जमशेदपुर (दिलीप कुमार)। कोरोना का असर गणेश व दुर्गा पूजन पर भी पड़ने वाला है। सावन शुरू हो चुका है। फिर भी शहर में अब तक न पंडाल बने रहे न ही देवी की प्रतिमा। किसी भी पूजा कमेटी ने अबतक भूमि पूजन भी नहीं किया है। गणेशोत्सव व दुर्गोत्सव को लेकर अब तक किसी मूर्तिकार को भव्य और विशाल प्रतिमा निर्माण के लिए कोई ऑर्डर भी नहीं मिला है। ऐसे में शहर और आसपास के मूर्तिकारों की आर्थिक स्थिति खराब होती जा रही है। काम नहीं मिलने के कारण मूर्तिकारों के समक्ष परिवार का भरण-पोषण की समस्या उत्पन्न हो गई है। कदमा में होने वाले शहर का सबसे बड़ा और भव्य गणेशोत्सव पहले ही स्थगित कर दिया गया है। कोरोना महामारी के कारण अब इस वर्ष दुर्गोत्सव के आयोजन को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।

अमूमन सावन शुरू होने के पहले से ही गणेश भगवान व मां दुर्गा की भव्य व विशाल प्रतिमाएं बनने लगती थीं। पंडालों का भूमिपूजन भी होने लगता था। शहर में करीब 55 छोटे-बड़े मूर्तिकार लौहनगरी में छोटे-बड़े करीब 55 मूर्तिकार हैं। इनमें से किसी को भव्य व विशाल प्रतिमा बनाने के लिए अब तक ऑर्डर नहीं मिला है। कुछ पूजा कमेटियों ने मूर्तिकारों को पूजा की परंपरा और विधि का निर्वाह करने के लिए छोटे आकार की प्रतिमाओं का आर्डर दिया है। कुछ मूर्तिकारों ने छोटी-छोटी प्रतिमा बनाने का जोखिम भी उठाया है। लॉकडाउन के कारण बाहर से आने वाले मूर्तिकार या सहायक मूर्तिकार भी नहीं पहुंच पाए हैं। बेल्डीह कालीबाड़ी में मां दुर्गा की प्रतिमा खड़गपुर के मूर्तिकार अजय चक्रवर्ती बनाते हैं। कालीबाड़ी के ट्रस्टी मोनू¨बदु भट्टाचार्य ने बताया कि दुर्गा पूजा को लेकर अनिश्चितता कायम है। इसी वजह से उन्होंने मूर्तिकार को नहीं बुलाया है। कई पूजा कमेटी ने सिर्फ कलश स्थापित कर दुर्गा पूजा करने का निर्णय लिया है।

करीब चार करोड़ का है मूर्ति का कारोबार

लौहनगरी में मूर्ति निर्माण का कारोबार करीब चार करोड़ का है। 20 ऐसे बड़े मूर्तिकार हैं जो प्रतिवर्ष 12-13 विशाल व भव्य मूर्तियां बनाते हैं। इनकी कीमत 15 से 20 हजार रुपये होती है। एक-एक मूर्तिकार छह से सात लाख तक की मूर्ति आपूर्ति करते हैं। इसके अलावा छोटी-छोटी मूर्तियां बनाते हैं। लॉकडाउन के कारण बड़े-बड़े मूर्तिकार बगैर सहयोगी के छोटे-छोटे मूर्ति बनाने में जुटे हुए हैं। उनके पास काम करने वाले मजदूर भी रोजगार से वंचित हो गए हैं। छोटे मूर्तिकार काम नहीं मिलने के कारण लगभग खाली बैठे हैं।

चार सौ से अधिक स्थानों में होती है पूजा

शहर में चार सौ से अधिक स्थानों पर दुर्गा पूजा होती है। 320 पूजा कमेटी केंद्रीय दुर्गा पूजा कमेटी, जमशेदपुर से निबंधित हैं। इसके अलावा कई पूजा कमेटी हैं, जो निबंधित नहीं हैं। कई सोसाइटी व अपार्टमेंटों में भी छोटे स्तर पर दुर्गा पूजा का आयोजन किया जाता है।

22 फीट की जगह अब पांच फीट की प्रतिमा

दुर्गोत्सव के दौरान शहर में मां दुर्गा की 22 फीट ऊंची प्रतिमा भी स्थापित की जाती है। टेल्को में जहां 22 फीट की प्रतिमा बनती है वहीं बेल्डीह स्थित कालीबाड़ी में पिछले वर्ष मांग दुर्गा की 18 फीट की प्रतिमा बनाई गई थी। कोरोना काल में इस वर्ष ऐसा होता दिखाई नहीं दे रहा है। मूर्तिकारों को जो ऑर्डर मिले हैं वे सभी चार से पांच फीट ऊंची प्रतिमा की ही है।गणेश पूजा और दुर्गा पूजा के लिए अब तक मूर्ति निर्माण का एक भी ऑर्डर नहीं मिला है। दूसरे प्रदेशों से सामान भी नहीं आ रहा है। प्रतिवर्ष मां दुर्गा की 14 विशाल प्रतिमा का निर्माण करते हैं।

विश्वनाथ मल्लिक, मूर्तिकार, उलियान, कदमा

 सहायता नहीं मिलने पर शहर के मूर्तिकारों की स्थिति दयनीय हो जाएगी। इस वर्ष सरस्वती पूजा के बाद मूर्तिकार बेकार बैठे हैं। जमा पैसे ही परिवार चला रहे हैं। गणेश पूजा में जहां 35 से 40 ऑर्डर आते थे, वहीं इस वर्ष मात्र दस ऑर्डर आया है। - भरत पॉल, मूर्तिकार, साकची 

प्रतिवर्ष 35 बड़ी दुर्गा प्रतिमा का ऑर्डर मिलता था, इस वर्ष कोरोना संक्रमण को लेकर तीन छोटी प्रतिमा का ऑर्डर मिला है। रामनवमी में भारी घाटा उठाना पड़ा है। एक लाख पूंजी लगाकर दस दुर्गा प्रतिमाओं का निर्माण कर रहे हैं। - अजीत पॉल, मूर्तिकार, साकची

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