अगला Unicorn जमशेदपुर से! स्टार्ट-अप 'रिकोक्राफ्ट' को मिली ₹5 लाख की फंडिंग
नवाचार रिसर्च इंक्यूबेशन एंड इनोवेशन काउंसिल (NRIIC) के 'थर्ड वर्ल्ड एंजल नेटवर्क' ने जमशेदपुर के हस्तशिल्प स्टार्ट-अप 'रिकोक्राफ्ट' को ₹5 लाख की पहली एंजेल फंडिंग प्रदान की है।

HighLights
NRIIC ने रिकोक्राफ्ट को ₹5 लाख की पहली एंजेल फंडिंग दी।
रिकोक्राफ्ट जमशेदपुर का हस्तशिल्प स्टार्ट-अप, कारीगरों को आधुनिक बाजार से जोड़ता है।
यह पहल झारखंड के स्टार्ट-अप इकोसिस्टम को मजबूत करने में मील का पत्थर है।
जासं, जमशेदपुर। झारखंड में स्टार्ट-अप और इनोवेशन इकोसिस्टम को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण सफलता दर्ज की गई है।
नवाचार रिसर्च इंक्यूबेशन एंड इनोवेशन काउंसिल (NRIIC) के 'थर्ड वर्ल्ड एंजल नेटवर्क' ने अपने इन्क्यूबेटेड स्टार्ट-अप ‘रिकोक्राफ्ट’ (Ricocraft) को पहली बार 5 लाख रुपये की एंजेल फंडिंग प्रदान की है।
जमशेदपुर के बिरसानगर क्षेत्र में कार्यरत रिकोक्राफ्ट हस्तशिल्प एवं पारंपरिक शिल्प के क्षेत्र में काम कर रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य स्थानीय कारीगरों की कला को आधुनिक बाजार से जोड़ना और उनके लिए स्थायी आजीविका के अवसर पैदा करना है।
रिकोक्राफ्ट के संस्थापक कौशिक चक्रवर्ती छोटे शहरों (टायर-2) से व्यवसाय खड़ा करने की चुनौतियों का सामना करते हुए लगातार आगे बढ़ रहे हैं।
मार्गदर्शन से आगे बढ़कर वित्तीय सहयोग का नया दौर
NRIIC के निदेशक अमर नाथ सिंह ने बताया कि वर्ष 2014 में झारखंड में स्टार्ट-अप और इनोवेशन माहौल बनाने के उद्देश्य से शुरू हुई इस संस्था की यात्रा अब एक नए पड़ाव पर पहुंच चुकी है।
12 वर्षों तक नवोदित उद्यमियों को मार्गदर्शन, मंच और इनक्यूबेशन की सुविधाएं उपलब्ध कराने के बाद, अब संस्था ने चयनित स्टार्ट-अप्स को सीधा वित्तीय सहयोग (फंडिंग) देने की शुरुआत की है।
रिकोक्राफ्ट को मिली 5 लाख रुपये की राशि इसी नई पहल की पहली कड़ी है। इस वर्ष संस्था के पोर्टफोलियो में शामिल अन्य संभावनाशील स्टार्ट-अप्स को भी फंडिंग प्रदान करने का लक्ष्य रखा गया है।
छोटे शहरों से निकलेगा अगला 'यूनिकॉर्न'
अमर नाथ सिंह ने जोर देकर कहा कि टायर-2 और टायर-3 शहरों के स्टार्ट-अप्स को आज भी फंडिंग जुटाने में काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
ऐसे में स्थानीय निवेशकों और एंजेल नेटवर्क का मजबूत होना बेहद जरूरी है। थर्ड वर्ल्ड एंजल नेटवर्क का प्रमुख लक्ष्य संभावनाशील स्टार्ट-अप्स और निवेशकों के बीच एक मजबूत कड़ी बनना है।
उन्होंने स्थानीय निवेशकों से अपील की कि वे स्टार्ट-अप्स को निवेश के एक बेहतरीन विकल्प के रूप में देखें, हालांकि यह एक हाई-रिस्क (उच्च जोखिम) क्षेत्र है जहां रिटर्न अप्रत्याशित हो सकता है।
उन्होंने विश्वास जताया कि भारत का अगला 'यूनिकॉर्न' किसी मेट्रो शहर के बजाय किसी टायर-2 या टायर-3 शहर से भी निकल सकता है।
इसके लिए उद्यमियों को पूंजी, सही मार्गदर्शन, बाजार का एक्सेस और एक मजबूत इकोसिस्टम प्रदान करने की आवश्यकता है।
NRIIC की यह पहल राज्य के स्टार्ट-अप्स को आइडिया से बिजनेस के सफर के बाद अब ‘बिजनेस से स्केल-अप’ की ओर ले जाने में मील का पत्थर साबित होगी।
