियों को उनका छिन चुका प्राकृतिक आवास वापस मिलेगा। दोमुहानी क्षेत्र में वाक-वे, पार्क और इको-टूरिज्म विकसित होने से पर्यटन के साथ-साथ स्थानीय रोजगार के नए दरवाजे भी खुलेंगे।

झारखंड की प्रमुख नदियां और उनके उद्गम स्थल

नदी का नाम उद्गम स्थल
स्वर्णरेखा नदी नगड़ी (रांची)
दामोदर नदी कामरपाट पहाड़ी
बराकर नदी पदमा क्षेत्र
दक्षिण कोयल नदी नगड़ी क्षेत्र
उत्तर कोयल नदी चैनपुर क्षेत्र
शंख नदी रायडीह (गुमला)
खरकई नदी सिमलीपाल पहाड़ियाँ

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