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रेलवे में नौकरी के नाम पर 13 लाख की ठगी; कोलकाता में फर्जी मेडिकल और ओडिशा स्टेशन पर ट्रेनिंग तक करा दी

Published: Sun, 14 Jun 2026 10:21 PM (GMT+05:30)

जमशेदपुर में सरकारी नौकरी के नाम पर दो युवतियों से 13 लाख रुपये की ठगी का मामला सामने आया है। ...और पढ़ें

एआई द्वारा बनाई गई तस्‍वीर।

एआई द्वारा बनाई गई तस्‍वीर।

HighLights

  1. जमशेदपुर की दो युवतियों से 13 लाख की ठगी।

  2. पुलिस सत्यापन में खुलासा, आरोपियों पर FIR दर्ज।

जागरण संवाददाता, जमशेदपुर। सरकारी नौकरी पाने की चाहत का फायदा उठाकर युवाओं को अपने जाल में फंसाने वाले संगठित साइबर ठग गिरोह का भंडाफोड़ हुआ है। 
 
इस गिरोह ने जमशेदपुर की दो युवतियों और उनके परिवार को ऐसा झांसा दिया कि वे लाखों रुपये गंवाने के बाद भी महीनों तक धोखाधड़ी का शिकार होने का एहसास नहीं कर सके। 
 
ठगों ने न केवल फर्जी मेडिकल कराया, बल्कि बाकायदा जॉइनिंग लेटर देकर ओडिशा के एक रेलवे स्टेशन पर टिकट काउंटर का प्रशिक्षण (ट्रेनिंग) भी दिलवा दिया। 
 
इस हाईटेक ठगी को लेकर जमशेदपुर के सीतारामडेरा थाना क्षेत्र के भालूबासा (मुस्लिम बस्ती) निवासी बुसरा खातून ने प्राथमिकी दर्ज कराई है। पुलिस को दिए आवेदन में करीब 13 लाख रुपये की ठगी का आरोप लगाया गया है।
 

इन लोगों के खिलाफ दर्ज हुई प्राथमिकी 

पीड़िता ने इस ठगी के मामले में कई नामजद और अज्ञात लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है, जिनमें मो. फैसल (भालूबासा निवासी), निखिल, संजीता खेरसल, एसके मो. साहेब आलम, बीआर सिंह अस्पताल (इस्टर्न रेलवे) का कथित मेडिकल स्टाफ और 10 अन्य अज्ञात सहयोगी शामिल हैं।

पीड़िता ने आरोपियों के मोबाइल नंबर, बैंक खातों के विवरण और उनके द्वारा दिए गए फर्जी दस्तावेज भी पुलिस को सौंप दिए हैं। पुलिस केस दर्ज कर जांच में जुट गई है।
 

कैसे शुरू हुआ ठगी का यह खेल?  

1. सीधे संपर्क का दावा और 15 लाख की डिमांड 

शिकायत के मुताबिक, बुसरा खातून और उनकी फुफेरी बहन शाहिबा नफीस रेलवे भर्ती बोर्ड (RRB) सहित अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रही थीं। इसी दौरान वर्ष 2025 में उनके पिता की मुलाकात मो. फैसल नामक व्यक्ति से हुई। 
 
फैसल ने दावा किया कि रेलवे के शीर्ष अधिकारियों से उसके सीधे संबंध हैं। उसने बिना किसी परीक्षा या औपचारिक प्रक्रिया के दोनों बहनों की सीधी भर्ती कराने का भरोसा दिलाया। 
 
शुरुआत में प्रति व्यक्ति 8 लाख रुपये का खर्च बताया गया, लेकिन बाद में दोनों बहनों के लिए कुल 15 लाख रुपये का सौदा तय हुआ।
 

2. किश्तों में लिए रुपये और दस्तावेज 

परिवार ने फैसल पर भरोसा करते हुए 17 अक्‍तूबर 2025 को पहली किस्‍त के रूप में 1 लाख रुपये का नकद भुगतान किया। इसके बाद आरोपियों ने दोनों युवतियों के पहचान पत्र (पैन कार्ड आदि), शैक्षणिक प्रमाणपत्र और अन्य जरूरी दस्तावेज अपने कब्जे में ले लिए।  
इसके बाद मेडिकल जांच, दस्तावेज सत्यापन और कथित इंटरव्यू के नाम पर अलग-अलग बैंक खातों और यूपीआई (UPI) आईडी के जरिए किस्‍तों में कुल 13 लाख रुपये वसूल लिए गए।  
 

फर्जीवाड़ा ऐसा कि असली भी शरमा जाए!  

कोलकाता में मेडिकल और फर्जी ईमेल का जाल 

ठगों के इस गिरोह का नेटवर्क बेहद शातिर था। कुछ समय बाद पीड़ित परिवार को रेलवे अधिकारियों के नाम से मिलते-जुलते आधिकारिक दिखने वाले फर्जी ईमेल आईडी से संदेश प्राप्त हुए। 
 
इन ईमेल्स में दोनों युवतियों को कोलकाता स्थित रेलवे मुख्यालय और बीआर सिंह रेलवे अस्पताल में मेडिकल जांच व दस्तावेज सत्यापन (Document Verification) के लिए उपस्थित होने का निर्देश दिया गया था।
 
ईमेल की प्रामाणिकता और दस्तावेजों की बनावट को देखकर परिवार को पूरी प्रक्रिया बिल्कुल असली लगी। दोनों युवतियां कोलकाता पहुंचीं, जहां अस्पताल के भीतर कुछ कथित स्टाफ की मिलीभगत से उनका मेडिकल परीक्षण भी कराया गया।
 

ओडिशा के राजगंगपुर स्टेशन पर ट्रेनिंग 

ठगी का सबसे हैरान करने वाला मोड़ तब आया जब आरोपियों ने दोनों बहनों को बकायदा रेलवे का जॉइनिंग लेटर सौंप दिया। इसके बाद उन्हें प्रशिक्षण के लिए ओडिशा के राजगंगपुर रेलवे स्टेशन भेज दिया गया। 
 
वहां युवतियों को बाकायदा टिकट काउंटर संभालने समेत रेलवे के अन्य दैनिक कार्यों का प्रशिक्षण भी दिया गया। इस ट्रेनिंग पीरियड के दौरान भी आरोपी अलग-अलग प्रशासनिक खर्चों के नाम पर परिवार से पैसे ऐंठते रहे।
 

पुलिस वेरिफिकेशन ने खोला राज, अब मिल रही धमकियां 

इस पूरी साजिश का पर्दाफाश तब हुआ जब विभाग में जॉइनिंग के बाद होने वाले पुलिस सत्यापन (Police Verification) की प्रक्रिया शुरू हुई। 
 
स्थानीय स्तर पर जब नियुक्ति प्रक्रिया और जॉइनिंग से जुड़े दस्तावेजों की गहन जांच की गई, तो पता चला कि दोनों युवतियों को दिए गए नियुक्ति पत्र और पूरी भर्ती प्रक्रिया पूरी तरह फर्जी थी। 
 
ठगी का अहसास होने पर जब पीड़ित परिवार ने मुख्य आरोपी मो. फैसल और उसके सहयोगियों से संपर्क कर अपने पैसे वापस मांगे, तो वे पहले टालमटोल करने लगे। 
 
पीड़िता का आरोप है कि कड़ा विरोध करने और पुलिस में जाने की बात कहने पर अब आरोपियों द्वारा पूरे परिवार को गंभीर परिणाम भुगतने की धमकियां दी जा रही हैं।
 
पुलिस की कार्रवाई: सीतारामडेरा थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस बैंक खातों के लेन-देन, फर्जी ईमेल आईडी के आईपी एड्रेस और ओडिशा से लेकर कोलकाता तक जुड़े इस ठगी के बड़े नेटवर्क को खंगालने में जुटी है।

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