जमशेदपुर : बिल्डर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया, जमशेदपुर चैप्टर के पूर्व चेयरमैन शिबू बर्मन बताते हैं कि कभी मिट्टी के मोल बालू (Sand) मिलती थी, अब तो सोना हो गई है। ज्यादा नहीं, दस साल पहले तक बिल्डिंग कॉस्ट (Building Cost) में बालू की कीमत (Sand Cost) नहीं जोड़ी जाती थी। इतना समझ जाइए कि मिट्टी से भी बालू सस्ती थी। ढुलाई खर्च में ही मंगा लेते थे। अब तो लागत में रॉड, सीमेंट, ईंट, गिट्टी के साथ बालू का दाम भी जोड़ा जा रहा है। इसके बावजूद घाटा हो रहा है, क्योंकि इसके दाम एकबारगी इतने बढ़ जा रहे हैं कि सोच से परे है।

बालू कारोबारी कन्हैया सिंह कहते हैं कि तीन महीने पहले जब से कंस्ट्रक्शन का काम तेज हुआ है, दाम तीन गुना हो गया है। 700 रुपये ट्रैक्टर बालू अब 210 0 रुपये तक हो गया है। इसकी मुख्य वजह बालू घाटों की नीलामी नहीं होना है। तीन वर्ष पूर्व पर्यावरण अनापत्ति पत्र नहीं मिलने की वजह से नीलामी प्रक्रिया रोक दी गई थी। तब से झारखंड सरकार ने निविदा पर रोक लगा रखी है, जिससे अवैध खनन व उठाव हो रहा है।

रात को कौन कहे, दिन में भी बालू की चोरी हो रही है। जिले में करीब 45 नदी घाट हैं, जिसकी एक से लेकर ढाई करोड़ तक नीलामी होती थी। इससे सरकार को सिर्फ पूर्वी सिंहभूम जिले से न्यूनतम 80 करोड़ रुपये के राजस्व की क्षति हो रही है। इसका नुकसान उन बिल्डरों को उठाना पड़ रहा है, जिन्हाेंने 700 रुपये के हिसाब से भवन निर्माण का ठेका ले लिया था।

बंगाल से भी जमशेदपुर आ रहा बालू

बालू का वैध खनन बंद रहने से जमशेदपुर में मांग की तुलना में आपूर्ति नहीं हो पा रही है। इसकी वजह से बंगाल के पुरुलिया से भी यहां बालू आ रहा है। रांची जिले के तमाड़-बुंडू की ओर से भी शहर में बालू की आपूर्ति की जा रही है। उनका ढुलाई खर्च ज्यादा होने से स्थानीय धंधेबाजों ने भी बालू की कीमत बढ़ा दी है।

पूर्वी सिंहभूम के जिला खनन पदाधिकारी मो. नदीम शफी का कहते हैं, पूर्वी सिंहभूम में 2020 तक 17 बालू घाटों का ठेका था, जबकि इस बार हमने 25 घाटों की नीलामी करने की तैयारी की है। झारखंड राज्य खनिज विकास निगम को प्रस्ताव बनाकर भेज दिया है। वहां से अनुमति मिलने के बाद घाटों की नीलामी कराई जाएगी। पहले 20 लाख से दो करोड़ तक घाटों की नीलामी हुई थी।

Edited By: Jitendra Singh