चाकुलिया-बुड़ामारा और बादामपहाड़-केंदुझर परियोजनाओं पर रेलवे ने दी अपडेट, सर्वे जारी
रेलवे ने बुड़ामारा-चाकुलिया, बांगरीपोसी-गोरुमहिसानी और बादामपहाड़-केंदुझर सहित तीन महत्वपूर्ण रेल परियोजनाओं की वन भूमि मंजूरी प्रक्रिया पर अपडेट दिया है।

बुड़ामारा-चाकुलिया रेल लाइन के लिए वन भूमि डायवर्जन प्रस्ताव 23 जुलाई 2025 को परिवेश पोर्टल पर जमा किया गया था।
HighLights
बुड़ामारा-चाकुलिया: वन भूमि मंजूरी अक्टूबर 2026 तक अपेक्षित।
बांगरीपोसी-गोरुमहिसानी: स्थानीय विरोध के बावजूद सर्वे जारी।
बादामपहाड़-केंदुझर: तकनीकी कमियों के बाद पुन: सत्यापन हो रहा।
जासं, जमशेदपुर। दक्षिण पूर्व रेलवे की तीन महत्वपूर्ण रेल परियोजनाओं बुड़ामारा-चाकुलिया, बांगरीपोसी-गोरुमहिसानी और बादामपहाड़-केंदुझर को लेकर वन भूमि की मंजूरी प्रक्रिया अब आगे बढ़ रही है।
मुख्य प्रशासनिक अधिकारी (निर्माण) द्वारा इन परियोजनाओं की वर्तमान स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया गया कि सर्वेक्षण, क्षतिपूरक वनीकरण (CA) की भूमि और वन विभाग की आपत्तियों को दूर करने का काम विभिन्न चरणों में जारी है।
बुड़ामारा-चाकुलिया रेलखंड: अक्टूबर तक प्रक्रिया पूरी होने की उम्मीद
रेलवे के अनुसार, बुड़ामारा-चाकुलिया रेल लाइन के लिए वन भूमि डायवर्जन प्रस्ताव 23 जुलाई 2025 को परिवेश पोर्टल पर जमा किया गया था।
वन विभाग द्वारा जताई गई आपत्तियों के बाद ORSAC के माध्यम से नया DGPS सर्वे कराया गया, जिसके आंकड़े अधिकारियों को सौंप दिए गए हैं।
मयूरभंज और क्योंझर में क्षतिपूरक वनीकरण की भूमि के लिए संयुक्त निरीक्षण पूरा हो चुका है। रेलवे का अनुमान है कि सत्यापन और वनीकरण की यह पूरी प्रक्रिया अक्टूबर 2026 तक संपन्न हो जाएगी।
सिमिलिपाल क्षेत्र में स्थानीय विरोध के बीच सर्वे जारी
बांगरीपोसी-गोरुमहिसानी परियोजना को सिमिलिपाल रिजर्व फॉरेस्ट से गुजारने के लिए सर्वे की अनुमति 20 जनवरी 2026 को मिली थी। हालांकि, घाटकुवारी गांव में DGPS सर्वे के दौरान स्थानीय ग्रामीणों के विरोध का सामना करना पड़ा।
जिला प्रशासन और तहसीलदारों के साथ कई दौर की बैठकों के बावजूद गतिरोध पूरी तरह समाप्त नहीं हो पाया है, लेकिन रेलवे ने स्पष्ट किया है कि अलाइनमेंट सर्वे का कार्य रोका नहीं गया है और इसे आगे बढ़ाया जा रहा है।
बादामपहाड़-केंदुझर रेलखंड: दोबारा कराया जा रहा सर्वे
बादामपहाड़-केंदुझर मार्ग के वन डायवर्जन प्रस्ताव पर वन विभाग की आपत्तियों को दूर करने के लिए 26 मार्च 2026 को नई एजेंसी को LOA जारी कर DGPS सर्वे पूरा कराया गया।
PSC-1 जांच में सामने आई तकनीकी कमियों और डेटा में अंतर को ठीक करने के लिए स्वीकृत एजेंसियों से पुन: सत्यापन कराया जा रहा है। क्षतिपूरक वनीकरण के लिए राज्य सरकार के सहयोग से भूमि चिह्नित कर ली गई है।
रेलवे ने आश्वासन दिया है कि सर्वे में अंतर और दोबारा सत्यापन के कारण कुछ देरी जरूर हुई है, लेकिन औपचारिकताएं पूरी होते ही वन स्वीकृति हासिल कर निर्माण कार्य में तेजी लाई जाएगी।
