Sansad Ratna : यह मेरा नहीं, जमशेदपुर का सम्मान है; लगातार 5वीं बार 'संसद रत्न' मिलने पर बोले बिद्युत बरण
जमशेदपुर के सांसद बिद्युत बरण महतो को लगातार पांचवीं बार प्रतिष्ठित 'संसद रत्न पुरस्कार' से सम्मानित किया गया है।

नई दिल्ली स्थित डॉ. अंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर के भीम हॉल में केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री जी. किशन रेड्डी ने बिद्युत बरण महतो को पुरस्कार दिया।
जासं, जमशेदपुर। लोकसभा में जनहित के मुद्दों को उठाने और विधायी कार्यों में बेहतर प्रदर्शन करने वाले जमशेदपुर के सांसद बिद्युत बरण महतो ने राष्ट्रीय स्तर पर एक बार फिर अपनी कार्यकुशलता साबित की है।
सदन में निरंतर उपस्थिति, विधायी सक्रियता और जनसरोकार के प्रश्नों को उठाने के मामले में उन्हें लगातार पांचवीं बार प्रतिष्ठित 'संसद रत्न पुरस्कार' से नवाजा गया है।
नई दिल्ली स्थित डॉ. अंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर के भीम हॉल में आयोजित गरिमामयी समारोह में केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री जी. किशन रेड्डी ने बिद्युत बरण महतो को यह पुरस्कार दिया।
समारोह में केंद्रीय राज्य मंत्री सुकांत मजूमदार सम्मानित अतिथि के रूप में मौजूद रहे, जबकि सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति बी. आर. गवई ने मुख्य वक्ता के रूप में अपने विचार रखे।
डॉ. कलाम की सोच से शुरू हुआ था 'संसद रत्न'
प्राइम प्वाइंट फाउंडेशन के तत्वावधान में संचालित संसद रत्न पुरस्कार की स्थापना पूर्व राष्ट्रपति भारत रत्न डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम के सुझाव पर की गई थी।
इसके तहत सांसदों की सदन में उपस्थिति, बहसों में भागीदारी, प्राइवेट मेंबर बिल और पूछे गए प्रश्नों का पारदर्शी मूल्यांकन किया जाता है।
इस वर्ष कुल 10 लोकसभा सांसदों, 2 राज्यसभा सदस्यों और 4 संसदीय स्थायी समितियों को इस सम्मान के लिए चुना गया।
समारोह में बिद्युत महतो के अलावा सांसद जगदंबिका पाल, निशिकांत दुबे, पी. पी. चौधरी, एकनाथ शिंदे सहित अन्य प्रमुख जनप्रतिनिधियों को भी सम्मानित किया गया।
वहीं कृषि, वित्त, ग्रामीण विकास और कोयला एवं खान से जुड़ी संसदीय समितियों को उनके उत्कृष्ट कामकाज के लिए पुरस्कृत किया गया।
जनता के भरोसे और आशीर्वाद का परिणाम
लगातार पांचवीं बार यह ऐतिहासिक सम्मान मिलने पर सांसद बिद्युत बरण महतो ने इसे जमशेदपुर की जनता को समर्पित किया।
उन्होंने कहा कि यह पुरस्कार उनके व्यक्तिगत प्रयास से अधिक जमशेदपुर की देवतुल्य जनता के आशीर्वाद का परिणाम है।
उनका उद्देश्य कभी पुरस्कार पाना नहीं, बल्कि सदन में जनता की आकांक्षाओं को मजबूती से उठाना रहा है। वे आगे भी पूरी निष्ठा से जनता की आवाज बनकर संसद में काम करते रहेंगे।
