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जमशेदपुर में क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट की उड़ रही धज्जियां: एक्यूप्रेशर की डिग्री पर फिजियोथेरेपी सेंटर

Published: Mon, 07 Sep 2026 10:34 PM (GMT+05:30)

जमशेदपुर में विश्व फिजियोथेरेपी दिवस पर फर्जी फिजियोथेरेपी सेंटरों का खुलासा हुआ है, जहां अयोग्य लोग मरीजों का इलाज कर रहे हैं।

फिजियोथेरेपी के नाम पर धड़ल्ले से चल रहे दर्जनों सेंटरों पर फर्जीवाड़े और अयोग्य लोगों द्वारा मरीजों का इलाज करने के आरोप लगे हैं।

फिजियोथेरेपी के नाम पर धड़ल्ले से चल रहे दर्जनों सेंटरों पर फर्जीवाड़े और अयोग्य लोगों द्वारा मरीजों का इलाज करने के आरोप लगे हैं।

HighLights

  1. जमशेदपुर में फर्जी फिजियोथेरेपी सेंटरों का संचालन उजागर।

  2. अयोग्य लोग बिना पंजीकरण मरीजों का इलाज कर रहे।

  3. सिविल सर्जन ने जांच अभियान चलाने का आश्वासन दिया।

अमित तिवारी, जमशेदपुर। विश्व फिजियोथेरेपी दिवस के अवसर पर जमशेदपुर में स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ा एक गंभीर और संवेदनशील मामला सामने आया है। 
 
शहर में फिजियोथेरेपी के नाम पर धड़ल्ले से चल रहे दर्जनों सेंटरों पर फर्जीवाड़े और अयोग्य लोगों द्वारा मरीजों का इलाज करने के आरोप लगे हैं। 
 
इंडियन फिजियोथेरेपी एसोसिएशन (IAP) के अनुसार, जमशेदपुर में लगभग 90 फिजियोथेरेपी सेंटर संचालित हैं, जिनमें से 35 से 40 सेंटरों के संचालन, डॉक्टरों की योग्यता और उनके वैध रजिस्ट्रेशन पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
 

पड़ताल में सामने आई जमीनी हकीकत 

सोमवार को मानगो-पारडीह रोड स्थित एक फिजियोथेरेपी सेंटर के जायजे के दौरान यह बात सामने आई कि मौके पर कोई भी प्रशिक्षित फिजियोथेरेपिस्ट मौजूद नहीं था, जबकि वहां पांच मरीज इलाज करा रहे थे। 
 
पड़ताल में यह भी खुलासा हुआ कि एक्यूप्रेशर की डिग्री रखने वाले लोग और गैर-मेडिकल बैकग्राउंड वाले व्यक्ति भी व्यावसायिक रूप से फिजियोथेरेपी सेंटर चला रहे हैं। 
 
यह स्थिति इस बात को उजागर करती है कि मरीजों का इलाज किसकी देखरेख में हो रहा है और उनकी डिग्री व रजिस्ट्रेशन की जांच करने वाला कोई नहीं है।
 

बिना रजिस्ट्रेशन प्रैक्टिस करना दंडनीय अपराध 

झारखंड राज्य फिजियोथेरेपी परिषद अधिनियम के तहत राज्य में फिजियोथेरेपी प्रैक्टिस के लिए काउंसिल में पंजीकृत होना अनिवार्य है। 
 
कानून के अनुसार, रजिस्टर में नाम दर्ज व्यक्ति के अलावा कोई भी अन्य व्यक्ति फिजियोथेरेपी का अभ्यास नहीं कर सकता और ऐसा करना दंडनीय अपराध है। 
 
इसके अलावा, क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट के तहत फिजियोथेरेपी सेंटरों को न्यूनतम मानकों, आवश्यक क्वालिफाइड स्टाफ और मरीजों के मेडिकल रिकॉर्ड का नियमित पालन करना अनिवार्य है।
 

गलत इलाज का गंभीर खतरा 

फिजियोथेरेपी केवल मशीन लगाने या सामान्य कसरत कराने तक सीमित नहीं है। स्ट्रोक, पैरालिसिस, नसों की बीमारी, रीढ़ की हड्डी की समस्या या सर्जरी के बाद मरीज के पुनर्वास (Rehabilitation) के लिए सटीक उपचार आवश्यक होता है। 
 
गलत तकनीक या इलेक्ट्रोथेरेपी के अनुचित इस्तेमाल से मरीज की समस्या गंभीर रूप से बढ़ सकती है या वह हमेशा के लिए दिव्यांग हो सकता है।
 

सिविल सर्जन का आश्वासन 

मामले की गंभीरता को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग और सिविल सर्जन ने आश्वस्त किया है कि जल्द ही शहर के सभी फिजियोथेरेपी सेंटरों की जांच के लिए विशेष अभियान चलाया जाएगा। 

अवैध तरीके से संचालित फिजियोथेरेपी सेंटरों की सूची तैयार की जा रही है। इसे जल्द सिविल सर्जन और स्वास्थ्य विभाग को सौंपा जाएगा, ताकि मरीजों की जान से खिलवाड़ रोका जा सके।

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डाॅ. अजीत कुमार, प्रदेश अध्यक्ष, आइएपी

बिना डिग्री और रजिस्ट्रेशन के फिजियोथेरेपी सेंटर संचालित नहीं किया जा सकता। ऐसे कुछ लोगों के खिलाफ हाल में कार्रवाई हुई है। जल्द ही अभियान चलाकर दोषियों को चिन्हित कर सख्त कार्रवाई होगी।

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डाॅ. साहिर पाल, सिविल सर्जन