स्टील के मलबे से बनेंगे 3D मकान और ई-कचरे से निकलेगा लिथियम और सोना; जमशेदपुर में वैज्ञानिकों ने बताई नई तकनीकी
जमशेदपुर में 'सर्कान-2026' सम्मेलन में वैज्ञानिकों ने स्टील स्लैग और राख से मजबूत मकान व सड़कें बनाने की तकनीकें प्रस्तुत कीं।

एआई द्वारा जेनरेट इमेज।
HighLights
स्टील स्लैग और राख से बनेंगे मजबूत 3D प्रिंटेड मकान।
ई-कचरे से लिथियम, सोना और तांबा निकालने की नई विधि।
स्टार्टअप्स ने औद्योगिक कचरे से बनाए ईंटें और टाइल्स।
जागरण संवाददाता, जमशेदपुर। स्टील कारखानों से निकलने वाले भारी मलबे (स्लैग) और राख से अब मजबूत मकान व सड़कें बनेंगी, जबकि फेंके गए पुराने मोबाइल व बैटरियों से बहुमूल्य लिथियम निकाला जाएगा।
बेल्डीह क्लब में शुक्रवार को संपन्न दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन 'सर्कान-2026' में वैज्ञानिकों ने इन ठोस खोजों का खाका पेश किया।
द इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मेटल्स (आईआईएम), टाटा स्टील और सीएसआईआर-एनएमएल के साझा मंच पर जुटे 200 से अधिक विशेषज्ञों ने कचरे को सीधे उत्पाद में तब्दील करने की नई तकनीकों पर सहमति जताई।
धातु मलबे और राख से तैयार होंगे 3डी प्रिंटेड मकान
वैज्ञानिकों ने अपनी ताजा रिसर्च में साबित किया है कि स्टील बनाते समय निकलने वाले मलबे (स्टील स्लैग) और बिजली घरों की राख (फ्लाई ऐश) को मिलाकर खास निर्माण सामग्री बनाई गई है।

इसका उपयोग अत्याधुनिक '3डी कंक्रीट प्रिंटिंग' तकनीक के जरिए सीधे मजबूत मकान और टिकाऊ सड़कें बनाने में होगा। इससे पारंपरिक गिट्टी और बालू पर निर्भरता घटेगी।
इसके अलावा, वैज्ञानिकों ने खोज की है कि कार्बोनेटेड स्लैग का उपयोग बंजर जमीन को उपजाऊ बनाने और फसलों के लिए पोषक तत्व के रूप में भी सफलतापूर्वक किया जा सकता है।
कबाड़ से निकलेगा लिथियम, सोना और तांबा
सम्मेलन का दूसरा बड़ा आविष्कार शहरी खनन (अर्बन माइनिंग) तकनीक रहा। जमीन खोदकर धातु निकालने के बजाय अब फेंके गए कंप्यूटर, मोबाइल, खराब सोलर पैनल और इलेक्ट्रानिक कचरे से सुरक्षित तरीके से लिथियम, सोना और तांबा अलग किया जाएगा।
इलेक्ट्रिक वाहनों में इस्तेमाल होने वाली लिथियम-आयन बैटरियों को दोबारा नया जैसा बनाने की नई वैज्ञानिक विधि भी पेश की गई।
स्टार्टअप्स ने कबाड़ से बनाए पेवर ब्लॉक और टाइल्स
सालटेक, क्लिमिट्रा, पेविंग प्लस और कार्बन स्ट्रांग जैसे स्टार्टअप्स ने औद्योगिक कचरे से बनी मजबूत ईंटें, टाइल्स और पेवर ब्लॉक प्रदर्शित किए।
ब्रिटेन, नीदरलैंड और इटली के विशेषज्ञों ने माना कि प्रयोगशाला की यह खोजें जल्द ही बाजार में बड़े पैमाने पर निर्माण सामग्री और दुर्लभ धातुओं की किल्लत दूर करेंगी।
