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वात्सल्य के आगे सिमटीं दूरियां: न्यूजीलैंड की 'सिंगल मदर' को मिला जमशेदपुर का लाल

Published: Wed, 28 Oct 2026 07:18 PM (IST)

जमशेदपुर के सोनारी स्थित विशेष दत्तक ग्रहण संस्थान से एक अनाथ बच्चे को न्यूजीलैंड की एकल मां ने गोद लिया ...और पढ़ें

समाहरणालय स्थित अपने कार्यालय कक्ष में उपायुक्त राजीव रंजन ने मासूम को  न्यूजीलैंड निवासी महिला को सुपुर्द किया।

समाहरणालय स्थित अपने कार्यालय कक्ष में उपायुक्त राजीव रंजन ने मासूम को  न्यूजीलैंड निवासी महिला को सुपुर्द किया।

HighLights

  1. जमशेदपुर के अनाथ बच्चे को न्यूजीलैंड की मां ने गोद लिया।

  2. अंतरराष्ट्रीय दत्तक ग्रहण 'हेग कन्वेंशन' और 'कारा' नियमों के तहत हुआ।

  3. उपायुक्त राजीव रंजन ने बच्चे को विदेशी मां को सौंपा।

जागरण संवाददाता, जमशेदपुर। सरहदें और सात समंदर की दूरियां भी वात्सल्य और वात्सल्य भाव के आगे सिमट गईं।
 
सोनारी स्थित विशेष दत्तक ग्रहण संस्थान (SAA) में पल रहे एक अनाथ बच्चे को सुदूर न्यूजीलैंड में नया जीवन और मां की ममता की छांव मिल गई है। 
 
समाहरणालय स्थित अपने कार्यालय कक्ष में बुधवार को उपायुक्त राजीव रंजन ने सभी विधिक दत्तक प्रक्रियाएं पूर्ण होने के बाद मासूम को न्यूजीलैंड निवासी एकल मां (सिंगल मदर) के सुपुर्द किया। 
 

जानें क्‍या होता है 'कारा' और हेग कन्वेंशन 

बच्चे को गोद में लेते ही विदेशी मां की आंखें खुशी से छलक पड़ीं। यह अंतरराष्ट्रीय दत्तक ग्रहण 'हेग कन्वेंशन' और भारत सरकार के केंद्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण (CARA) के कड़े नियमों व मानकों के तहत संपन्न हुआ। 
 
दत्तक मां ने करीब दो वर्ष पूर्व न्यूजीलैंड के बाल कल्याण विभाग व वहां की अधिकृत एजेंसी के माध्यम से ‘कारा’ पोर्टल पर आवेदन किया था।
 
विदेशी एजेंसी द्वारा तैयार सामाजिक, आर्थिक व मनोवैज्ञानिक होम स्टडी रिपोर्ट और पृष्ठभूमि सत्यापन के बाद भारत सरकार ने अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) जारी किया। 
 
संशोधित किशोर न्याय (JJ) अधिनियम के तहत जिला उपायुक्त को सीधे दत्तक आदेश पारित करने का अधिकार मिलने से यह जटिल प्रक्रिया समयबद्ध तरीके से पूरी हो सकी।
 

पहचान गोपनीय, एकल मातृत्व को मिला कानूनी संबल 

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 74 के तहत बच्चे की सुरक्षा और परिवार की निजता को ध्यान में रखते हुए गोद लेने वाली महिला और उनके शहर की पहचान को प्रशासन द्वारा पूरी तरह गोपनीय रखा गया है। 
 
उल्लेखनीय है कि भारतीय कानून के तहत सक्षम एकल महिला (Single Woman) को बच्चा गोद लेने का पूर्ण कानूनी अधिकार प्राप्त है।
 
उपायुक्त राजीव रंजन ने नए परिवार को सुखद भविष्य की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि अनाथ और बेसहारा बच्चों को सुरक्षित, स्नेहपूर्ण व स्थायी पारिवारिक परिवेश देना जिला प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है।
 

सात माह में आठ अनाथ बच्चों को मिला नया आशियाना 

पूर्वी सिंहभूम जिला प्रशासन बेसहारा बच्चों के पुनर्वास और बाल संरक्षण की दिशा में लगातार सक्रिय भूमिका निभा रहा है। चालू वित्तीय वर्ष में 1 अप्रैल 2026 से अब तक सोनारी संस्थान से कुल आठ बच्चों को नया परिवार मिल चुका है।
 
उल्लेखनीय है कि महज चार दिन पूर्व ही 24 अक्टूबर को सातवें बच्चे को रांची के एक दंपती को सौंपा गया था। अब इस आठवें बच्चे का सुदूर न्यूजीलैंड में अंतरराष्ट्रीय पुनर्वास जिले में बाल संरक्षण के क्षेत्र में एक बड़ी मानवीय उपलब्धि माना जा रहा है।