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Mission Jharkhand: अपने बूते वापसी की तैयारी में जुटी भाजपा, कुड़मी राजनीति से लेकर संगठन तक नया होमवर्क शुरू

By Pradeep SinghEdited By: Sanjeev Kumar
Published: Wed, 16 Sep 2026 02:56 PM (IST)

भाजपा ने झारखंड में सत्ता वापसी के लिए जमीनी होमवर्क और रणनीतिक कवायद तेज कर दी है, जिसमें संगठन, सामाजिक समीकरणों और क्षेत्रवार रणनीति पर जोर दिया जा रहा है।

19 अगस्त को नई दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ झारखंड भाजपा के शीर्ष नेतागण।

19 अगस्त को नई दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ झारखंड भाजपा के शीर्ष नेतागण।

HighLights

  1. अमित शाह के साथ झारखंड भाजपा नेताओं की उच्चस्तरीय बैठक हुई।

  2. कुड़मी समाज के 'करम महोत्सव' से वोट बैंक साधने की कोशिश।

  3. संगठनात्मक पुनर्संरचना और आजसू के साथ संबंधों पर मंथन जारी।

प्रदीप सिंह, जमशेदपुर। झारखंड में आगामी राजनीतिक लड़ाई भले ही दूर हो, लेकिन भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने राज्य में सत्ता वापसी के लिए अभी से जमीनी होमवर्क और रणनीतिक कवायद तेज कर दी है। 
 
पार्टी का मुख्य ध्यान केवल चुनावी गठबंधनों पर निर्भर रहने के बजाय संगठन, सामाजिक समीकरणों और क्षेत्रवार रणनीति के जरिए राज्य में अपनी स्वतंत्र राजनीतिक जमीन को मजबूत करने पर है।
 

केंद्रीय नेतृत्व सक्रिय, अमित शाह के साथ उच्चस्तरीय बैठक

हाल ही में नई दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ झारखंड भाजपा के वरिष्ठ नेताओं की एक महत्वपूर्ण बैठक हुई।
 
इस बैठक में प्रदेश भाजपा के शीर्ष नेताओं के अलावा पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा, रघुवर दास और चंपाई सोरेन शामिल रहे। 
 
बैठक में खनन विधेयक, झामुमो के प्रस्तावित आंदोलनों और राज्य के ज्वलंत राजनीतिक मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई तथा सभी नेताओं को बेहतर समन्वय के साथ काम करने के निर्देश दिए गए।
 

बंगाल का मॉडल और 'करम महोत्सव' के जरिए कुड़मी राजनीति पर साध

भाजपा की इस नई रणनीति में पश्चिम बंगाल के सीमावर्ती क्षेत्रों का अनुभव भी काफी मायने रखता है। पुरुलिया जैसे क्षेत्रों में राजनीतिक गतिविधियों का सीधा असर झारखंड के सामाजिक और राजनीतिक समीकरणों पर पड़ता है।

  •     20 सितंबर का आयोजन: पुरुलिया में कुड़मी समाज द्वारा आयोजित करम महोत्सव में पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी मुख्य अतिथि होंगे। इसके अलावा असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा और ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी को भी आमंत्रित किया गया है।
  •     सामाजिक प्रभाव:कुड़मी समाज झारखंड के कई हिस्सों में बेहद प्रभावशाली है। समाज द्वारा लंबे समय से एसटी (ST) दर्जे और कुड़माली भाषा को 8वीं अनुसूची में शामिल करने की मांग उठाई जा रही है। इस कार्यक्रम के माध्यम से भाजपा कुड़मी वोट बैंक में अपनी पैठ मजबूत करने की कोशिश में है।


संगठनात्मक पुनर्संरचना और आजसू के साथ रिश्तों पर मंथन

भाजपा केंद्रीय नेतृत्व राज्य में ऐसे नेताओं को आगे लाने की तैयारी में है, जिनकी विभिन्न सामाजिक समूहों में मजबूत पकड़ है। राज्यसभा सांसद डॉ. प्रदीप वर्मा को राष्ट्रीय मंत्री की जिम्मेदारी दिया जाना इसी पुनर्संरचना का हिस्सा है। 

दूसरी ओर, भाजपा सहयोगी दलों पर अपनी निर्भरता कम करने के विकल्पों पर भी विचार कर रही है। हालिया चुनावों में आजसू को केवल एक सीट मिली थी। 

 
जिससे सहयोगी पार्टी के साथ भविष्य के संबंधों को लेकर मंथन जारी है। यद्यपि आजसू अध्यक्ष सुदेश महतो ने 11 सितंबर को अमित शाह से मुलाकात कर कुड़मी समुदाय से जुड़े ज्ञापन सौंपे थे।