रेलवे में फर्जी ई-मेल से मेडिकल-ट्रेनिंग तक कराई : जमशेदपुर की दो युवतियों से 13 लाख ठगने वाला दबोचा गया
जमशेदपुर में रेलवे में नौकरी दिलाने के नाम पर दो युवतियों और उनके परिवार से करीब 13 लाख रुपये की ...और पढ़ें

पुलिस ने मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए कोलकाता के बेनियापुकुर निवासी शातिर शेख शाहिद आलम को गिरफ्तार कर लिया है।
HighLights
जमशेदपुर की दो युवतियों से 13 लाख की ठगी।
रेलवे में नौकरी दिलाने का झांसा देकर फंसाया।
कोलकाता से मुख्य आरोपी शेख शाहिद आलम गिरफ्तार।
जासं, जमशेदपुर। रेलवे में नौकरी दिलाने का झांसा देकर दो युवतियों और उनके परिवार से करीब 13 लाख रुपये की ठगी करने वाले गिरोह के खिलाफ सीतारामडेरा थाना पुलिस को बड़ी सफलता मिली है।
पुलिस ने मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए कोलकाता के बेनियापुकुर निवासी शातिर शेख शाहिद आलम को गिरफ्तार कर लिया है।
इस मामले में पुलिस एक अन्य आरोपित को पहले ही जेल भेज चुकी है, जबकि गिरोह में शामिल अन्य सदस्यों की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी की जा रही है।
सीतारामडेरा थाना क्षेत्र की भालूबासा मुस्लिम बस्ती निवासी बुसरा खातून की शिकायत पर पुलिस ने मामला दर्ज किया है।
प्राथमिकी में मो. फैसल, निखिल, संजीता खेरसल, एसके मो. साहेब आलम, ईस्टर्न रेलवे के मेडिकल स्टाफ और दस अज्ञात लोगों को आरोपी बनाया गया है।
पीड़िता बुसरा खातून और उनकी फुफेरी बहन शाहिबा नफीस रेलवे भर्ती बोर्ड की तैयारी कर रही थीं। वर्ष 2025 में उनके पिता की मुलाकात मो. फैसल से हुई।
जिसने रेलवे के वरिष्ठ अधिकारियों से सीधी पहुंच का दावा करते हुए बिना परीक्षा के नौकरी का झांसा दिया। शुरुआती बातचीत में 8 लाख रुपये की मांग की गई, जिसे बाद में बढ़ाकर 15 लाख रुपये कर दिया गया।
आरोपियों ने 17 अक्टूबर 2025 को पहली किस्त के रूप में एक लाख रुपये लिए और अभ्यर्थियों के पहचान व शैक्षणिक दस्तावेज जमा करवा लिए।
इसके बाद रेलवे अधिकारियों के नाम से मिलते-जुलते फर्जी ई-मेल भेजकर युवतियों को कोलकाता में मेडिकल जांच और सत्यापन के लिए बुलाया गया।
ठगों के नेटवर्क ने फर्जीवाड़ा छुपाने के लिए पीड़ितों को फर्जी जॉइनिंग लेटर तक थमा दिया और उन्हें ओडिशा के राजगंगपुर रेलवे स्टेशन पर फर्जी ट्रेनिंग के लिए भेज दिया, जहां उनसे टिकट काउंटर आदि का कार्य कराया गया।
पुलिस सत्यापन के दौरान खुला राज
मामले का भंडाफोड़ तब हुआ जब पुलिस सत्यापन की प्रक्रिया के दौरान अधिकारियों ने दस्तावेजों और नियुक्ति प्रक्रिया में गंभीर गड़बड़ी पाई।
जालसाजी का अहसास होने पर जब परिवार ने अपनी रकम वापस मांगी, तो आरोपी टालमटोल करने लगे। आखिरकार मामला पुलिस तक पहुंचा और गिरोह के नेटवर्क पर शिकंजा कसा गया।
