जमशेदपुर (जागरण संवाददाता)। सावन में जब भोले बाबा का दरबार ही सूना हो तो बाजार में मायूसी छाना लाजिमी है। पिछले साल तक इस सीजन में गली-गली में सजे दुकानों में केसरिया रंग के वस्त्र और कांवर लटके मिलते थे। हर तरफ बाबा के प्रताप की गूंज होती थी।

माहौल पूरा भक्तिमय हुआ करता था। बाबा की नगरी देवघर जाने वालों का तांता लगा रहता था। बस व ट्रेन में तिल रखने की जगह नहीं होती थी। लेकिन समय का चक्र देखिए। सावन के महीने में ना तो वैसा कोई उत्साह दिख रहा है और ना ही बाजार में रौनक। साकची, बिष्टुपुर, मानगो, बारीडीह, आदित्यपुर आदि क्षेत्र के दुकानों में कांवर नहीं सजी हैं।

15 दिन पहले से ही सावन बाजार सज जाता था

शिवभक्तों के चेहरे पर मायूसी नजर आ रही है। कांवर यात्रा नहीं निकलने से दुकानदारों को भी तगड़ा झटका लगा है। पहले सावन का पवित्र माह शुरू होने के 15 दिन पहले से ही सावन बाजार सज जाता था। कारोबारियों की माने तो बाबाधाम वाला नारंगी रंग का गमछा, बोल-बम वाली टी-शर्ट, गंजी, बारमूडा, टोपी, बैग, नारंगी रंग की साड़ी आदि की बिक्री ना के बराबर हो रही है। 75 करोड़ रुपये की सावन में बिकती थी सामग्री साकची बाजार के दुकानदार सुमित अग्रवाल ने अपना दर्द साझा करते हुए कहा, कोरोना के चलते तीन महीने तक दुकानें बंद रही। इस दौरान कई बड़े त्योहार मनाए गए, लेकिन बाजार फीका ही रहा। कांवर यात्रा न निकलने से रेडिमेड, पूजन सामग्री आदि की बिक्री नाम मात्र हो रही है।

करीब 75 करोड़ का होता था सावन में कपड़ों का कारोबार

सावन के दौरान शहर में कपड़े का कारोबार करीब 75 करोड़ का होता था। लेकिन अब एकाध लाख का भी हो जाए तो काफी है। कांवर बेचने वाले दुकानदार प्रमोद प्रसाद ने बताया कि कोरोना महामारी के कारण कांवर का कारोबार पूरी तरह से ठप पड़ गया है। बाबा धाम में श्रावणी मेले पर रोक और लॉकडाउन में शिवालयों के बंद रहने से श्रद्धालु इस वर्ष कांवर लेकर जलार्पण करने नहीं जा रहे हैं। लौहनगरी समेत आसपास के इलाकों से बड़ी संख्या में कांवरियों का जत्था बाबा नगरी जाते थे।

ऐसे में बाजार पर खासा असर पड़ रहा है। श्रृंगार बाजार में भी छाई मंदी कोरोना काल में आए सावन माह में श्रृंगार बाजार में भी मंदी छाई है। लॉकडाउन के कारण एक तो महिलाएं बेवजह घर से बाहर नहीं निकल रहीे हैं। वहीं मंदिर और अन्य पूजा स्थल बंद रहने के कारण उन्हें अपने घर में ही आराध्यदेव की पूजा-अर्चना करना पड़ रहा है। सावन में महिलाएं विशेष रूप से सोलह श्रृंगार करती हैं। इस वर्ष कोरोना संक्रमण के कारण सिर्फ चूड़ी बाजार औसतन ठीक है। मेहंदी और अन्य सौंदर्य प्रसाधनों की बिक्री कम हो गई है। बिष्टुपुर के चूड़ी विक्रेता अफरोज ने बताया कि पवित्र सावन के दौरान महिलाएं जिस संख्या में चूड़ी पहनने पहुंचती थी, ऐसा इस वर्ष नहीं है।

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