दिलीप कुमार, जमशेदपुर : कोल्हान के आदिवासी खरसावां गोलीकांड की याद में पहली और दूसरी जनवरी को नववर्ष का जश्न नहीं मनाएंगे। उस दिन वे काला दिवस मनाएंगे। गौरतलब हो कि वर्ष 1948 को एक जनवरी के दिन ओडिशा की मिलिट्री पुलिस द्वारा सभा कर रहे आदिवासियों पर अंधाधुंध फायरिग की गई थी। इस फायरिग में बड़ी संख्या में आंदोलनकारी मारे गए थे। पुलिस ने महिला और बच्चों को भी नहीं बख्शा था। इस घटना के शोक में कोल्हान के आदिवासी नए साल का जश्न नहीं मनाते बल्कि उस गिन काला दिन मनाते हैं।

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जानें पूरा मामला : खरसावा रियासत का विलय ओडिशा राज्य में किए जाने का विरोध कर रहे स्थानीय आदोलनकारियों पर की गई फायरिग की इस घटना को आजाद भारत का जलियांवाला बाग कांड कहा जाता है। उस समय बिहार के आदिवासी नहीं चाहते थे कि 'खरसावा रियासत' ओडिशा का हिस्सा बने, लेकिन केंद्र के दबाव में मयूरभंज और सरायकेला के साथ 'खरसावा रियासत' को ओडिशा में शामिल करने का समझौता हो चुका था। उस समय तीनों रियासतों के आदिवासी झारखंड राज्य की माग कर रहे थे। पहली जनवरी 1948 को सत्ता का हस्तातरण होना था, जिस समय अलग झारखंड राज्य की माग करने वाले करीब पचास हजार आदिवासी आदोलनकारी खरसावा में एकत्रित होकर इसका विरोध कर रहे थे। सभा में शामिल होने के लिए पूरे कोल्हान समेत तमाड़, राची, खूंटी, सिमडेगा समेत दूरदराज से आदिवासी आदोलनकारी खरसावा हाट मैदान पहुंचे थे। सभी के बीच में ओडिशा मिलिट्री पुलिस द्वारा बगैर सूचना के अंधाधुंध फायरिग की गई, जिसमें अनगिनत आंदोलनकारी मारे गए थे। गोलीकाड के बाद खरसावा हाट में 'शहीद स्मारक' बनाया गया। यहां प्रतिवर्ष पहली जनवरी को बड़ी संख्या मे झारखंडी जनता एकत्रित होकर शहीदों को नमन करते हैं।

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कैंडल मार्च निकालकर दी श्रद्धांजलि

आदिवासी हो समाज युवा महासभा ने खरसावां गोलीकांड दिवस के पूर्व संध्या पर कैंडल मार्च निकालकर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की। गोलमुरी स्थित आदिवासी हो समाज भवन के सामने महासभा के जिलाध्यक्ष सुरा बिरुली के नेतृत्व में कैंडल मार्च निकाले जाने के बाद मशाल जुलूस भी निकाला गया। मौके पर बताया गया कि पहली और दूसरी जनवरी आदिवासी समुदाय पिकनिक नहीं मनाएंगे। सुरा बिरुली ने बताया कि बुधवार पहली जनवरी को आदिवासी हो समाज युवा महासभा के सदस्य गोलमुरी से बाइक रैली निकाल कर खरसावां जाएंगे, जहां पारंपरिक रूप से श्रद्धांजलि अर्पित कर शहादत दिवस मनाया जाएगा। मौके पर समीर कालुंडिया, शाति सिदु, उपेंद्र बानरा, विश्वजित लागुरी, सदन गागराई, बुधन सिंह बानरा, दुर्गाचरण बारी, आशा पूर्ती, संजय हासदा, निकिता सोय, जगदीश देवगम समेत कई सदस्य मौजूद थे।

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बागुनहातु में भी कैंडल मार्च

जासं, जमशेदपुर : आदिवासी हो समाज भवन बागुनहातु से कैंडल मार्च निकाल कर खरसावां गोलीकांड के शहीदों को श्रद्धा सुमन अर्पित किया गया। शहीदों को श्रद्धाजंलि अर्पित करने के बाद निकाला गया कैंडल मार्च बागुनहातु चौक होते हुए 28 नंबर चौक, साकची-बारीडीह मुख्य मार्ग पहुंचकर समाप्त हुआ। कैंडल मार्च में रवि सवैया, शिवचरण बारी, रायसिंह तुबिड, शंभु मुखी, रवींद्र प्रसाद, हरिश तमसोय, बादल लागुरी समेत आदिवासी हो समाज, मानगो, एसटी-एससी वेलफेयर समिति, जमशेदपुर, आदिवासी हो समाज कल्याण समिति, बिरसानगर, आदिवासी हो समाज, जाहेराटोला और विभिन्न सामाजिक संगठनों के सदस्य शामिल हुए।

Posted By: Jagran

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